थिम्पू,15 सितंबर (युआईटीवी)- भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को भूटान की राजधानी थिम्पू में देश के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से मुलाकात की। ज्ञानेश कुमार इन दिनों भूटान की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा भारत और भूटान के चुनाव आयोगों के बीच संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान वह भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इसके अलावा उनकी भूटान के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी मुलाकात प्रस्तावित है।
भूटान नरेश ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अपनी मुलाकात की जानकारी साझा की। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और भूटान के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर करीबी संबंध रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों की चुनावी संस्थाओं के बीच सहयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनाव प्रबंधन से जुड़े अनुभवों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूटान यात्रा को लेकर जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य भारत के निर्वाचन आयोग और भूटान के निर्वाचन आयोग के बीच लगातार जारी सहयोग को आगे बढ़ाना और संस्थागत संबंधों को और मजबूत करना है। दोनों देशों के चुनाव आयोग समय-समय पर चुनाव प्रबंधन, मतदाता जागरूकता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभव साझा करते रहे हैं। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूटान यात्रा दोनों संस्थाओं के बीच संवाद को नई गति देने वाली मानी जा रही है।
यात्रा के दौरान मंगलवार को ज्ञानेश कुमार पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम भूटान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाता भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। इस दौरान मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करने और चुनावों में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
भूटान ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ऐसे में राष्ट्रीय मतदाता दिवस जैसे कार्यक्रम मतदाताओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संबंध मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के कारण चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में अपने अनुभवों और तकनीकी क्षमताओं को साझा कर सकता है। वहीं, भूटान की अपनी लोकतांत्रिक यात्रा और चुनावी अनुभव भारत के लिए भी क्षेत्रीय स्तर पर उपयोगी हो सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार बुधवार को थिम्पू में भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के लोकतांत्रिक संस्थानों के बीच सहयोग, चुनाव प्रबंधन और आपसी संबंधों से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। मुख्य चुनाव आयुक्त भूटान के वरिष्ठ सिविल सेवकों के साथ भी संवाद करेंगे। इस दौरान चुनावी व्यवस्था,प्रशासनिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान पर चर्चा हो सकती है।
ज्ञानेश कुमार की यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब भारत और भूटान अपने पारंपरिक और विशेष संबंधों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि लोगों के बीच संपर्क और सामाजिक स्तर पर भी गहरे हैं। भारत और भूटान के बीच शिक्षा, व्यापार, ऊर्जा, विकास सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों के अलावा लोकतांत्रिक संस्थाओं के स्तर पर भी सहयोग बढ़ा है।
इसी व्यापक संबंध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत-भूटान मैत्री संघ भी है। पिछले महीने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने अपनी पत्नी जेटसुन पेमा और भारत-भूटान मैत्री संघ के पदाधिकारियों के साथ इंडिया हाउस में मुलाकात की थी। इस अवसर पर भूटान के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मैत्री संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे थे। इनमें थिम्पू, फुएंटशोलिंग, समत्से, गेलेफू, न्गांगलाम और समद्रुप जोंगखर से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे।
इस मुलाकात को दोनों देशों के लोगों और समुदायों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया था। भारत और भूटान के बीच संबंधों की खासियत यह है कि दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर के साथ-साथ लोगों के बीच भी लंबे समय से मजबूत संपर्क रहा है। भारत-भूटान मैत्री संघ इसी जनस्तरीय जुड़ाव को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाता है।
भारत में भूटानी राजपरिवार की यात्राओं और भारतीय नेतृत्व के भूटान दौरे को दोनों देशों की विशेष मित्रता का प्रतीक माना जाता रहा है। दोनों देशों के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित संबंधों को क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हिमालयी क्षेत्र में भूटान की रणनीतिक और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत के लिए उसके साथ मजबूत संबंध विशेष महत्व रखते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त की वर्तमान यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दोनों देशों की चुनावी संस्थाओं के बीच सहयोग है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्वतंत्र और प्रभावी चुनाव संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान प्रक्रिया, मतदाता जागरूकता, चुनावी तकनीक और चुनाव प्रबंधन तक कई ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ विभिन्न लोकतांत्रिक देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं।
भारत का निर्वाचन आयोग लंबे समय से चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखता है। देश में बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए तकनीक,प्रशासनिक व्यवस्था और मतदाता जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में भारत और भूटान के निर्वाचन आयोगों के बीच संवाद से दोनों देशों को अपने-अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा।
ज्ञानेश कुमार की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और कार्यक्रमों से इसी सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस में उनकी भागीदारी दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच साझा जुड़ाव को भी रेखांकित करेगी। साथ ही प्रधानमंत्री,वरिष्ठ सिविल सेवकों और अन्य अधिकारियों के साथ उनकी मुलाकात से भारत-भूटान संस्थागत संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूटान यात्रा केवल एक आधिकारिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भारत और भूटान के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं के स्तर पर बढ़ते सहयोग का संकेत भी है। भूटान के राजा से उनकी मुलाकात, राष्ट्रीय मतदाता दिवस में उनकी भागीदारी और प्रधानमंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बातचीत दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को नई दिशा दे सकती है। वहीं, लोगों और समुदायों के स्तर पर भारत-भूटान मैत्री को मजबूत करने की लगातार कोशिशें दोनों देशों की विशेष साझेदारी को और गहरा करने में मददगार साबित होंगी।
