प्रयागराज,30 जनवरी (युआईटीवी)- महाकुंभ मेला में हुए भगदड़ के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पाँच प्रमुख बदलावों की घोषणा की है,जिनका उद्देश्य भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचाव करना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। महाकुंभ मेला,जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है,इस बार मौनी अमावस्या के अवसर पर हुए भगदड़ के कारण चर्चा में आया। इस घटना में 30 लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मेला क्षेत्र में कई बदलाव किए हैं।
महाकुंभ मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस बदलाव के तहत,मेला क्षेत्र को अब एक “नो व्हीकल जोन” घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार के वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह कदम विशेष रूप से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है,ताकि उनके बीच किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ या दुर्घटनाओं से बचा जा सके। इस निर्णय के तहत,वीवीआईपी पास को भी रद्द कर दिया गया है,ताकि कोई विशेष पास वाले वाहन मेला क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें।
इसके अलावा, श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के बहाव को सुचारू बनाने के लिए बनाई गई है, ताकि रास्ते में कोई जाम या अव्यवस्था न हो। मेला क्षेत्र में आने-जाने के रास्तों को एक दिशा में ही निर्धारित किया गया है,जिससे दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सके। इसके साथ ही,पड़ोसी जिलों से आने वाले वाहनों को मेला क्षेत्र के प्रवेश से पहले ही रोक दिया जाएगा। यह कदम शहर में भीड़भाड़ को कम करने के लिए उठाया गया है।
शहर में भीड़ कम करने के लिए 4 फरवरी तक चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इस निर्णय के तहत,चार पहिया वाहनों को मेला क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी,जिससे यातायात में कोई अव्यवस्था न हो और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित हो सके।
इन पाँच प्रमुख बदलावों के अलावा,मेला क्षेत्र में भीड़ को अच्छे से प्रबंधित करने के लिए आईएएस अधिकारी आशीष गोयल और भानु गोस्वामी को तत्काल प्रयागराज पहुँचने का निर्देश दिया गया है। इन अधिकारियों ने 2019 अर्धकुंभ में भी मेला प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वे इस बार भी मेला प्रशासन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। आशीष गोयल प्रयागराज के आयुक्त रहे हैं,जबकि भानु गोस्वामी ने जिला मजिस्ट्रेट और कुंभ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया था। इसके अतिरिक्त,बड़े आयोजनों को संभालने में अनुभवी पाँच विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को भी महाकुंभ मेला संचालन में मदद के लिए नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना के बाद व्यवस्था को सुधारने के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे भीड़ नियंत्रण,यातायात प्रबंधन और अंतर-विभागीय समन्वय पर ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से महाकुंभ व्यवस्थाओं की समीक्षा करने का आदेश दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एडीजी और प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि शहर से सभी भक्तों की सुरक्षित और सुचारू विदाई हो सके। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और विभिन्न जिलों के अधिकारियों को संबोधित किया और उन्हें रेल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम को भी निर्देश दिए कि वे भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसें चलाएँ,ताकि श्रद्धालुओं को आने-जाने में कोई समस्या न हो। इसके साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सड़कों पर किसी प्रकार की भीड़ न हो और यातायात बाधित न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सड़क पर कब्जा जमाए बैठे रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया जाए ताकि यातायात में कोई रुकावट न आए। इसके अलावा,उन्होंने यह निर्देश भी दिया कि मेला देखने आए लोगों को मेला मैदान में घूमते समय अनावश्यक प्रतिबंधों का सामना न करना पड़े।
राज्य सरकार ने बुधवार को भगदड़ के कारणों की जाँच के लिए एक तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की घोषणा की। इस पैनल में न्यायमूर्ति हर्ष कुमार,पूर्व महानिदेशक वी.के. गुप्ता और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वी.के. सिंह शामिल हैं। इस आयोग को भगदड़ की घटना की जाँच करने और इसके कारणों का पता लगाने का जिम्मा सौंपा गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है,साथ ही घायलों को इलाज के लिए उचित सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
महाकुंभ मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और इस प्रकार के आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का खास ध्यान रखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीड़ नियंत्रण,यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों और श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। सरकार ने इस हादसे के बाद कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं,जो भविष्य में मेला प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायक होंगे।
