केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (तस्वीर क्रेडिट@NeeluYa85999076)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 10 अप्रैल को दो दिवसीय दौरे पर चेन्नई पहुँचेंगे,भाजपा व आरएसएस नेताओं के साथ करेंगे महत्वपूर्ण बैठकें

चेन्नई,6 अप्रैल (युआईटीवी)- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 10 अप्रैल की शाम को दो दिवसीय दौरे पर चेन्नई पहुँचेंगे। इस यात्रा के दौरान,वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे। तमिलनाडु भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गृह मंत्री शाह 11 अप्रैल को आरएसएस के प्रमुख विचारक और तुगलक पत्रिका के संपादक एस. गुरुमूर्ति से मुलाकात करेंगे।

अमित शाह का यह दौरा इस कारण भी खास है,क्योंकि हाल ही में दिल्ली में एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के साथ उनकी बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन के पुनरुद्धार की अटकलें तेज हो गई हैं,जो सितंबर 2023 में टूट गया था। दोनों दलों के बीच की यह मुलाकात राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

ईपीएस के नेतृत्व में एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों एसपी वेलुमणि और केपी मुनुसामी ने हाल ही में अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि एआईएडीएमके और भाजपा का गठबंधन फिर से बन सकता है। हालाँकि,इन दोनों दलों के बीच के संबंध पहले कुछ समस्याओं के कारण खराब हो गए थे,खासकर तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के. अन्नामलाई के विवादास्पद बयानों के कारण।

अन्नामलाई ने कई द्रविड़ नेताओं,जैसे सीएन अन्नादुरई (अन्ना) और डॉ. जे. जयललिता के खिलाफ टिप्पणी की थी,जिससे एआईएडीएमके नेतृत्व नाराज हो गया था। इस विवाद के बाद भाजपा और एआईएडीएमके का गठबंधन टूट गया था। 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन से कुछ लाभ जरूर हुआ था,लेकिन यह गठबंधन बाद में अपने आंतरिक विवादों के कारण कमजोर हो गया था। भाजपा को इस गठबंधन से चार सीटें मिली थीं,जबकि एआईएडीएमके ने 66 सीटें जीती थीं।

इस मुद्दे पर एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि जब से के.अन्नामलाई भाजपा के तमिलनाडु अध्यक्ष बने हैं,दोनों दलों के रिश्ते और खराब हुए हैं। अन्नामलाई के बयानों ने एआईएडीएमके को नाराज किया,जिससे दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप, 2024 के लोकसभा चुनावों में दोनों दलों को भारी झटका लगा और दोनों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

सूत्रों ने बताया है कि तमिलनाडु में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को सूचित किया है कि राज्य में राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए द्रविड़ पार्टी के साथ गठबंधन करना जरूरी है। आरएसएस नेताओं ने इस पर जोर दिया है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की रूपरेखा तय की जानी चाहिए। इससे यह साफ होता है कि भाजपा और आरएसएस,दोनों ही द्रविड़ पार्टी के साथ अपने रिश्तों को सुधारने और मजबूती देने की योजना बना रहे हैं।

इसके अलावा,एआईएडीएमके नेताओं ने भी संकेत दिया है कि ईपीएस ने अमित शाह से अनुरोध किया था कि राज्य भाजपा अध्यक्ष के पद से अन्नामलाई को हटाया जाए और उनकी जगह किसी और को नियुक्त किया जाए। इस बारे में अन्नामलाई ने 4 अप्रैल को सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह राज्य भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में नहीं हैं और पार्टी के लिए एक वफादार कार्यकर्ता के रूप में काम करना जारी रखेंगे।

यह स्थिति भाजपा और एआईएडीएमके दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यह उन्हें 2024 और 2026 के चुनावों में गठबंधन को लेकर नई रणनीतियों पर विचार करने की आवश्यकता है। हालाँकि,दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन से राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है,जो आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि अमित शाह का चेन्नई दौरा तमिलनाडु भाजपा और आरएसएस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके द्वारा की जाने वाली बैठकें और विशेष रूप से एस.गुरुमूर्ति से मुलाकात,यह संकेत देती हैं कि भाजपा और आरएसएस,तमिलनाडु में अपने पुराने गठबंधन को पुनर्जीवित करने और राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले दिनों में एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन की वापसी होती है और राज्य की राजनीति में किस तरह के बदलाव आते हैं।