बी.सुदर्शन रेड्डी (तस्वीर क्रेडिट@savedemocracyI)

उपराष्ट्रपति चुनाव में ‘इंडिया’ ब्लॉक ने बी. सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार,एनडीए प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन से होगी सीधी टक्कर

नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- नई दिल्ली की राजनीति इन दिनों एक बार फिर गर्मा गई है। इस बार वजह है देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद—उपराष्ट्रपति के चुनाव का। ‘इंडिया’ गठबंधन ने मंगलवार को सर्वसम्मति से पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव अब सीधा मुकाबला होगा ‘इंडिया’ ब्लॉक के बी. सुदर्शन रेड्डी और एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के बीच। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार,नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त तय की गई है,जबकि मतदान 9 सितंबर को होगा।

बी. सुदर्शन रेड्डी का नाम सामने आने के साथ ही यह चुनाव कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प हो गया है। रेड्डी का अब तक का लंबा और प्रतिष्ठित करियर उन्हें न केवल गठबंधन के लिए,बल्कि व्यापक रूप से भारतीय राजनीति के परिदृश्य में एक सम्मानजनक चेहरा बनाता है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले के आकुला मायलावरम गाँव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद में प्राप्त की और 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी वर्ष उन्होंने वकालत के क्षेत्र में कदम रखा और पंजीकृत अधिवक्ता बने।

उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता के. प्रताप रेड्डी के चैंबर से अपनी कानूनी यात्रा शुरू की,उसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट और दीवानी मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त की। वे उच्च न्यायालय में साल 1988 से 1990 तक सरकारी वकील रहे और बाद में केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील भी बने। वे साल 1993-94 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चुने गए। इस दौरान 8 जनवरी 1993 को उन्हें उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद का कानूनी सलाहकार व स्थायी वकील नियुक्त किया गया।

उनकी करियर यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि 2 मई 1995 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति रही। इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। मात्र दो वर्ष बाद,12 जनवरी 2007 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। न्यायपालिका में उनकी निष्पक्षता,गहरी कानूनी समझ और ईमानदार दृष्टिकोण ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। अंततः 8 जुलाई 2011 को वे सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए।

अब राजनीति के इस नए मोर्चे पर उतरते हुए बी. सुदर्शन रेड्डी का कहना है कि यह अवसर उनके लिए देश की सेवा का एक और माध्यम है। ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने भी उन्हें पूरी तरह समर्थन दिया है और उम्मीद जताई है कि उनकी कानूनी समझ और संवैधानिक दृष्टिकोण देश की लोकतांत्रिक यात्रा को और सशक्त बनाएँगे।

उधर,एनडीए ने पहले ही सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित कर रखा है। राधाकृष्णन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी गहरी पकड़ है। वे लंबे समय तक पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं और राज्य की राजनीति में उनका प्रभावशाली स्थान माना जाता है। ऐसे में इस चुनाव में एक तरफ अनुभवी न्यायविद् होंगे,तो दूसरी तरफ अनुभवी राजनेता,यानी मुकाबला पूरी तरह से दिलचस्प होने जा रहा है।

यह चुनाव इसलिए भी अहम है,क्योंकि मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह रिक्ति उत्पन्न हुई है। उपराष्ट्रपति का चुनाव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66(1) के तहत होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के निर्वाचित व नामांकित सदस्य मतदान करते हैं। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय मतपत्र के जरिए होती है,जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह चुनाव केवल पद की दृष्टि से ही नहीं,बल्कि विचारधारा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ ‘इंडिया’ ब्लॉक इसे लोकतंत्र की मजबूती और विपक्ष की एकजुटता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है,वहीं दूसरी तरफ एनडीए इस चुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत और स्थिरता का प्रतीक बताने की कोशिश करेगा।

फिलहाल राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें,तो एनडीए के पास संख्याबल की बढ़त है,क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उसकी स्थिति मजबूत है,लेकिन विपक्ष द्वारा बी.सुदर्शन रेड्डी जैसे सम्मानित और गैर-राजनीतिक छवि वाले उम्मीदवार को उतारना यह संकेत देता है कि वह सीधी वैचारिक चुनौती देना चाहता है। यह रणनीति विपक्ष के लिए कितनी कारगर होगी,यह तो चुनाव नतीजों से ही साफ होगा,लेकिन इतना तय है कि यह उपराष्ट्रपति चुनाव देश की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक हलचल पैदा करेगा।

इस तरह,बी. सुदर्शन रेड्डी का राजनीति में उतरना और उपराष्ट्रपति पद की रेस में शामिल होना एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उनका जीवन संघर्ष,मेहनत और संवैधानिक दायित्वों की गहरी समझ का उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि 9 सितंबर को होने वाली वोटिंग में सांसद किसे देश का अगला उपराष्ट्रपति चुनते हैं,एक अनुभवी न्यायविद् या एक अनुभवी राजनेता।