नई दिल्ली,1 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है,जिससे खास तौर पर हाई-परफॉर्मेंस वाहनों का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर असर पड़ने की संभावना है। कंपनी ने एक्सपी100 पेट्रोल और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल के दाम बढ़ाए हैं,जबकि आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है।
नई दरों के अनुसार,दिल्ली में एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत अब 160 रुपये प्रति लीटर हो गई है,जो पहले 149 रुपये प्रति लीटर थी। यह करीब 11 रुपये की बढ़ोतरी है,जो प्रीमियम फ्यूल के उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। एक्सपी100 एक हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है,जिसका उपयोग मुख्य रूप से लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों में किया जाता है। यह ईंधन इंजन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है और स्मूथ ड्राइविंग अनुभव प्रदान करता है,लेकिन इसकी कीमत में वृद्धि से ऐसे वाहनों के संचालन की लागत बढ़ जाएगी।
इसी के साथ कंपनी ने अपने प्रीमियम डीजल उत्पाद एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल की कीमत भी बढ़ा दी है। दिल्ली में अब यह 92.99 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गया है,जो पहले 91.49 रुपये प्रति लीटर था। हालांकि यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम है,लेकिन लगातार बढ़ती ईंधन लागत के बीच यह भी उपभोक्ताओं के लिए एक अतिरिक्त बोझ के रूप में सामने आई है।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है,वहीं सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा गया है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। इसी तरह मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपये और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। यह स्थिति ऐसे समय में है,जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है,जबकि प्रीमियम उत्पादों में बढ़ोतरी कर लागत का संतुलन बनाने की कोशिश की है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार और कंपनियाँ आम जनता पर सीधे महँगाई का बोझ डालने से बचना चाहती हैं,लेकिन प्रीमियम सेगमेंट में कीमतों को बाजार के अनुसार समायोजित किया जा रहा है।
इस बीच अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। हाल ही में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपये की बड़ी वृद्धि की गई है,जिससे होटल,रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं और यह 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुँच गई हैं। इससे हवाई यात्रा की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
इन सभी बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव ने ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है।
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी सेना अगले कुछ हफ्तों में ईरान पर अपने हमले रोक सकती है,जिससे तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालाँकि,दूसरी ओर ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके प्रमुख व्यक्तियों को निशाना बनाया जाता रहा,तो वह अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस तरह की बयानबाजी ने क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस तनाव का केंद्र बना हुआ है। यदि यहाँ किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है,तो इसका सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है।
फिलहाल,भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है,ताकि आम जनता को राहत मिल सके,लेकिन प्रीमियम ईंधनों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में हो रही बढ़ोतरी यह संकेत दे रही है कि वैश्विक बाजार का दबाव धीरे-धीरे घरेलू बाजार पर भी असर डाल रहा है।
इंडियन ऑयल द्वारा प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में की गई यह बढ़ोतरी ऊर्जा क्षेत्र में जारी अस्थिरता का परिणाम है। आने वाले दिनों में वैश्विक हालात के आधार पर ईंधन की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं,जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों को अपनी रणनीतियाँ समायोजित करनी पड़ सकती हैं।
