प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा (तस्वीर क्रेडिट@pkray11)

भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय : पीएम मोदी ने जापानी गवर्नरों संग संवाद में सहयोग को दी नई दिशा

टोक्यो,30 अगस्त (युआईटीवी)- टोक्यो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जापान के गवर्नरों के साथ एक विशेष संवाद में भारत-जापान के ऐतिहासिक और गहरे संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता हजारों वर्षों पुराना है,जो न केवल सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा है,बल्कि समय के साथ-साथ आर्थिक,सामाजिक और रणनीतिक साझेदारी तक विस्तारित हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात को अपने लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया और कहा कि जापान के राज्यपाल अपने-अपने प्रांतों की विविधता और ऊर्जा के जीवंत प्रतीक हैं।

अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के विभिन्न प्रांतों की विशिष्टताओं का उल्लेख करते हुए एक भावनात्मक जुड़ाव दिखाया। उन्होंने कहा,”इस कमरे में सैतामा की रफ्तार है,मियागी की मजबूती है,फुकुओका की जीवंतता है और नारा की विरासत की खुशबु है। आप सभी में कुमामोतो की गर्मजोशी,नागानो की ताजगी,शिज़ुओका की सुंदरता और नागासाकी की धड़कन है। आप सब मिलकर माउंट फूजी की ताकत और साकुरा की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं,जो जापान को टाइमलेस बनाते हैं।” प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक बताया।

उन्होंने भगवान बुद्ध की करुणा और न्यायाधीश राधाबिनोद पाल जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख कर यह स्पष्ट किया कि भारत-जापान की दोस्ती केवल आधुनिक समय की उपज नहीं है,बल्कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही साझा विरासत का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने अपने गृह राज्य गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि बीती सदी में गुजराती हीरे के व्यापारी जापान के कोबे शहर पहुँचे थे और वहाँ से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की नई शुरुआत हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि हमा-मात्सु की कंपनियों ने भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में क्रांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी ने कहा कि यह उद्यमशीलता और परस्पर सहयोग ही दोनों देशों को जोड़ती है और नए अवसरों के द्वार खोलती है।

उन्होंने कहा कि आज भारत और जापान केवल ट्रेड और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं हैं,बल्कि पर्यटन,सुरक्षा,कौशल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भी नए अध्याय लिख रहे हैं। यह साझेदारी केवल टोक्यो और दिल्ली तक सीमित नहीं है,बल्कि राज्यों और प्रांतों के स्तर पर भी गहराई से आगे बढ़ रही है।

अपने 15 साल के गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने उस दौरान नीति-आधारित शासन,उद्योग को बढ़ावा,मजबूत बुनियादी ढाँचे का निर्माण और निवेश के लिए माहौल बनाने पर ध्यान दिया। यही सोच अब ‘गुजरात मॉडल’ के रूप में जानी जाती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस मॉडल को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाया और राज्यों को प्रतिस्पर्धा की भावना से प्रेरित कर राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल किया।

उन्होंने भारत के विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया,जैसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’,आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों का अभियान तथा ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पहलों के जरिए भारत ने विविधता को अपनी ताकत में बदलने की कोशिश की है और दूरदराज के गाँवों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।

जापानी गवर्नरों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी जिम्मेदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जापान के प्रांत न केवल टेक्नोलॉजी,मैन्युफैक्चरिंग और नवाचार के केंद्र हैं,बल्कि कई प्रांतों की अर्थव्यवस्था तो कई देशों से भी बड़ी है। इस कारण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने पहले से मौजूद साझेदारियों जैसे गुजरात-शिज़ुओका,उत्तर प्रदेश-यमानाशी,महाराष्ट्र-वकायामा और आंध्र प्रदेश-तोयामा का उल्लेख किया और कहा कि अब समय आ गया है कि इन रिश्तों को कागज से निकालकर जमीन पर उतारा जाए और इन्हें लोगों और समृद्धि तक पहुँचाया जाए।

प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री इशिबा ने मिलकर स्टेट-प्रांत साझेदारी पहल की शुरुआत की है। इसके तहत हर साल तीन भारतीय राज्य और तीन जापानी प्रांतों के प्रतिनिधिमंडल एक-दूसरे का दौरा करेंगे। मोदी ने जापानी गवर्नरों को भारत आने का आमंत्रण भी दिया और साझा प्रगति के लिए सहयोग की अपील की।

उन्होंने कहा कि जापान और भारत के छोटे शहरों के स्टार्टअप्स और एमएसएमई आपसी साझेदारी और विचारों के आदान-प्रदान के जरिए नवाचार और अवसर पैदा कर सकते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए कानसाई में ‘बिजनेस एक्सचेंज फोरम’ की शुरुआत हो रही है,जो निवेश,स्टार्टअप साझेदारी और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा।

प्रधानमंत्री ने युवाओं के बीच संबंधों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि जापान की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज में भारतीय छात्रों को पढ़ाई के अवसर दिलाने और अगले पाँच सालों में पाँच लाख लोगों के आपसी आदान-प्रदान के लिए एक्शन प्लान लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही, 50,000 भारतीय कुशल पेशेवरों को जापान भेजने की योजना बनाई गई है,जिसमें जापान के प्रांतों की अहम भूमिका होगी।

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आशा व्यक्त की कि जैसे टोक्यो और दिल्ली मिलकर सहयोग को नई दिशा दे रहे हैं,वैसे ही कानागावा-कर्नाटक,आइची-असम और ओकायामा-ओडिशा जैसी साझेदारियां भी नई इंडस्ट्री,नई स्किल और नए अवसर पैदा करेंगी। उन्होंने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं है,बल्कि यह मानवता और भविष्य की साझा आकांक्षाओं का प्रतीक है।

इस संवाद ने भारत-जापान रिश्तों को एक नए मोड़ पर पहुँचा दिया है,जहाँ केवल केंद्र सरकारें ही नहीं,बल्कि राज्य और प्रांत भी साझा विकास के सहभागी बनेंगे। प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट था कि भारत और जापान की ताकत उनकी विविधता में है और यही विविधता दोनों देशों के सहयोग को समय के साथ और गहरा बनाएगी।