प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा (तस्वीर क्रेडिट@BJP4MP)

पीएम मोदी और पीएम इशिबा ने शिंकानसेन यात्रा के दौरान बढ़ाया सहयोग,पीएम मोदी ने भारतीय रेल चालकों से की मुलाकात

नई दिल्ली,30 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं,जहाँ वे 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई अहम समझौते हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और जापान के रिश्तों की गहराई और उनकी बहुआयामी साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुँचे,जहाँ उनका जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद से दोनों नेताओं की कई बैठकों का सिलसिला जारी है। इन बैठकों में भारत और जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। साथ ही,रक्षा और सुरक्षा,व्यापार और निवेश,डिजिटल प्रौद्योगिकी,पर्यावरण पर एक्शन और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

शनिवार को एक विशेष क्षण तब देखने को मिला,जब जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने जेआर ईस्ट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय रेल चालकों का अभिवादन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा कीं,जिनमें वे और प्रधानमंत्री मोदी इन चालकों से मिलते हुए नजर आए। इस पहल ने दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में बढ़ते रिश्तों को उजागर किया। इशिबा ने अपने पोस्ट में लिखा, “जेआर ईस्ट में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय रेल चालकों से मेरा नमस्कार।” यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि भारत और जापान न केवल बड़े स्तर पर बल्कि जमीनी स्तर पर भी साझेदारी को गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा ने जापान के प्रसिद्ध हाई-स्पीड ट्रेन शिंकानसेन से सेंडाई की यात्रा भी की। इस सफर की झलक दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर साझा की। प्रधानमंत्री इशिबा ने अपने पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंडाई जा रहा हूँ। मैं कार में साथ रहूँगा।” वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “सेंडाई पहुँच चुके हैं। प्रधानमंत्री इशिबा के साथ शिंकानसेन से इस शहर की यात्रा की।” यह यात्रा न केवल दोनों नेताओं की व्यक्तिगत निकटता को दर्शाती है,बल्कि यह भी दिखाती है कि जापान की आधुनिक तकनीक और भारत की विकास आकांक्षाओं के बीच कितना गहरा मेल है।

भारत और जापान का रिश्ता हमेशा से रणनीतिक महत्व का रहा है। दोनों देश लोकतंत्र,शांति और स्थिरता के साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाते आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह जापान यात्रा इस रिश्ते में नई ऊर्जा भरने का काम कर रही है। मोदी की यह आठवीं जापान यात्रा है,जो इस बात का सबूत है कि भारत टोक्यो के साथ रिश्तों को कितनी गंभीरता और प्राथमिकता देता है। पिछली बार मई 2023 में वे जापान पहुँचे थे। उसके बाद जून 2025 में कनाडा के कनानास्किस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन और 2024 में वियतनाम के वियनतियाने में हुए आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेता मिल चुके हैं। इन बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया और वैश्विक मंचों पर दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दी।

भारत और जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है। यह सहयोग रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र से लेकर डिजिटल इनोवेशन और स्टार्टअप्स तक फैला हुआ है। भारत की विशाल युवा शक्ति और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर एक नई विकासगाथा लिख सकते हैं। यही कारण है कि दोनों देश लगातार ऐसे अवसर तलाश रहे हैं,जिनसे आपसी सहयोग का दायरा और बढ़े।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा की मुलाकातों में यह बात प्रमुखता से उभरकर आई कि दोनों देश रक्षा सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भारत और जापान की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा,व्यापार और निवेश को लेकर भी कई अहम समझौते हो रहे हैं,जो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करेंगे। डिजिटल तकनीक और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देने पर दोनों देशों का जोर है।

यह यात्रा भारत के लिए न केवल आर्थिक और तकनीकी लाभ लेकर आएगी,बल्कि यह वैश्विक मंचों पर भारत-जापान की एकजुटता का भी संदेश देगी। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में तेजी से बदलते हालात के बीच स्थिरता और विश्वसनीय साझेदारियों की जरूरत और बढ़ गई है। जापान हमेशा से भारत का भरोसेमंद साथी रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस विश्वास को और गहरा करने का अवसर है।

जापान में अपनी व्यस्तताओं को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन जाएँगे,जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 25वें राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा का यह दूसरा चरण भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और एशिया में उसकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा भारत-जापान रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ रही है। शिंकानसेन यात्रा हो या भारतीय रेल चालकों से जापानी प्रधानमंत्री की मुलाकात,ये सब घटनाएँ इस बात का प्रतीक हैं कि भारत और जापान के रिश्ते अब केवल कागजों पर नहीं,बल्कि धरातल पर भी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। यह सहयोग भविष्य की उन संभावनाओं की ओर संकेत करता है,जहाँ भारत और जापान मिलकर न केवल एशिया बल्कि पूरे विश्व की प्रगति और स्थिरता में अहम भूमिका निभाएँगे।