जम्मू,30 अगस्त (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर में हाल ही में आई भारी बारिश,बादल फटने और बाढ़ ने जनजीवन को गहरा आघात पहुँचाया है। सैकड़ों लोगों की मौत, हजारों परिवारों के विस्थापन और करोड़ों की संपत्ति के नुकसान ने प्रदेश को संकट की स्थिति में डाल दिया है। इस भीषण आपदा के मद्देनज़र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 31 अगस्त और 1 सितंबर को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू संभाग पहुँच रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करना,राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करना और प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह अपनी इस यात्रा की शुरुआत 31 अगस्त की शाम को जम्मू पहुँचकर करेंगे। उनके साथ गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम भी होगी,जो इस आपदा से निपटने के लिए तैयार की गई रणनीति और भविष्य की योजना पर विस्तार से रिपोर्ट तैयार करेगी। शाम को ही वह राजभवन में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे,जिसमें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में उन्हें क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान,अब तक हुए राहत और बचाव कार्यों तथा प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढाँचे की बहाली की स्थिति की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
यह दौरा महज़ एक औपचारिकता नहीं,बल्कि आपदा की गंभीरता और मानवीय त्रासदी को देखते हुए केंद्र सरकार की गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन मिलकर पुनर्वास एवं राहत पैकेज को लेकर ठोस निर्णय लेंगे। यह भी संभावना है कि केंद्र सरकार जल्द ही एक बड़े वित्तीय पैकेज की घोषणा कर सकती है,जिससे प्रभावित परिवारों को मुआवजा,क्षतिग्रस्त मकानों और दुकानों के पुनर्निर्माण तथा बुनियादी ढाँचे की बहाली के लिए मदद दी जाएगी।
गृह मंत्री अपने इस दौरे के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा करेंगे। वह रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मंदिर के आधार शिविर कटरा पहुँचेंगे। यहाँ वह न केवल मंदिर प्रबंधन से मुलाकात करेंगे,बल्कि अर्धकुंवारी मार्ग पर घायल हुए तीर्थयात्रियों से नारायण अस्पताल में जाकर उनका हालचाल भी लेंगे। माता वैष्णो देवी यात्रा हाल की बाढ़ और भूस्खलन से गहरे रूप से प्रभावित हुई है। इस यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा,जिसके चलते सरकार ने कुछ समय के लिए यात्रा को नियंत्रित भी किया था।
इसके बाद गृह मंत्री किश्तवाड़ जिले का दौरा करेंगे,जहाँ 14 अगस्त को हुए बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। चशोती क्षेत्र में हुए इस हादसे में करीब 65 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। इनमें से अधिकांश तीर्थयात्री माता मचैल यात्रा में शामिल थे। शाह इस क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण करेंगे और प्रभावित लोगों की पीड़ा को समझने का प्रयास करेंगे। यह दौरा केंद्र सरकार को इस त्रासदी की व्यापकता का प्रत्यक्ष अनुभव देगा,जिससे आने वाले समय में ठोस नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
भारी बारिश और बाढ़ ने जम्मू संभाग के कई अन्य जिलों को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सड़कों और पुलों का टूटना,मकानों और दुकानों का ध्वस्त होना,फसलों का पूरी तरह बर्बाद हो जाना और कई इलाकों में जलभराव से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी और बिजली की आपूर्ति ठप पड़ गई है,जिससे स्थिति और भयावह हो गई है। इस परिप्रेक्ष्य में शाह जम्मू जिले के भी कुछ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करेंगे।
जम्मू-कश्मीर में इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल सामान्य जीवन को प्रभावित किया है,बल्कि धार्मिक यात्राओं को भी गहरा झटका दिया है। माता वैष्णो देवी और मचैल माता यात्रा दोनों ही श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास के प्रमुख केंद्र हैं,लेकिन बाढ़ और भूस्खलन के कारण इन यात्राओं को रोकना पड़ा,जिससे लाखों श्रद्धालु प्रभावित हुए। शाह के इस दौरे को इन धार्मिक यात्राओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से पुनः आरंभ करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
गृह मंत्री का यह दौरा केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है,जिसमें आपदा की घड़ी में न केवल प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थिक सहयोग दिया जाता है,बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी हर संभव मदद पहुँचाई जाती है। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के बाद केंद्र सरकार एक बड़े राहत पैकेज की घोषणा करेगी,जिससे न केवल प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिलेगा,बल्कि क्षतिग्रस्त सड़कों,पुलों,बिजली और पानी की आपूर्ति तथा अन्य आवश्यक ढाँचों को भी जल्द बहाल किया जा सकेगा।
अमित शाह 1 सितंबर की शाम को अपनी यात्रा समाप्त कर नई दिल्ली लौटेंगे,लेकिन उनका यह दौरा जम्मू-कश्मीर के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगा,क्योंकि यह केवल एक प्रशासनिक समीक्षा नहीं,बल्कि प्रभावित परिवारों और तीर्थयात्रियों के प्रति संवेदना और सहयोग का स्पष्ट संदेश भी है। यह दौरा केंद्र और प्रदेश प्रशासन के बीच तालमेल को और मज़बूत करेगा तथा आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को और अधिक गति देगा।
जम्मू-कश्मीर में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने प्रदेश को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। गृह मंत्री अमित शाह का यह दौरा न केवल स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने का अवसर देगा,बल्कि प्रभावित लोगों में यह विश्वास भी जगाएगा कि केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें पुनः सामान्य जीवन में लौटाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। इस दौरे से प्रदेश में राहत,पुनर्वास और विकास कार्यों को नई दिशा मिलने की पूरी संभावना है।
