पीएम मोदी ने किया सप्तऋषियों का पूजन,रामलला दरबार में उतारी आरती (तस्वीर क्रेडिट@manji_ahir)

अयोध्या में आस्था का ऐतिहासिक प्रभात: पीएम मोदी ने किया सप्तऋषियों का पूजन,रामलला दरबार में उतारी आरती,मंदिर ध्वजारोहण समारोह का शुभारंभ

अयोध्या,25 नवंबर (युआईटीवी)- अयोध्या ने मंगलवार को एक और स्वर्णिम अध्याय अपने इतिहास में अंकित कर लिया,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण से पहले रामलला के दरबार पहुँचे। प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर यह सुबह आध्यात्मिकता,परंपरा और राष्ट्रीय आस्था के संगम के रूप में उभरी। प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला विराजमान के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना की,आरती उतारी और राष्ट्रकल्याण की कामना की। इस पावन क्षण के साक्षी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी बने,जो पूरे अनुष्ठान के दौरान प्रधानमंत्री के साथ उपस्थित रहे।

दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने सभ्यता की उन जड़ों को प्रणाम करते हुए की,जहाँ से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक धारा बहती रही है। उन्होंने सप्तऋषियों के सम्मान में स्थापित सात पवित्र स्थलों पर पहुँचकर आस्था का दीप प्रज्वलित किया। महर्षि वशिष्ठ,महर्षि विश्वामित्र,महर्षि अगस्त्य,महर्षि वाल्मीकि,देवी अहिल्या,निषादराज गुहा और माता शबरी के मंदिरों में जाकर प्रधानमंत्री ने न केवल शीश नवाया,बल्कि देश की सुख-समृद्धि और विश्वकल्याण की प्रार्थना भी की। सभी मंदिरों में मंत्रोच्चार,वैदिक ध्वनियों और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयघोषों ने पूरे परिसर को दिव्यता से आलोकित कर दिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामदरबार पहुँचे,जहाँ उनकी अगवानी श्रद्धा और उत्साह की अनगिनत तरंगों ने की। मंदिर प्रांगण में मौजूद संतों,पुजारियों और श्रद्धालुओं के बीच प्रधानमंत्री ने विधिविधान से रामलला की आरती उतारी। आरती के दौरान भाव,आस्था और पारंपरिक संगीत के सुरों ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया,जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के मन को प्रभु श्रीराम की भक्ति से परिपूर्ण कर दिया। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी प्रधानमंत्री के साथ आरती में सहभागी बने,जो पूरे आयोजन की गरिमा को और बढ़ाने वाला क्षण रहा।

आरती के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ माता अन्नपूर्णा मंदिर पहुँचे। यहाँ ध्वजारोहण से पहले विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रधानमंत्री ने अन्नपूर्णा माँ से देश के भोजन,समृद्धि और अन्नपूर्णा परंपरा के निरंतरता की कामना की। इस अनुष्ठान को मुख्य ध्वजारोहण समारोह से पूर्व आध्यात्मिक भूमिका माना जा रहा है,जिसने इस दिव्य कार्यक्रम को और पवित्रता प्रदान की।

अन्नपूर्णा मंदिर से आगे प्रधानमंत्री शेषावतार मंदिर पहुँचे,जहाँ उन्होंने परंपरागत विधियों के अनुसार पूजा की। शेषावतार मंदिर में उनकी उपस्थिति ने पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक नया आयाम जोड़ दिया। चारों ओर भक्तिरस में डूबे हुए श्रद्धालु प्रधानमंत्री का स्वागत करते दिखे और ‘जय श्रीराम’ की ध्वनि पूरे वातावरण में अनुगूंजित होती रही।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वजारोहण समारोह को लेकर अयोध्या पहले से ही उत्सव के रंग में रंगी हुई थी। सभी मार्ग,सड़कों,भवनों,घाटों और मंदिरों को भव्य सजावट से अलंकृत किया गया था। हर ओर फूलों की वर्षा,दीपों का प्रकाश और केसरिया झंडों की कतारें दिखाई दे रही थीं,मानो संपूर्ण रामनगरी स्वयं प्रभु श्रीराम के स्वागत में खड़ी हो। ध्वजारोहण से पहले हुए व्यापक धार्मिक अनुष्ठानों ने प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत आस्था और सनातन धर्म की जड़ों से उनकी गहन जुड़ाव को एक बार फिर प्रकट किया। यह अवसर केवल रस्मों का निर्वहन नहीं था,बल्कि रामनगरी की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला ऐतिहासिक क्षण था।

मंगलवार की सुबह प्रधानमंत्री मोदी महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुँचे,जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाईअड्डे से मंदिर परिसर तक का सफर भी दृश्यात्मक रूप से अत्यंत भव्य था। मार्ग के दोनों ओर महिलाएँ,बच्चे और बड़ी संख्या में मौजूद छात्र प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखे। वे लगातार जय श्रीराम के जयकारे लगा रहे थे,जबकि प्रधानमंत्री भी मुस्कुराकर और हाथ हिलाकर लोगों का उत्साहवर्धन कर रहे थे।

अपने आगमन से पूर्व प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा, “प्रभु श्रीराम भारतवर्ष की आत्मा,उसकी चेतना और उसके गौरव का आधार हैं। मेरे लिए यह परम सौभाग्य की बात है कि कल 25 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे अयोध्या के दिव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन का अवसर प्राप्त होगा।” उन्होंने आगे लिखा, “इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे श्री रामलला के पवित्र मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज के विधिवत आरोहण के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनूँगा। यह ध्वज भगवान श्रीराम के तेज,शौर्य और उनके आदर्शों के साथ-साथ हमारी आस्था,अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। जय श्रीराम।”

अयोध्या की पावन धरती ने मंगलवार को जो दृश्य देखा,वह केवल एक धार्मिक घटना नहीं,बल्कि एक सांस्कृतिक महोत्सव,एक ऐतिहासिक पुनर्जागरण और एक राष्ट्रीय आस्था की पराकाष्ठा का प्रतीक था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए इन अनुष्ठानों ने अयोध्या को एक बार फिर विश्वभर में सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।