पुर्बाचल प्लॉट घोटाले मामले में शेख हसीना और उनके परिवार की मुसीबत बढ़ी (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

पुर्बाचल प्लॉट घोटाले में बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को पाँच साल की सजा,परिवार के अन्य सदस्य भी दोषी करार

ढाका, 2 दिसंबर (युआईटीवी)- बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले से ही कई भ्रष्टाचार मामलों का सामना कर रहीं हसीना को सोमवार को ढाका की एक विशेष अदालत ने पुर्बाचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट के तहत प्लॉट आवंटन में कथित गड़बड़ी के आरोप में पाँच साल की सजा सुनाई। यही नहीं,अदालत ने इस मामले में उनकी बहन शेख रेहाना को सात साल और उनकी भतीजी तथा ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सांसद ट्यूलिप सिद्दीक को दो साल की सजा सुनाई। तीनों ही आरोपी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद नहीं थे। फैसला ढाका के स्पेशल जज कोर्ट-4 के जस्टिस मोहम्मद रबीउल आलम ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनाया।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक,इसी मामले में 14 अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराते हुए पाँच-पाँच साल की सजा दी गई है। कुल मिलाकर 17 आरोपियों पर दोष सिद्ध करते हुए अदालत ने प्रत्येक पर 1 लाख बांग्लादेशी टका का जुर्माना लगाया है। तय हुआ है कि यदि यह जुर्माना अदा नहीं किया जाता है,तो दोषियों की जेल सजा में छह महीने की अतिरिक्त अवधि जोड़ दी जाएगी। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति और प्रशासन में भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

यह मामला बांग्लादेश एंटी-करप्शन कमीशन (एसीसी) द्वारा दर्ज किए गए छह मामलों में से एक है,जो 12 से 14 जनवरी के बीच ढाका इंटीग्रेटेड डिस्ट्रिक्ट ऑफिस-1 में पुर्बाचल प्रोजेक्ट के प्लॉट बँटवारे में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि हसीना और अन्य आरोपियों ने नियमों को ताक पर रखकर निवासियों,सरकारी कर्मचारियों और पात्र नागरिकों की जगह अपनी पसंद के लोगों को प्लॉट आवंटित किए थे। एसीसी ने दावा किया है कि इस गड़बड़ी से सरकारी जमीन वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई और आर्थिक नुकसान भी हुआ।

सजा सुनाए जाने से पहले भी शेख हसीना भ्रष्टाचार मामलों की वजह से राजनीतिक और कानूनी दबाव में थीं। 27 नवंबर को ढाका कोर्ट ने ही उन्हें तीन अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में 21 साल की सजा सुनाई थी। वे मामले भी पुर्बाचल प्रोजेक्ट सहित अन्य सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित थे। इन मामलों में भी एसीसी ने शिकायत दर्ज करवाई थी और जाँच के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश किए गए थे।

फैसले के बाद हसीना और उनके परिवार की तरफ से एक संयुक्त बयान जारी किया गया,जिसे अवामी लीग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। इस बयान में सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा गया कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। बयान में यह आरोप लगाया गया कि मौजूदा अंतरिम सरकार का उद्देश्य राजनीतिक प्रतिशोध लेना है और असंतोष को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं एवं उनके परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

हसीना और उनके परिवार ने अपने बयान में कहा, “हम भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को पूरी तरह से नकारते हैं। हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और निराधार हैं। एसीसी एक ऐसी अंतरिम सरकार के नियंत्रण में है,जो न तो चुनी हुई है और न ही पारदर्शिता के मानकों पर खरा उतरती है। हमारे खिलाफ एकतरफा,अधूरी और संदिग्ध प्रकृति के सबूत पेश किए गए और हमें अपना बचाव करने तक का सही अवसर नहीं दिया गया।” बयान में यह भी कहा गया कि जिन मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया,वे गवाही और सबूतों के स्तर पर बेहद कमजोर हैं और इनका उद्देश्य केवल अवामी लीग नेतृत्व को बदनाम करना है।

बयान में अंतरिम सरकार,विशेषकर नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार की भी कड़ी आलोचना की गई। हसीना परिवार ने कहा, “इससे भी ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि अंतरिम सरकार उन परिवार के सदस्यों को भी मामले में उलझाने की कोशिश कर रही है,जिनका राजनीति से कोई संबंध ही नहीं है। यह न केवल अनैतिक है,बल्कि सत्ता का दुरुपयोग भी है।” ट्यूलिप सिद्दीक के खिलाफ कार्रवाई को इसी कड़ी में जोड़ते हुए बयान में कहा गया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक बदले की कार्रवाई है,क्योंकि वह विदेश में रहते हुए भी हसीना की करीबी मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। हाल के महीनों में हसीना सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन हुए हैं,जिनमें प्रदर्शनकारियों ने चुनाव सुधार,बेरोजगारी और महँगाई जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई। ऐसे माहौल में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा का राजनीतिक निहितार्थ और भी गंभीर माना जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ये फैसले आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक शक्ति संतुलन को बदलने की कोशिश का हिस्सा हैं।

फैसले के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है,खासकर ट्यूलिप सिद्दीक के ब्रिटिश संसद में चुने जाने की वजह से। ब्रिटेन की राजनीतिक पार्टियाँ और मानवाधिकार संगठन इस मामले की कानूनी प्रक्रियाओं और पारदर्शिता पर सवाल उठा सकते हैं। वहीं,बांग्लादेश के भीतर भी अवामी लीग समर्थक इसे सरकार विरोधी साजिश करार दे रहे हैं।

बांग्लादेश की राजनीति में यह एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। शेख हसीना,जो लगभग डेढ़ दशक तक देश की सत्ता में रहीं,अब खुद और अपने परिवार के साथ गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इसका असर न केवल उनकी राजनीतिक विरासत पर पड़ेगा,बल्कि बांग्लादेश की आगामी राजनीतिक दिशा पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।