इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से कई मौतों के बाद चिंतित स्थानीय लोग (तस्वीर क्रेडिट@KailashOnlin)

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतें: सिस्टम पर सवाल,लोगों में बढ़ी दहशत

इंदौर,2 जनवरी (युआईटीवी)- मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कथित तौर पर जहरीला और बदबूदार पानी पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है,जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने न सिर्फ शहर की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,बल्कि नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर भी बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि ऐसी समस्या उन्होंने पहले कभी नहीं देखी और आज वे पीने के पानी के लिए भरोसे और भय के बीच फँसे हुए हैं।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक,पिछले हफ्ते से पानी की गुणवत्ता अचानक बिगड़नी शुरू हुई। कई घरों में सप्लाई के साथ आने वाला पानी बदबूदार,पीला और गंदा था। एक निवासी ने बताया कि शुक्रवार को पानी कुछ साफ आया,लेकिन इससे पहले तक हालात बेहद खराब थे। उन्होंने कहा कि, “पानी इतना खराब था कि डर लग रहा था पीने में। अब टैंकर आने लगे हैं और डॉक्टर भी आते-जाते रहते हैं,तब जाकर थोड़ी राहत है। नगर निगम द्वारा नर्मदा जल के टैंकरों की व्यवस्था की गई है,लेकिन लोगों का कहना है कि यह समाधान अस्थायी है और स्थिति की जड़ तक पहुँचने की ज़रूरत है।

कई लोगों ने बताया कि मजबूरी में उन्होंने नर्मदा का पानी पीना शुरू किया,जबकि पहले वे उसका इस्तेमाल नहीं करते थे। एक महिला ने कहा, “इसका स्वाद कड़वा है,लेकिन और कोई विकल्प नहीं है। बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता होती है।” बुजुर्गों के अनुसार,इस क्षेत्र में पहली बार ऐसा संकट देखने को मिला है। उनका कहना है कि नेताओं और अफसरों के आश्वासन के बावजूद लोग पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। एक वृद्ध महिला बोलीं कि, “आजकल कोई भी आम नागरिक की बात नहीं सुनता। घटना के बाद पानी थोड़ा साफ आया है,पर भरोसा टूट गया है।”

स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ें इस संकट की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं। इंदौर के मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी (सीएचएमओ) डॉ. माधव हसानी के अनुसार,अभी तक कुल 272 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया। इनमें से 1 जनवरी तक 72 को डिस्चार्ज कर दिया गया,जबकि 201 मरीज फिलहाल उपचाराधीन हैं। इनमें 32 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर रखे हुए हैं। डॉ. हसानी ने स्पष्ट किया कि लैब रिपोर्ट से पुष्टि हो चुकी है कि बीमारी का स्रोत दूषित पानी ही था,जिससे कई लोगों की जान चली गई।

हालात बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य टीमों ने बड़े पैमाने पर जाँच अभियान चलाया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार,केवल गुरुवार को ही 8,500 से ज्यादा लोगों की मेडिकल जाँच की गई। भागीरथपुरा के 1,700 से अधिक घरों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया,जिसमें 338 नए मरीजों की पहचान हुई। सभी को उनके घरों पर ही दवाइयाँ और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई,ताकि अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव न बढ़े। डॉक्टरों का कहना है कि अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता,तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

इस घटना ने जल वितरण व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाइपलाइन में लीकेज,सीवेज का मिलान या ट्रीटमेंट प्रक्रिया में लापरवाही जैसी वजहें पानी को दूषित कर सकती हैं। हालाँकि,जाँच अभी जारी है और आधिकारिक तौर पर कारणों का खुलासा होना बाकी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लंबे समय से पाइपलाइन की मरम्मत और सफाई की अनदेखी होती रही है,जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और जल स्रोतों की व्यापक जाँच की जा रही है। नगर निगम ने प्रभावित इलाकों में टैंकरों की संख्या बढ़ाने,नियमित पानी के सैंपल लेने और क्लोरीनेशन की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। साथ ही,स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीने की सलाह दी है,खासकर बच्चों,गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

फिर भी,लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं: आखिर दूषित पानी सप्लाई में कैसे पहुँचा? निगरानी तंत्र समय पर अलर्ट क्यों नहीं कर पाया? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा? भागीरथपुरा के निवासियों का कहना है कि उन्हें केवल तत्काल राहत नहीं,बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। उनका मानना है कि जब तक पाइपलाइन और जल शोधन प्रणालियों का वैज्ञानिक ढंग से ऑडिट नहीं किया जाएगा,तब तक हर सप्लाई के साथ डर बना रहेगा।

इंदौर जैसे बड़े और स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले शहर में पानी के कारण लोगों की मौत होना पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। यह घटना याद दिलाती है कि शहरी विकास केवल सड़कों और इमारतों से नहीं,बल्कि सुरक्षित पेयजल,मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन से मापा जाता है। भागीरथपुरा के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह संकट केवल चर्चा का विषय बनकर न रह जाए,बल्कि इसके जरिए शहर की बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने की ठोस पहल हो।

फिलहाल, इलाके में जाँच,इलाज और राहत का काम जारी है,लेकिन जब तक इस हादसे के वास्तविक कारणों का पता नहीं चलता और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता,तब तक यह सवाल गूँजता रहेगा—क्या हमारे नलों से बहता पानी वाकई सुरक्षित है?