राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ईरान पर ट्रंप का सख्त प्रहार: बैठकें रद्द,नए टैरिफ लागू,प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील

वाशिंगटन,14 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए कई बड़े और दूरगामी फैसलों का ऐलान किया है। ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है,ईरान से जुड़े कारोबार पर नए टैरिफ लागू कर दिए हैं और ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल लोगों से आंदोलन जारी रखने की खुली अपील की है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि यह कदम ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रही हिंसा और कथित हत्याओं के मद्देनजर उठाया गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान में जो कुछ हो रहा है,वह अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में दिए गए अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ईरान के हालात पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान में प्रदर्शनकारियों की “बेमतलब हत्याएँ” बंद नहीं होतीं,तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। ट्रंप ने कहा, “मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। जो हो रहा है,वह किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।” उनके इस बयान को ईरान पर बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने उन्हें “ईरानी देशभक्त” कहते हुए आंदोलन जारी रखने की अपील की। ट्रंप ने कहा कि अगर संभव हो तो प्रदर्शनकारी अपनी संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल करें और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएँ। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। ट्रंप के इन बयानों को ईरान के आंतरिक मामलों में खुली दखलअंदाजी के रूप में भी देखा जा रहा है,जिस पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ सकती है।

ईरान में मौतों के आँकड़ों को लेकर ट्रंप ने कहा कि अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग रिपोर्टें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पाँच तरह के आँकड़ें सुनने को मिल रहे हैं,लेकिन उनके लिए आँकड़ों से ज्यादा अहम मानवीय पहलू है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि एक मौत भी बहुत ज्यादा है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति को दर्शाता है,जिसमें मानवाधिकारों को विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर भी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दबाव बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि ईरान पर नए टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। ट्रंप ने कहा, “आपने देखा कि मैंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर व्यक्ति और देश पर टैरिफ लगा दिए हैं। यह आज से लागू हो गया है।” उन्होंने टैरिफ को अपनी विदेश नीति का मुख्य हथियार बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है,ताकि उस पर अंदरूनी और बाहरी दबाव दोनों बढ़ाया जा सके।

ट्रंप ने अपने भाषण में ‘मेक ईरान ग्रेट अगेन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मौजूदा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान एक महान और ऐतिहासिक देश है,लेकिन मौजूदा शासकों ने उसे नुकसान पहुँचाया है। ट्रंप का दावा है कि अगर ईरान में नेतृत्व में बदलाव होता है,तो देश फिर से समृद्धि और स्थिरता की राह पर लौट सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी दबाव से ईरान में बदलाव आएगा और संकेतात्मक लहजे में बोले, “मैं बस इतना कहता हूँ कि मदद रास्ते में है।” इस बयान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ आगे और क्या कदम उठा सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ को लंबी सैन्य कार्रवाई का बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि व्यापारिक दबाव के जरिए पहले भी कई मामलों में नतीजे हासिल किए गए हैं। उनके अनुसार,टैरिफ युद्ध के बिना दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका है,जिससे विरोधी देश को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। ट्रंप ने अपने पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ ने कई बार अमेरिका के रणनीतिक हितों की रक्षा की है।

अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ईरान को अन्य विदेशी नीति कार्रवाइयों के साथ जोड़ते हुए परमाणु ठिकानों पर हमलों और आतंकी नेताओं के खिलाफ अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमेशा अपने नागरिकों और सहयोगियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ट्रंप के मुताबिक,जिन देशों या संगठनों से अमेरिका को खतरा महसूस होता है,उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है,चाहे वह सैन्य कार्रवाई हो या आर्थिक दबाव।

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जो देश अमेरिका की व्यापार और सुरक्षा संबंधी माँगों का विरोध करते हैं,उन पर भी टैरिफ लगाए जाते हैं। उनके अनुसार,टैरिफ केवल आर्थिक नीति का हिस्सा नहीं हैं,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम औजार भी हैं। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ कूटनीति से कहीं ज्यादा असरदार दबाव बनाते हैं,क्योंकि इनका सीधा असर किसी देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम,मध्य पूर्व में उसका बढ़ता क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकारों को लेकर उसका रिकॉर्ड लंबे समय से अमेरिका की चिंता का विषय रहा है। अमेरिका पहले भी ईरान पर प्रतिबंधों,टैरिफ और द्वितीयक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाता रहा है,ताकि सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत रखी जा सके।

ट्रंप के ताजा ऐलान से यह साफ हो गया है कि उनका प्रशासन ईरान के प्रति किसी नरमी के मूड में नहीं है। बैठकें रद्द करना,नए टैरिफ लागू करना और खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करना,ये सभी कदम अमेरिका-ईरान संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान इन कदमों पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते टकराव को किस तरह देखता है। फिलहाल,ट्रंप के इस सख्त रुख ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है और मध्य पूर्व की स्थिति पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं।