दिल्ली हाईकोर्ट

संजय कपूर की अरबों की संपत्ति पर घमासान,माँ रानी कपूर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई,ट्रस्ट पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली,29 जनवरी (युआईटीवी)- दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति और पारिवारिक विरासत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। उनके निधन के बाद अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर परिवार के भीतर तीन धड़ों में बॅंटा यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में संजय कपूर की माँ रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई हुई,जिसने पूरे प्रकरण को नई गंभीरता दे दी है। अदालत ने याचिका पर समन जारी करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस भेजा है,हालाँकि फिलहाल किसी तरह का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया है।

रानी कपूर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनके बेटे संजय कपूर के निधन के बाद उनकी विशाल संपत्ति को उनकी जानकारी और सहमति के बिना एक फैमिली ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा प्रक्रिया गैर-कानूनी,धोखाधड़ीपूर्ण और पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी,जिसका मकसद उन्हें पारिवारिक संपत्ति से पूरी तरह बाहर करना था। रानी कपूर के अनुसार,जिस ट्रस्ट के जरिए संपत्ति पर नियंत्रण किया गया,वह न सिर्फ अवैध है,बल्कि उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी करता है।

याचिका में रानी कपूर ने अपनी बहू प्रिया कपूर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों समेत कुल 22 लोगों पर मिलकर एक फर्जी फैमिली ट्रस्ट बनाने का आरोप लगाया है। रानी कपूर का कहना है कि इस कथित ट्रस्ट के जरिए संजय कपूर की कंपनियों और पारिवारिक संपत्तियों पर कब्जा किया गया और उन्हें पूरी तरह हाशिये पर डाल दिया गया। उन्होंने अदालत से माँग की है कि इस ट्रस्ट को अवैध घोषित किया जाए और उनकी संपत्ति को उसी स्थिति में बहाल किया जाए,जैसी वह ट्रस्ट बनाए जाने से पहले थी।

रानी कपूर ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि जिस समय ये दस्तावेज तैयार किए गए और ट्रस्ट का गठन हुआ,उस समय वह मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं थीं। उनका आरोप है कि उनकी कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए उनसे कई महत्वपूर्ण कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए,जिनके नतीजों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। याचिका के अनुसार,इन दस्तावेजों के जरिए संपत्ति का नियंत्रण योजनाबद्ध तरीके से उनके हाथों से छीन लिया गया।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि संजय कपूर के निधन के तुरंत बाद उनके प्रमुख कारोबारी समूह की कंपनियों पर नियंत्रण ले लिया गया। रानी कपूर का कहना है कि न तो उन्हें इस प्रक्रिया की कोई सूचना दी गई और न ही उनकी सहमति ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पारिवारिक विरासत को जल्दबाजी में नए ढाँचे में डाल दिया गया,ताकि वे किसी भी तरह का दावा न कर सकें। रानी कपूर ने आरके फैमिली ट्रस्ट को अवैध,धोखाधड़ी से बना हुआ और सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों को समन जारी किया है। हालाँकि,अदालत ने फिलहाल ट्रस्ट या संपत्ति को लेकर यथास्थिति बनाए रखने या किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब यह है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती,तब तक ट्रस्ट की मौजूदा स्थिति बनी रहेगी। अदालत का यह रुख इस बात का संकेत है कि वह पहले दोनों पक्षों के तर्क,दस्तावेज और सबूतों का गहराई से अध्ययन करना चाहती है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें कारोबारी जगत के साथ-साथ फिल्मी दुनिया से जुड़े नाम भी सामने आए हैं। अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं,हालाँकि इस पर उनकी ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रिया कपूर और अन्य पक्षों की ओर से भी कानूनी जवाब तैयार किया जा रहा है,जिसमें रानी कपूर के आरोपों को खारिज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि संजय कपूर की संपत्ति में कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी, रियल एस्टेट,निवेश और पारिवारिक ट्रस्ट शामिल हैं,जिनकी कुल कीमत अरबों रुपये में आंकी जा रही है। ऐसे में यह विवाद सिर्फ एक पारिवारिक मतभेद नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर कारोबारी नियंत्रण,शेयरहोल्डिंग और भविष्य की विरासत पर भी पड़ेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला लंबा खिंच सकता है,क्योंकि इसमें ट्रस्ट कानून,उत्तराधिकार और धोखाधड़ी से जुड़े कई जटिल पहलू शामिल हैं।

अदालत में दोनों पक्षों की ओर से दावे,दस्तावेज और संभावित गवाहों का जिक्र किया जा चुका है। आने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आरके फैमिली ट्रस्ट की वैधता क्या है,संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया सही थी या नहीं और रानी कपूर की यह दलील कितनी मजबूत है कि उन्हें धोखे से संपत्ति से वंचित किया गया। इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई पर न सिर्फ कारोबारी जगत,बल्कि आम जनता की भी नजरें टिकी हुई हैं,क्योंकि इसका फैसला पारिवारिक ट्रस्ट और विरासत विवादों के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।