नई दिल्ली,29 जनवरी (युआईटीवी)- संसद का बजट सत्र गुरुवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गया और पहले ही दिन यह साफ हो गया कि यह सत्र राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ हुई,जिसमें उन्होंने संसद सदस्यों के सामने देश की प्राथमिकताओं,चुनौतियों और भविष्य की दिशा को लेकर स्पष्ट अपेक्षाएं रखीं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरकार के दृष्टिकोण और एजेंडे को विस्तार से सामने रखा। उन्होंने एक बार फिर ‘रिफॉर्म,परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ को अपनी सरकार की मूल पहचान और कार्यनीति बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि साल 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति ने संसद के सदस्यों के सामने जो अपेक्षाएँ रखी हैं, वे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और देश की दिशा तय करने वाली हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी सांसदों ने राष्ट्रपति की बातों को गंभीरता से लिया होगा और उसी भावना के साथ इस बजट सत्र की कार्यवाही में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति द्वारा रखे गए मार्गदर्शक विचार केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं हैं,बल्कि वे संसद और सरकार दोनों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बजट सत्र को अपने आप में बेहद अहम बताते हुए कहा कि यह वह समय होता है जब देश की आर्थिक दिशा,विकास की प्राथमिकताएँ और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश का ध्यान स्वाभाविक रूप से बजट पर केंद्रित होता है,क्योंकि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं,बल्कि सरकार की नीयत,नीति और नज़रिए का प्रतिबिंब होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने दोहराया कि बीते वर्षों में उनकी सरकार की पहचान लगातार सुधारों के जरिए देश को आगे ले जाने की रही है।
प्रधानमंत्री ने आत्मविश्वासी भारत की बात करते हुए कहा कि आज भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत का मजबूत और स्थिर प्रदर्शन दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। भारत आज निवेश,नवाचार और उत्पादन के लिए एक आकर्षक केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह आत्मविश्वास अचानक नहीं आया,बल्कि वर्षों की नीतिगत स्थिरता, सुधारों और प्रदर्शन का परिणाम है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारत के युवाओं,किसानों,मछुआरों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 27 देशों के यूरोपीय संघ के साथ हुआ यह समझौता आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा,बल्कि भारतीय उत्पादों और सेवाओं को एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय उत्पादकों और उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि अब जब यूरोपीय संघ का बाजार भारत के लिए खुल गया है,तो केवल अवसर का इंतजार करने के बजाय सक्रिय होकर अपनी क्षमताएँ बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाथ पर हाथ धरकर बैठने का समय नहीं है। यह समय प्रतिस्पर्धी बनने,नवाचार अपनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन करने का है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारतीय उत्पादक इस अवसर का भरपूर उपयोग करेंगे और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएँगे।
गुणवत्ता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाजार खुलने का मतलब केवल अधिक बिक्री नहीं है,बल्कि इसका अर्थ है कि अब गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। प्रधानमंत्री के अनुसार,जब भारत वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है,तो उसे उत्तम से उत्तम गुणवत्ता वाला सामान और सेवाएँ पेश करनी होंगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता ही वह आधार है,जिस पर भारत लंबे समय तक विश्व बाजार में टिक सकता है और भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के सुधारों की यात्रा का उल्लेख करते हुए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सुधारों की इस ट्रेन को तेज गति से आगे बढ़ाया है और इसमें संसद के सकारात्मक योगदान की अहम भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही रिफॉर्म एक्सप्रेस ने गति पकड़ी है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में ‘नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स’ पर काम और तेज किया जाएगा,ताकि बदलते दौर की जरूरतों के अनुरूप देश को तैयार किया जा सके।
राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का समय व्यवधान का नहीं,बल्कि समाधान का है। उन्होंने कहा कि देश की प्राथमिकता समस्याओं को लेकर शोर मचाने की नहीं,बल्कि उनका व्यावहारिक समाधान खोजने की है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार आलोचना से नहीं डरती और स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है,लेकिन अंतिम लक्ष्य जनता के हित में समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भूमिका व्यवधान पैदा करने की नहीं,बल्कि समाधान को जमीन पर उतारने की है।
प्रधानमंत्री ने सरकार की ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ की नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी आलोचना क्यों न हो,एक बात सभी स्वीकार करते हैं कि इस सरकार ने योजनाओं को फाइलों से निकालकर लोगों की जिंदगी तक पहुँचाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री के अनुसार,योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी है जब वह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ सरकार ने बीते वर्षों में कई बड़े सुधार लागू किए हैं और अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रिफॉर्म एक्सप्रेस को नई पीढ़ी के सुधारों की दिशा में ले जाया जाएगा।
बजट सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश साफ संकेत देता है कि सरकार आने वाले समय में भी सुधार,प्रदर्शन और परिवर्तन के एजेंडे पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहती है। आत्मविश्वासी भारत,वैश्विक साझेदारियों,गुणवत्ता पर जोर और समाधान आधारित राजनीति—इन सभी बिंदुओं के जरिए प्रधानमंत्री ने न केवल संसद,बल्कि देश को भी यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलने के लिए तैयार है। बजट सत्र के दौरान अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि इन विचारों और घोषणाओं का प्रतिबिंब बजट और आगामी नीतिगत फैसलों में किस रूप में देखने को मिलता है।
