यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ChandanSharmaG)

यूक्रेन-रूस युद्ध पर शांति की नई कोशिश: अबू धाबी में अमेरिका की मौजूदगी में होगी अहम बातचीत

नई दिल्ली,2 फरवरी (युआईटीवी)- यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को रोकने की दिशा में एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि रूस के साथ अगली शांति वार्ता 4 और 5 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में आयोजित की जाएगी। इस बातचीत में अमेरिका की सक्रिय मौजूदगी रहेगी,जो लंबे समय से इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस बैठक को युद्ध के “असल और सम्मानजनक अंत” की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में जेलेंस्की ने कहा कि अबू धाबी में होने वाली यह बैठक यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा कि यूक्रेन पूरी तैयारी के साथ इस बातचीत में शामिल होगा और उसकी कोशिश रहेगी कि यह वार्ता केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे,बल्कि ठोस नतीजों के साथ आगे बढ़े। जेलेंस्की के शब्दों में,यूक्रेन ऐसा समाधान चाहता है,जो देश की संप्रभुता,सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता किए बिना युद्ध को समाप्त करने के करीब ले जाए।

यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है,जब इससे पहले 23 और 24 जनवरी को भी अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में यूक्रेन,रूस और अमेरिका के बीच दो दिवसीय त्रिपक्षीय शांति वार्ता हुई थी। उस बैठक के बाद यूक्रेन की ओर से इसे “कंस्ट्रक्टिव” बताया गया था,हालाँकि किसी बड़े ब्रेकथ्रू की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। अब एक बार फिर उसी मंच पर तीनों पक्षों के जुटने से उम्मीदें जगी हैं कि शायद इस बार कोई ठोस प्रगति देखने को मिल सके।

अमेरिका लगातार इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए राजनयिक प्रयासों में जुटा हुआ है। वॉशिंगटन की चिंता सिर्फ यूरोप की सुरक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि वैश्विक स्थिरता,ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध के असर को लेकर भी अमेरिका दबाव महसूस कर रहा है। हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से व्यक्तिगत रूप से फोन पर बात की और उनसे यूक्रेन पर हमले रोकने की अपील की। हालाँकि,इस बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए,लेकिन इसे शांति प्रयासों के तहत एक अहम संकेत माना जा रहा है।

इन कूटनीतिक कोशिशों के बीच जमीनी हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,रूस ने हाल के महीनों में यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को लगातार निशाना बनाया है। यूएन न्यूज और जर्मन मीडिया आउटलेट डीडब्ल्यू की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रूसी हमलों के कारण यूक्रेन के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। खासकर सर्दियों के मौसम में,जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है,बिजली और हीटिंग की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

रूस द्वारा ऊर्जा ग्रिड पर किए गए हमलों का असर सीधे तौर पर नागरिक जीवन पर पड़ा है। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक लोग घंटों,कभी-कभी दिनों तक अँधेरे में रहने को मजबूर हैं। भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच बिना बिजली के घरों में रहना लोगों के लिए जानलेवा चुनौती बनता जा रहा है। अस्पतालों,स्कूलों और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ा है,जिससे मानवीय संकट और गहरा होता दिख रहा है।

दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन के जापोरिझिझिया इलाके के गवर्नर इवान फेडोरोव ने पहले जानकारी दी थी कि रूसी हवाई हमलों के बाद उनके क्षेत्र में करीब 60 हजार लोग बिना बिजली के रह गए थे। यह आँकड़ा सिर्फ एक इलाके का है,जबकि पूरे देश में लाखों लोग ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। यूक्रेनी प्रशासन का कहना है कि रूस की यह रणनीति सैन्य दबाव के साथ-साथ नागरिकों का मनोबल तोड़ने की कोशिश का हिस्सा है।

इन हालात में अबू धाबी में होने वाली बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है। हालाँकि,जानकारों का मानना है कि यह रास्ता आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई काफी गहरी है और युद्ध ने राजनीतिक,सैन्य और मानवीय स्तर पर भारी नुकसान पहुँचाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यूक्रेन और रूस के बीच शांति की संभावना जरूर है,लेकिन यह लड़ाई इसलिए भी मुश्किल रही है क्योंकि राष्ट्रपति जेलेंस्की और राष्ट्रपति पुतिन एक-दूसरे से “नफरत” करते हैं। ट्रंप के मुताबिक,दोनों नेताओं के बीच की निजी और राजनीतिक दुश्मनी ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है।

फिर भी,कूटनीति में उम्मीद हमेशा बनी रहती है। अबू धाबी को बातचीत के लिए एक तटस्थ और सुरक्षित स्थान माना जाता है,जहाँ पहले भी कई संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय वार्ताएँ हो चुकी हैं। अमेरिका की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि वह इस प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहता है और दोनों पक्षों पर किसी न किसी तरह का संतुलित दबाव बनाना चाहता है।

यूक्रेन के लिए यह बातचीत अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा सवाल है। वहीं रूस भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव,प्रतिबंधों और लंबे युद्ध की लागत से जूझ रहा है। ऐसे में यह वार्ता एक ऐसे मोड़ पर हो रही है,जहाँ दोनों पक्षों के पास युद्ध जारी रखने या किसी समझौते की ओर बढ़ने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।

अब सबकी निगाहें 4 और 5 फरवरी को अबू धाबी में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या यह बातचीत सिर्फ एक और दौर साबित होगी या वाकई यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकलेगा,इसका जवाब आने वाले दिनों में दुनिया के सामने होगा।