तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन

तमिलनाडु चुनाव 2026: स्टालिन का तिरुनेलवेली दौरा,डीएमके ने तेज किया प्रचार अभियान

नई दिल्ली,3 अप्रैल (युआईटीवी)- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने चुनावी मैदान में अपनी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन लगातार चुनावी गतिविधियों में सक्रिय नजर आ रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों के पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित किया और उन्हें चुनावी रणनीति के साथ-साथ जोश से भरने का प्रयास किया।

स्टालिन का यह संवाद ऐसे समय में हुआ है,जब चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को साधने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। डीएमके ने इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को “तमिल विरोधी” और हिंदी थोपने वाली पार्टी के रूप में पेश करने की रणनीति अपनाई है। पार्टी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है,जबकि भाजपा की नीतियाँ राज्य की पहचान के खिलाफ हैं।

वहीं,डीएमके ने अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसके नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी पर भी निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि एआईएडीएमके भाजपा के प्रभाव में काम कर रही है और स्वतंत्र राजनीतिक रुख नहीं रख पा रही है। इस तरह के आरोपों के जरिए डीएमके मतदाताओं के बीच विपक्ष की छवि को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

इस बार का चुनाव एक और वजह से खास बन गया है,क्योंकि अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) भी पहली बार चुनावी मैदान में उतरी है। विजय की लोकप्रियता और नई राजनीतिक ऊर्जा ने चुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके का प्रदर्शन चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है,खासकर युवा मतदाताओं के बीच।

मुख्यमंत्री स्टालिन का आगामी तिरुनेलवेली दौरा इस पूरे चुनावी अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार,वे चेन्नई से रवाना होकर तूतीकोरिन पहुँचेंगे और वहाँ से सड़क मार्ग के जरिए तिरुनेलवेली जाएँगे। नेल्लई साउथ बायपास पर आयोजित होने वाली उनकी जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। इस रैली के जरिए डीएमके दक्षिण तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

इस जनसभा में स्टालिन न केवल डीएमके बल्कि उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए भी समर्थन मांगेंगे। राधापुरम सीट से विधानसभा अध्यक्ष अप्पावु,पालायमकोट्टई से विधायक अब्दुल वहाब और तिरुनेलवेली सीट से उम्मीदवार सुब्रमणियन जैसे नेताओं के लिए प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस के उम्मीदवारों के समर्थन में भी स्टालिन लोगों से वोट की अपील करेंगे,जो नांगुनेरी और अंबासमुद्रम सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।

डीएमके ने इस चुनाव के लिए अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बँटवारे को अंतिम रूप दे दिया है और उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है। इससे पार्टी को अपने अभियान को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। हाल ही में उम्मीदवारों के ऐलान के साथ ही स्टालिन ने राज्यभर में चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी,जिसे अब तेज गति दी जा रही है।

तिरुनेलवेली की सभा के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कन्याकुमारी जाने का है,जहाँ वे रात में ठहरेंगे। इसके बाद अगले दिन सुबह वे वहाँ एक और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके अलावा तेनकासी जिले के संकरनकोविल में भी उनकी रैली प्रस्तावित है,जहाँ वे डीएमके और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करेंगे।

संकरनकोविल में स्टालिन जिन उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे,उनमें अलंगुलम से मनोज पांडियन,वासुदेवनल्लूर से राजा और तेनकासी से कलाई काथिरवन शामिल हैं। साथ ही एमडीएमके और कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए भी वे समर्थन मांगेंगे। इस तरह डीएमके गठबंधन पूरे राज्य में एकजुट होकर चुनावी मुकाबले में उतर रहा है।

तमिलनाडु की राजनीति में यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर डीएमके अपने शासन के कामकाज और सामाजिक न्याय के एजेंडे के आधार पर जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है,वहीं विपक्षी दल उसे चुनौती देने के लिए नए मुद्दों और रणनीतियों के साथ मैदान में हैं। भाजपा जहाँ राज्य में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है,वहीं एआईएडीएमके अपने पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखने में जुटी है।

इन सबके बीच विजय की टीवीके का प्रवेश चुनावी समीकरणों को और जटिल बना रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई राजनीतिक ताकत कितनी प्रभावी साबित होती है और किस हद तक पारंपरिक दलों के वोट बैंक को प्रभावित करती है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री स्टालिन का तिरुनेलवेली दौरा और लगातार बढ़ता चुनावी अभियान इस बात का संकेत है कि डीएमके इस चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह चुनावी मुकाबला और भी तेज होने की संभावना है, जिसमें हर दल अपनी पूरी ताकत झोंकता नजर आएगा।