नई दिल्ली,2 फरवरी (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुँचता नजर आ रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद सख्त और स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने इस बार ईरान पर हमला किया,तो इसका अंजाम पूरे पश्चिमी एशिया में फैलने वाले एक बड़े ‘क्षेत्रीय युद्ध’ के रूप में सामने आएगा। खामेनेई की यह चेतावनी ऐसे समय आई है,जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर परमाणु समझौते को लेकर लगातार दबाव बना रहा है और सैन्य कार्रवाई के संकेत भी खुले तौर पर दिए जा रहे हैं।
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने सुप्रीम लीडर के बयान के हवाले से कहा कि अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगी। खामेनेई ने कहा कि ईरान युद्ध को बढ़ावा देने वाला देश नहीं है और न ही वह किसी पर हमला करने की नीति अपनाता है,लेकिन अगर ईरानी राष्ट्र पर हमला किया गया या उसे दबाने की कोशिश की गई,तो जवाब उसी भाषा में और पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। उनके शब्दों में,यह जवाब ऐसा होगा,जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।
खामेनेई की यह चेतावनी सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों की प्रतिक्रिया मानी जा रही है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान को परमाणु समझौते पर लौटने के लिए कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान ने बातचीत की राह नहीं चुनी,तो उसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के पास अब बहुत कम समय बचा है। ट्रंप का यह रुख उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके तहत अमेरिका ईरान पर अधिकतम दबाव बनाकर उसे अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है।
इस बीच,सैन्य गतिविधियों ने भी हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। बीते कई हफ्तों से अमेरिकी युद्धपोत और फाइटर जेट ईरान के आसपास समुद्री और हवाई क्षेत्रों में सक्रिय हैं। फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने से यह संकेत मिल रहा है कि वॉशिंगटन केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता। हालाँकि,अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि ट्रंप प्रशासन वास्तव में सैन्य हमला करने की योजना बना रहा है या फिर यह सब केवल ईरान को डराकर बातचीत की मेज तक लाने की रणनीति का हिस्सा है।
ईरान की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। खामेनेई ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी उकसावे की शुरुआत नहीं करेगा,लेकिन अगर उस पर हमला हुआ,तो जवाब केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस बार संघर्ष सीमित नहीं रहेगा और इसके दायरे में पूरे पश्चिम एशिया के देश आ सकते हैं। इस बयान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है,तो इसका असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों और अस्थिरताओं से जूझ रहा है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य टकराव से तेल आपूर्ति,वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ईरान का प्रभाव इराक,सीरिया,लेबनान और यमन जैसे देशों में भी माना जाता है,जिससे किसी भी युद्ध की आग तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल सकती है।
ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है,जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम के रूप में देखते हैं। इसी मतभेद ने दोनों देशों के बीच तनाव को लगातार बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन पहले ही ईरान के साथ हुए पुराने परमाणु समझौते से बाहर निकल चुका है और अब नए सिरे से,ज्यादा सख्त शर्तों पर समझौता चाहता है।
खामेनेई का यह बयान न केवल अमेरिका के लिए चेतावनी है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक संकेत है कि हालात किस कदर नाजुक हो चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका दबाव की अपनी नीति को किस हद तक ले जाता है और क्या दोनों पक्ष टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुनते हैं। फिलहाल,खामेनेई की सख्त चेतावनी ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और अगर हालात बिगड़े,तो पश्चिम एशिया एक बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है।
