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सर्राफा बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट,सोना-चाँदी रिकॉर्ड ऊँचाई से फिसले,निवेशकों में चिंता

मुंबई,2 फरवरी (युआईटीवी)- सर्राफा बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बजट 2026-27 में सोना और चाँदी को लेकर किसी तरह की बड़ी या सीधी घोषणा न होने के बावजूद कीमती धातुओं पर दबाव साफ नजर आ रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोना और चाँदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई,जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। बीते तीन कारोबारी दिनों से लगातार हो रही इस गिरावट ने हाल ही में बने रिकॉर्ड स्तरों को काफी हद तक मिटा दिया है।

सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना और चाँदी दोनों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। चाँदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख रुपये तक टूट चुकी है,जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.37 लाख रुपये के स्तर के आसपास आ गया है। खबर लिखे जाने तक सुबह 11.22 बजे फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपये यानी करीब 4.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,36,498 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चाँदी में और भी ज्यादा दबाव नजर आया और यह 23,908 रुपये टूटकर 2,41,744 रुपये प्रति किलो पर पहुँच गई। चाँदी में लगभग 9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई,जिसने बाजार में हलचल मचा दी।

सर्राफा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण निवेशकों की मुनाफावसूली मानी जा रही है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चाँदी की कीमतें जिस तेजी से रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचीं थीं,उसके बाद स्वाभाविक तौर पर बड़े निवेशकों और फंड्स ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसी मुनाफावसूली ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही वैश्विक बाजार से मिल रहे कमजोर संकेतों ने भी घरेलू कमोडिटी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया,जबकि चाँदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। हालाँकि,चाँदी पहले करीब 12 प्रतिशत तक टूटने के बाद 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही। इसके बावजूद,यह गिरावट पिछले कई वर्षों में सबसे तेज मानी जा रही है। इससे पहले सत्र में चाँदी ने बीते 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी,जिसने वैश्विक कमोडिटी बाजार में बेचैनी बढ़ा दी।

पिछले कुछ महीनों में सोने और चाँदी की कीमतों में आई तेज तेजी ने बाजार के कई अनुभवी खिलाड़ियों को भी चौंका दिया था। खासकर जनवरी के महीने में वैश्विक तनाव,कई देशों की मुद्राओं में कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर उठी चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चाँदी की ओर रुख किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों कीमती धातुएँ रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गईं,लेकिन जैसे ही माहौल में थोड़ा बदलाव आया,तेजी से बनी ये ऊँचाइयाँ टिक नहीं पाईं।

हालिया गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी खबर को भी माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेडरल रिजर्व के चेयर के रूप में केविन वॉर्श को नामित करने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के सामने आते ही अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली। डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर सोने और चाँदी पर पड़ता है,क्योंकि डॉलर मजबूत होने पर कीमती धातुएँ निवेशकों के लिए महँगी हो जाती हैं। कमजोर डॉलर की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स की धारणा अचानक बदल गई और उन्होंने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी,जिससे सोना-चाँदी की कीमतों में जोरदार गिरावट आ गई।

घरेलू स्तर पर भी बजट के बाद बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। हालाँकि,बजट में सोना और चाँदी पर कोई नया टैक्स या ड्यूटी संबंधी ऐलान नहीं किया गया,लेकिन निवेशकों को किसी तरह के राहत भरे संकेत की उम्मीद थी। जब ऐसा कुछ नहीं हुआ तो बाजार में अनिश्चितता बनी रही। इसके अलावा,ऊँचे स्तरों पर पहुँच चुकी कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की माँग को भी प्रभावित किया है,जिसका असर सर्राफा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।

आगे की राह को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मौद्रिक नीति,डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक हालात इन धातुओं की दिशा तय करेंगे। फिलहाल,निवेशकों के लिए सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है,क्योंकि बाजार में अस्थिरता का दौर अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। लगातार गिरावट के इस दौर में सर्राफा बाजार की नजर अब वैश्विक संकेतों और आने वाले आर्थिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।