सैंटियागो,11 फरवरी (युआईटीवी)- चिली के अटाकामा रेगिस्तान के आसमान को लेकर छिड़ी वैश्विक बहस का अंत फिलहाल खगोल वैज्ञानिकों के पक्ष में होता दिख रहा है। हाल ही में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया उत्पादन केंद्र ‘आईएनएनए’ प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया गया है। वैज्ञानिक समुदाय ने इस फैसले को बड़ी जीत करार दिया है। उनका कहना है कि अगर यह मेगाप्रोजेक्ट पैरानल वेधशाला के पास स्थापित हो जाता,तो दुनिया के सबसे साफ और अँधेरे आसमानों में से एक पर अपूरणीय प्रभाव पड़ सकता था।
अटाकामा रेगिस्तान पृथ्वी की सबसे शुष्क जगहों में से एक है। यहाँ साल के अधिकांश दिनों में आसमान पूरी तरह साफ रहता है। बादल बेहद कम बनते हैं और नमी का स्तर भी न्यूनतम होता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र जमीन पर आधारित खगोलीय अध्ययन के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ जगहों में गिना जाता है। यहाँ स्थित यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ईएसओ) की पैरानल वेधशाला में दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप संचालित होते हैं,जिनकी मदद से ब्रह्मांड की गहराइयों का अध्ययन किया जाता है।
प्रस्तावित आईएनएनए प्रोजेक्ट करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक विशाल औद्योगिक केंद्र होता,जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया उत्पादन की सुविधा के साथ एक पोर्ट,तट तक परिवहन संपर्क और तीन सोलर पावर प्लांट शामिल थे। इस परियोजना को चिली की कंपनी एईएस एंडेस ने प्रस्तावित किया था,जो अमेरिकी एईएस कॉरपोरेशन से संबद्ध है। यह कंपनी चिली,कोलंबिया और अर्जेंटीना में कोयला,गैस,जलविद्युत,पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जानी जाती है। पिछले लगभग एक वर्ष से चिली का पर्यावरण नियंत्रक इस परियोजना की समीक्षा कर रहा था।
खगोल वैज्ञानिकों ने शुरुआत से ही इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर आपत्तियाँ जताई थीं। उनका तर्क था कि इतने बड़े औद्योगिक केंद्र की स्थापना से लाइट पॉल्यूशन यानी कृत्रिम रोशनी का स्तर बढ़ेगा,जिससे टेलिस्कोप द्वारा आकाशीय पिंडों का अवलोकन प्रभावित होगा। वैज्ञानिकों का कहना था कि लाइट पॉल्यूशन खगोल विज्ञान के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है,क्योंकि इससे तारों और दूरस्थ आकाशगंगाओं से आने वाली क्षीण रोशनी को दर्ज करना कठिन हो जाता है। यदि परियोजना लागू होती,तो पैरानल वेधशाला की अवलोकन क्षमता पर दीर्घकालिक और संभवतः अपूरणीय असर पड़ सकता था।
चिली में ईएसओ की प्रतिनिधि इत्जियार डी ग्रेगोरियो ने ब्रिटिश मीडिया संस्थान ‘द गार्डियन’ से बातचीत में कहा कि इस परियोजना के रद्द होने से पैरानल वेधशाला को संभावित नुकसान से बचा लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए बल्कि वैश्विक खगोल अनुसंधान के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालाँकि,उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस मेगाप्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है—चिली में पेशेवर खगोल विज्ञान स्थलों के आसपास सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है। उनके अनुसार,केवल एक परियोजना के रद्द होने से आसमान की सुरक्षा का काम खत्म नहीं हो जाता।
चिली की एनवायर्नमेंटल इवैल्यूएशन सर्विस ने पुष्टि की है कि एईएस एंडेस के साथ बैठक के बाद कंपनी ने आधिकारिक रूप से आईएनएनए प्रोजेक्ट को वापस लेने का निर्णय लिया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि अपने प्रोजेक्ट्स के विस्तृत विश्लेषण के बाद यह फैसला किया गया है। हालाँकि,कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वह भविष्य में किसी अन्य स्थान पर इसी तरह की परियोजना पर विचार करेगी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अटाकामा क्षेत्र केवल चिली या यूरोप के लिए ही नहीं,बल्कि पूरी मानवता के लिए एक वैज्ञानिक धरोहर है। यहाँ स्थित वेधशालाओं से प्राप्त आँकड़ों ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति,ब्लैक होल,डार्क मैटर और दूरस्थ ग्रहों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2020 के नोबेल पुरस्कार विजेता रेनहार्ड जेनजेल ने भी एक खुले पत्र के माध्यम से चिली सरकार से इस परियोजना को समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे अद्वितीय वैज्ञानिक संसाधन की रक्षा करना वैश्विक जिम्मेदारी है।
हालाँकि,ग्रीन हाइड्रोजन को स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य के रूप में देखा जाता है और जलवायु परिवर्तन से निपटने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है,लेकिन वैज्ञानिकों का तर्क था कि इसके लिए वैकल्पिक स्थान चुना जा सकता है। उनका कहना था कि ऑब्जर्वेटरी के इतने करीब इस तरह की विशाल औद्योगिक सुविधा स्थापित करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी। पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच सामंजस्य बनाना आवश्यक है,लेकिन इसके लिए योजना और स्थान चयन में दूरदर्शिता जरूरी है।
अटाकामा के आसमान को बचाने की यह लड़ाई केवल वैज्ञानिकों की नहीं थी,बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। आज जब दुनिया तेजी से औद्योगिक और ऊर्जा परियोजनाओं की ओर बढ़ रही है,तब प्राकृतिक और वैज्ञानिक धरोहरों की रक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लाइट पॉल्यूशन को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है,क्योंकि इससे न केवल वैज्ञानिक शोध बल्कि आम लोगों के लिए तारों भरे आसमान का अनुभव भी कम होता जा रहा है।
फिलहाल आईएनएनए प्रोजेक्ट के रद्द होने से अटाकामा के आसमान को राहत मिली है। वैज्ञानिक समुदाय इसे एक मिसाल के रूप में देख रहा है कि संगठित प्रयास और वैज्ञानिक तर्क नीति-निर्माण को प्रभावित कर सकते हैं। हालाँकि, वे यह भी मानते हैं कि भविष्य में इसी तरह की चुनौतियाँ फिर सामने आ सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि चिली और अन्य देश उन क्षेत्रों के लिए सख्त संरक्षण नीतियाँ बनाएँ,जो वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अनमोल हैं। अटाकामा का साफ और अँधेरा आसमान केवल एक भौगोलिक विशेषता नहीं,बल्कि मानव जिज्ञासा और ब्रह्मांड को समझने की हमारी सामूहिक यात्रा का महत्वपूर्ण आधार है।
