नई दिल्ली,11 फरवरी (युआईटीवी)- अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई और भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली की अबू धाबी में हिरासत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में सीधे विक्रांत जेटली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करना चाहता है। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि इस संवाद को संभव बनाने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। अदालत का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विक्रांत जेटली आगे की कानूनी प्रक्रिया में किसकी सहायता लेना चाहते हैं—अपनी बहन सेलिना जेटली की या अपनी पत्नी की।
यह निर्देश उस याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया,जो सेलिना जेटली ने अपने भाई के लिए कॉन्सुलर एक्सेस की माँग को लेकर दायर की है। सेलिना का आरोप है कि उनके भाई को सितंबर 2024 से संयुक्त अरब अमीरात में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उनका कहना है कि परिवार को लंबे समय तक इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि विक्रांत जेटली को किन आरोपों में पकड़ा गया है और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। बाद में परिवार को पता चला कि उन्हें अबू धाबी के अल वथबा डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार से जवाब माँगा है कि भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय इस दिशा में क्या कदम उठा रहे हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या विक्रांत जेटली को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई है और क्या उन्हें भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मिलने का अवसर मिला है। कोर्ट ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधी बातचीत से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विक्रांत की इच्छा क्या है और वे अपनी पैरवी के लिए किसे अधिकृत करना चाहते हैं।
विक्रांत जेटली भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में सेवा दे चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भी योगदान दे चुके हैं। परिवार का कहना है कि ऐसे प्रतिष्ठित सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के साथ इस तरह की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सेलिना जेटली ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके भाई को पर्याप्त कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है और उन्हें लंबे समय तक एक तरह से अलग-थलग रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिवार को आधिकारिक तौर पर समय पर सूचित नहीं किया गया।
अदालत ने दोनों पक्षों—सेलिना जेटली और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में मीडिया से कोई बातचीत न करें। कोर्ट का मानना है कि यह एक संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय मामला है और इसे संयम तथा गोपनीयता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मीडिया में अनावश्यक बयानबाजी से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और संबंधित व्यक्ति के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह यूएई में एक सक्षम कानूनी फर्म की नियुक्ति करे,जो प्रो-बोनो आधार पर विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करे। अदालत ने कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिक को उचित कानूनी सहायता मिले और उसके अधिकारों की रक्षा हो। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि भारतीय दूतावास मामले पर नजर बनाए हुए है और यूएई अधिकारियों से संपर्क में है।
सेलिना जेटली ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि एक पूर्व सैनिक को न्याय दिलाना और उसे सुरक्षित वापस लाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि परिवार मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है और उन्हें अपने भाई की सुरक्षा को लेकर चिंता है।
दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 12 फरवरी को निर्धारित की गई है। उम्मीद की जा रही है कि तब तक केंद्र सरकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था और कॉन्सुलर एक्सेस से संबंधित स्थिति पर स्पष्ट रिपोर्ट पेश करेगी। अदालत इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत भारतीय नागरिकों को जो अधिकार प्राप्त हैं,उनका पालन सुनिश्चित किया जाए।
यह मामला केवल एक परिवार की कानूनी लड़ाई नहीं,बल्कि विदेश में हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रही है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि संबंधित व्यक्ति की आवाज सीधे सुनी जाए। अब सबकी नजर 12 फरवरी की सुनवाई पर टिकी है,जहाँ यह स्पष्ट हो सकेगा कि आगे की कानूनी दिशा क्या होगी और विक्रांत जेटली के मामले में ठोस प्रगति होती है या नहीं।
