तेल अवीव,27 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय ऐतिहासिक इजरायल दौरा गुरुवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। दौरे के समापन पर वे तेल अवीव के बेन गुरियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत के लिए रवाना हुए। विदाई के क्षण बेहद भावुक और गर्मजोशी भरे रहे,जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू स्वयं एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और पीएम मोदी को आत्मीयता से विदा किया। दोनों नेताओं ने गले मिलकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और मित्रता का प्रदर्शन किया,जो भारत-इजरायल संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच व्यापक वार्ता हुई,जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” तक उन्नत करने पर सहमति जताई। यह निर्णय दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज की बातचीत बेहद फलदायी रही और यह ऐतिहासिक फैसला दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल की साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है और अब इसे और व्यापक तथा गहन रूप दिया जाएगा।
वार्ता के दौरान आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पार्टनरशिप’ स्थापित करने का निर्णय लिया,जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता,साइबर सुरक्षा,क्वांटम टेक्नोलॉजी,रक्षा नवाचार और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को तेज किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सहायक होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र को भारत-इजरायल सहयोग का एक अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 100 करने का फैसला लिया गया है,जिससे भारतीय किसानों को आधुनिक तकनीक,सिंचाई पद्धतियों और फसल प्रबंधन में बड़ा लाभ मिलेगा। इजरायल अपनी उन्नत कृषि तकनीकों और जल प्रबंधन प्रणालियों के लिए विश्वभर में जाना जाता है और इस क्षेत्र में सहयोग भारत के कृषि ढाँचे को मजबूती दे सकता है।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने शिक्षा,स्टार्ट-अप,नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। राष्ट्रपति हर्जोग ने भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की। इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत राष्ट्रपति भवन के उद्यान में एक पौधा भी लगाया गया,जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति हर्जोग को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे के दौरान यरुशलम स्थित याद वाशेम विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र का दौरा कर होलोकॉस्ट पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू और याद वाशेम के अध्यक्ष डैनी दयान भी उनके साथ मौजूद रहे। पीएम मोदी ने होलोकॉस्ट स्मारक और संग्रहालय का अवलोकन किया,जिसमें ‘बुक ऑफ नेम्स’ शामिल है—एक विशाल स्थापना जिसमें लाखों यहूदी पीड़ितों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने ‘हॉल ऑफ रिमेंबरेंस’ में आयोजित स्मृति समारोह में भाग लिया और अतिथि पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए मानवता के खिलाफ अपराधों को कभी न भूलने की आवश्यकता पर बल दिया।
दौरे के सांस्कृतिक और जनसंपर्क आयाम भी उल्लेखनीय रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकप्रिय इजरायली जासूसी थ्रिलर श्रृंखला फौदा के कलाकारों से मुलाकात की और उनके साथ सेल्फी साझा की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि इस मुलाकात के लिए सिर्फ एक सेल्फी ही काफी थी,किसी अंडरकवर मिशन की जरूरत नहीं पड़ी। यह हल्का-फुल्का क्षण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और दोनों देशों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यरुशलम में इजरायली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण अधिवेशन को भी संबोधित किया। किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा नेसेट को संबोधित करने का यह पहला अवसर था। अपने संबोधन में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों,नवाचार,आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल दो प्राचीन सभ्यताएँ हैं,जो आधुनिक दुनिया में साझेदारी के नए मानक स्थापित कर रही हैं।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है,जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और पश्चिम एशिया क्षेत्र में नई रणनीतिक समीकरण उभर रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि,जल प्रबंधन,साइबर सुरक्षा और स्टार्ट-अप सहयोग पहले से ही मजबूत रहे हैं। अब “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के जरिए इन संबंधों को और संस्थागत रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करेगा,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से कई मायनों में ऐतिहासिक रही। भावनात्मक विदाई से लेकर उच्चस्तरीय वार्ताओं और सांस्कृतिक संवाद तक,हर पहलू ने भारत-इजरायल मित्रता की गहराई को उजागर किया। अब दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। यह दौरा इस बात का संकेत है कि भारत और इजरायल भविष्य की चुनौतियों का सामना मिलकर करने के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी।
