रूस-बेलारूस के तैराकों से 'वर्ल्ड एक्वेटिक्स' ने प्रतिबंध हटाया (तस्वीर क्रेडिट@RT_com)

वर्ल्ड एक्वेटिक्स का बड़ा फैसला,रूसी और बेलारूसी एथलीट अब झंडे और राष्ट्रगान के साथ करेंगे मुकाबला

मॉस्को,14 अप्रैल (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए वर्ल्ड एक्वेटिक्स ने रूस और बेलारूस के एथलीटों पर लगे प्रतिबंध हटाने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद अब दोनों देशों के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय एक्वेटिक्स प्रतियोगिताओं में अपने राष्ट्रीय झंडे और राष्ट्रगान के साथ भाग ले सकेंगे। इस निर्णय को खेलों में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वर्ल्ड एक्वेटिक्स ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि यह फैसला संगठन के ब्यूरो द्वारा लिया गया है,जिसमें एक्वेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट और एथलीट्स कमेटी के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। संस्था ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक संघर्ष के समय लागू किए गए दिशा-निर्देश अब रूसी और बेलारूसी सीनियर एथलीटों पर लागू नहीं होंगे।

बयान में कहा गया कि अब इन देशों के एथलीट भी अन्य देशों के खिलाड़ियों की तरह ही अपनी राष्ट्रीय पहचान के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकेंगे। इसका मतलब है कि वे अपनी राष्ट्रीय यूनिफॉर्म पहनेंगे,अपने देश का झंडा प्रदर्शित करेंगे और उनके राष्ट्रगान का भी सम्मानपूर्वक उपयोग किया जाएगा। इससे पहले इन खिलाड़ियों को तटस्थ झंडे के तहत या सीमित पहचान के साथ ही प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति थी।

हालाँकि,वर्ल्ड एक्वेटिक्स ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ सख्त शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। इनमें प्रमुख रूप से एंटी-डोपिंग नियम शामिल हैं। बयान के अनुसार,किसी भी रूसी या बेलारूसी एथलीट को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति तभी मिलेगी,जब वह इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी के सहयोग से किए गए कम से कम चार लगातार एंटी-डोपिंग टेस्ट सफलतापूर्वक पास करेगा। इसके अलावा,एथलीट को एक्वेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट द्वारा किए जाने वाले बैकग्राउंड चेक से भी गुजरना होगा।

इस फैसले से पहले वर्ल्ड एक्वेटिक्स ने जूनियर एथलीटों के लिए भी नियमों में बदलाव किया था, जिससे उन्हें अपने समकक्ष खिलाड़ियों की तरह ही प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिल सके। अब सीनियर स्तर पर भी यह बदलाव लागू कर दिया गया है,जिससे बड़ी संख्या में एथलीटों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वापसी का मौका मिलेगा।

वर्ल्ड एक्वेटिक्स के अध्यक्ष हुसैन अल मुसल्लम ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि खेलों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में वर्ल्ड एक्वेटिक्स और एक्वेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि प्रतियोगिताओं में निष्पक्षता और शांति बनी रहे।

हुसैन अल मुसल्लम ने कहा कि संगठन का यह प्रयास रहेगा कि स्विमिंग पूल और ओपन वाटर प्रतियोगिताएँ ऐसी जगह बनी रहें,जहाँ दुनिया भर के एथलीट शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में प्रतिस्पर्धा कर सकें। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वर्ल्ड एक्वेटिक्स खेलों को एकजुटता और सहयोग का मंच बनाए रखना चाहता है,भले ही अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में तनाव क्यों न हो।

इस फैसले का रूस की ओर से भी स्वागत किया गया है। रूस के खेल मंत्री और रूसी ओलंपिक समिति के प्रमुख मिखाइल डेग्ट्यारेव ने इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड एक्वेटिक्स का यह निर्णय रूसी और बेलारूसी एथलीटों को अन्य देशों के खिलाड़ियों के समान अधिकार प्रदान करता है।

डेग्ट्यारेव ने कहा कि अब उनके देश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी राष्ट्रीय पहचान के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे,जो उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस फैसले को खेलों की निष्पक्षता और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय खेलों में संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालाँकि,कुछ लोग इसे विवादास्पद भी मान रहे हैं,क्योंकि रूस और बेलारूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का संबंध वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ था। ऐसे में इस फैसले के बाद अन्य खेल संगठनों पर भी दबाव बढ़ सकता है कि वे इसी तरह के कदम उठाएँ।

इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि वर्ल्ड एक्वेटिक्स ने इस फैसले के साथ कड़े एंटी-डोपिंग नियमों को बनाए रखा है,जिससे प्रतियोगिताओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। यह संतुलन बनाए रखना संगठन के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है।

वर्ल्ड एक्वेटिक्स का यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत में एक नई बहस को जन्म दे सकता है। जहाँ एक ओर यह खिलाड़ियों के लिए नए अवसर खोलता है,वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाता है कि खेल और राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। आने वाले समय में इस फैसले के प्रभाव को अन्य खेल संगठनों और वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी देखा जा सकेगा।