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‘टटीरी’ गाने को लेकर विवादों में घिरे बादशाह,बैन के बाद भी सोशल मीडिया पर बढ़ा ओरिजिनल फोक सॉन्ग का क्रेज

मुंबई,9 मार्च (युआईटीवी)- पंजाबी और बॉलीवुड के लोकप्रिय रैपर-सिंगर बादशाह इन दिनों अपने हालिया रिलीज गाने ‘टटीरी’ को लेकर लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। हरियाणा में इस गाने के खिलाफ कई जगहों पर विरोध दर्ज किया गया है और मामला इतना बढ़ गया कि सिंगर के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कर दी गईं। विवाद बढ़ने के बाद उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया। हालाँकि,बढ़ते विरोध और कानूनी कार्रवाई के बीच बादशाह ने सोशल मीडिया के जरिए हरियाणा के लोगों से माफी भी माँग ली है। इसके बावजूद इस विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है,क्योंकि गाना आधिकारिक तौर पर हटाए जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

दरअसल,विवाद बढ़ने के बाद ‘टटीरी’ गाने को यूट्यूब सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया,लेकिन इंटरनेट के दौर में किसी कंटेंट को पूरी तरह रोक पाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि गाने के कई वर्जन अब अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूजर आईडी के जरिए लगातार अपलोड किए जा रहे हैं। इस कारण गाना हटाए जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा और ज्यादा तेज हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को लेकर विवाद हुआ,वह पूरी तरह से नया या मौलिक गाना नहीं है। जानकारी के अनुसार ‘टटीरी’ की धुन और बोल हरियाणा के एक पारंपरिक लोकगीत से प्रेरित हैं। इस लोकगीत का मूल संस्करण करीब तीन साल पहले रिलीज हुआ था,जिसे हरियाणवी कलाकार फौजी करमबीर और सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी थी। विवाद सामने आने के बाद अब यही ओरिजिनल गाना इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग बड़ी संख्या में इसे सुन और शेयर कर रहे हैं।

यूट्यूब पर इस लोकगीत के कई पुराने और नए वीडियो सामने आ रहे हैं। कुछ वीडियो में पारंपरिक अंदाज में गाने को पेश किया गया है,जबकि कई यूजर्स ने इसमें आधुनिक तकनीक और रीमिक्स का इस्तेमाल करते हुए नए वर्जन भी तैयार कर दिए हैं। कुछ क्लिप्स में तो बादशाह के गाने में फिल्माए गए दृश्यों को दोहराने की कोशिश की गई है,वहीं कई वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से नए विजुअल्स तैयार किए गए हैं।

हालाँकि,इन रीमिक्स वीडियो में बादशाह के रैप या उनके लिखे गए लिरिक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है। अधिकांश वीडियो में पारंपरिक गीत के मूल बोल ही रखे गए हैं और सिर्फ म्यूजिक में हल्का-फुल्का बदलाव करके उसे नया रूप देने की कोशिश की गई है। इस वजह से लोग ओरिजिनल लोकगीत को फिर से खोज रहे हैं और उसे सुनने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

गाने को लेकर पैदा हुए विवाद के बावजूद यह कहना गलत नहीं होगा कि इस पूरे मामले से असल में मूल लोकगीत को अप्रत्याशित लोकप्रियता मिल गई है। सोशल मीडिया के लगभग हर प्लेटफॉर्म पर ‘टटीरी’ से जुड़े वीडियो और क्लिप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई कंटेंट क्रिएटर्स इस गीत के अलग-अलग वर्जन बनाकर साझा कर रहे हैं,जिससे यह विषय लगातार चर्चा में बना हुआ है।

अगर इस लोकगीत की पृष्ठभूमि की बात करें तो ‘टटीरी’ हरियाणा की लोक संस्कृति से जुड़ा एक भावनात्मक और पारंपरिक गीत है। यह गीत मन्नतों और खुशियों से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित है। गीत में यह कहा गया है कि जब किसी परिवार की मनोकामना पूरी हो जाती है—जैसे शादी तय होना या घर में पुत्र का जन्म होना तो टटीरी पक्षी को सोने की चोंच चढ़ाने की मन्नत पूरी की जाती है। इस तरह यह गीत लोकविश्वास,परंपरा और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।

हरियाणवी संस्कृति में टटीरी पक्षी का विशेष महत्व बताया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार यदि यह पक्षी किसी घर के आसपास दिखाई दे तो उसे शुभ संकेत माना जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे खुशखबरी आने का प्रतीक भी मानते हैं। यही कारण है कि लोकगीतों में भी इस पक्षी का उल्लेख भावनात्मक और प्रतीकात्मक रूप में मिलता है।

इतिहास और पौराणिक संदर्भों में भी टटीरी का उल्लेख देखने को मिलता है। माना जाता है कि इस पक्षी का जिक्र प्राचीन ग्रंथ महाभारत में भी मिलता है,जहाँ इसे प्रकृति और जीवन से जुड़े प्रतीकों के रूप में दर्शाया गया है। इसी वजह से हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में इस पक्षी से जुड़ी मान्यताओं और गीतों को विशेष सांस्कृतिक महत्व दिया जाता है।

विवाद के बाद अब यह बहस भी तेज हो गई है कि लोकगीतों को आधुनिक संगीत में इस्तेमाल करते समय पारंपरिक भावनाओं और सांस्कृतिक संदर्भों का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। कई लोग मानते हैं कि लोकगीत किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा होते हैं,इसलिए उन्हें नए रूप में प्रस्तुत करते समय संवेदनशीलता बरतना जरूरी है।

फिलहाल ‘टटीरी’ विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी गाने या कंटेंट पर लगा प्रतिबंध भी कभी-कभी उसे और ज्यादा लोकप्रिय बना देता है। बादशाह का गाना भले ही प्लेटफॉर्म से हट चुका हो,लेकिन इस पूरे विवाद ने हरियाणा के पारंपरिक लोकगीत को नई पहचान दे दी है और अब यह गीत पहले से कहीं ज्यादा चर्चा में आ गया है।