वाशिंगटन,14 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान के बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र खर्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर बमबारी हमला किया है। इस हमले की पुष्टि स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस प्रमुख ठिकाने पर मौजूद सैन्य सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है,हालाँकि मानवता के आधार पर वहाँ मौजूद तेल निर्यात से जुड़े ऊर्जा ढाँचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका भी जताई जा रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस हमले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि उनके निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक को अंजाम दिया। ट्रंप के अनुसार इस ऑपरेशन में ईरान के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों में से एक खर्ग द्वीप को निशाना बनाया गया और वहाँ मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने बेहद आधुनिक और शक्तिशाली हथियारों का इस्तेमाल किया,जिनकी मारक क्षमता दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जाती है।
हालाँकि,ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने जानबूझकर ईरान के ऊर्जा ढाँचे को नुकसान नहीं पहुँचाया। उन्होंने कहा कि इंसानियत और वैश्विक ऊर्जा बाजार को ध्यान में रखते हुए खर्ग द्वीप पर मौजूद तेल निर्यात से जुड़ी सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया। उनके अनुसार यदि इन सुविधाओं को नुकसान पहुँचाया जाता,तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था। इसलिए अमेरिकी सेना ने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और तेल बुनियादी ढाँचे को सुरक्षित रखा।
खर्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक केंद्र माना जाता है। यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और यहां से ईरान के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। कई विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा भाग इसी द्वीप के माध्यम से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र पर हमला ईरान के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है,भले ही तेल निर्यात ढाँचे को सीधे तौर पर नुकसान न पहुँचाया गया हो।
अपने बयान में ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान क्षेत्र में समुद्री यातायात को बाधित करने की कोशिश करता है या अंतर्राष्ट्रीय जहाजों के आवागमन में कोई रुकावट पैदा करता है तो अमेरिका अपना मौजूदा फैसला बदल सकता है। ट्रंप ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहाँ किसी भी तरह की रुकावट को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यदि यहाँ किसी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध उत्पन्न होता है,तो उसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रंप ने अपने संदेश में यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना की ताकत के सामने ईरान की रक्षा क्षमता बहुत सीमित है। उन्होंने कहा कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी उन्होंने अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे घातक और शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में विकसित किया है। ट्रंप के अनुसार ईरान अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई से प्रभावी ढंग से बचाव करने में सक्षम नहीं है।
उन्होंने ईरान को एक और सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे और न ही उसे अमेरिका,मध्य पूर्व या दुनिया को धमकाने की अनुमति दी जाएगी। ट्रंप ने कहा कि ईरानी शासन और उसकी सेना के लिए यही बेहतर होगा कि वे अपने हथियार डाल दें और अपने देश में जो कुछ भी बचा है,उसे बचाने की कोशिश करें। उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी से शुरू किए गए हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इन हमलों में ईरान और उसके सहयोगी समूहों को भारी नुकसान होने की खबरें सामने आई हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में अब तक करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि केवल ईरान में ही 1200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा इस संघर्ष का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ा है। लेबनान में भी अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान 600 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं इराक के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि इस संघर्ष के दौरान उनके देश में भी कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस सैन्य टकराव को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता बढ़ गई है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और राजनीतिक संतुलन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले ने इस पूरे संकट को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। हालाँकि,अमेरिका का कहना है कि उसने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है,लेकिन ईरान इस कार्रवाई को किस तरह देखता है और उसका जवाब क्या होता है,यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं,जहाँ हर नया घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
