नई दिल्ली,4 मई (युआईटीवी)- भारतीय कुश्ती जगत एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला महिला पहलवान विनेश फोगाट द्वारा उठाई गई सुरक्षा और निष्पक्षता से जुड़ी चिंताओं से जुड़ा है, जिस पर भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न केवल इन चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही,बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि महासंघ खिलाड़ियों की सुरक्षा और प्रतियोगिता की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी खिलाड़ी को सुरक्षा को लेकर चिंता है,तो वह व्यक्तिगत रूप से इसकी गारंटी लेते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रतियोगिता के दौरान सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएँगे और किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतियोगिता में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार मान्यता प्राप्त रेफरी मौजूद रहेंगे,जो निष्पक्ष तरीके से मुकाबलों का संचालन करेंगे। साथ ही सभी मुकाबलों की रिकॉर्डिंग भी की जाएगी,ताकि किसी प्रकार के विवाद की स्थिति में उसे जाँचा जा सके।
महासंघ के अध्यक्ष ने टूर्नामेंट के स्थान को लेकर भी उठाए जा रहे सवालों पर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अब अंतिम समय में स्थान बदलना व्यावहारिक नहीं है,क्योंकि लगभग 1500 पहलवान इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए पहले ही अपने यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर चुके हैं। ऐसे में स्थान परिवर्तन से न केवल खिलाड़ियों को असुविधा होगी,बल्कि पूरे आयोजन की व्यवस्था भी प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी अन्य खिलाड़ी ने इस स्थान को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा व्यापक रूप से नहीं उठाया गया है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब विनेश फोगाट ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि वह उन छह महिला पहलवानों में शामिल हैं,जिन्होंने पूर्व कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है,लेकिन इसके बावजूद फोगाट ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
एक वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने कहा कि तीन साल पहले उन्होंने और अन्य महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई थी और इस मामले में गवाही भी दी है। उन्होंने बताया कि वह अब तक इसलिए चुप थीं क्योंकि मामला अदालत में लंबित है,लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उन्हें अपनी बात सामने रखने के लिए मजबूर कर दिया।
विनेश फोगाट ने आगामी नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। यह टूर्नामेंट 12 से 14 मई के बीच गोंडा में आयोजित होने वाला है,जिसे पूर्व महासंघ अध्यक्ष का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थान का चयन प्रतियोगिता की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है और इसमें पारदर्शिता की कमी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में यह सुनिश्चित करना मुश्किल होगा कि हर खिलाड़ी को उसकी मेहनत का सही परिणाम मिले। उन्होंने रेफरी के निर्णय,अंक देने की प्रक्रिया और यहाँ तक कि वजन तौलने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार,इन सभी पहलुओं में निष्पक्षता पर संदेह बना हुआ है,जिससे खिलाड़ियों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
फोगाट के इन आरोपों ने खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहाँ वह पारदर्शिता और निष्पक्षता की माँग कर रही हैं,वहीं महासंघ का कहना है कि सभी प्रक्रियाएँ नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही हैं। इस टकराव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद खेलों की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। खासकर तब,जब मामला खिलाड़ियों की सुरक्षा और निष्पक्षता से जुड़ा हो। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और संवाद बेहद जरूरी हो जाते हैं,ताकि सभी पक्षों के बीच विश्वास बना रहे।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के वर्षों में भारतीय कुश्ती में कई बड़े विवाद सामने आए हैं,जिनका असर खिलाड़ियों के मनोबल और खेल के माहौल पर पड़ा है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि खेल संस्थाएँ और खिलाड़ी मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।
फिलहाल,इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। महासंघ जहाँ आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने की बात कर रहा है,वहीं विनेश फोगाट और उनके समर्थन में खड़े लोग निष्पक्षता और पारदर्शिता की माँग पर अडिग हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस विवाद का कोई समाधान निकलता है या यह और गहराता है।
यह मामला केवल एक टूर्नामेंट या एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है,बल्कि यह पूरे खेल तंत्र में विश्वास,पारदर्शिता और न्याय के सवालों को सामने लाता है। यदि इन मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं किया गया,तो इसका असर लंबे समय तक भारतीय कुश्ती पर पड़ सकता है।
