अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

होर्मुज स्ट्रेट से पीछे हट सकता है अमेरिका! ट्रंप के बयान से वैश्विक सुरक्षा पर नए सवाल

वाशिंगटन,1 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है,जिसने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका अपनी नीति में बड़ा बदलाव कर सकता है और आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की जिम्मेदारी अन्य देशों को सौंप सकता है।

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के साथ चल रही सैन्य कार्रवाई खत्म होने के बाद अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा में अपनी भूमिका जारी नहीं रखेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “होर्मुज स्ट्रेट का आगे क्या होगा,उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं होगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है,जब यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुँचता है। इस रास्ते का उपयोग विशेष रूप से एशिया,यूरोप और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों द्वारा किया जाता है। ऐसे में अमेरिका का इस क्षेत्र से पीछे हटने का संकेत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चिंता का विषय बन सकता है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिन देशों को इस समुद्री मार्ग से सीधा फायदा होता है,उन्हें ही इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने फ्रांस सहित अन्य देशों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे अपने हितों की रक्षा करें। उनके अनुसार,अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा दी है और अब अन्य देशों को आगे आना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और उसे अपने जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी चाहिए। ट्रंप ने कहा, “चीन अपने जहाजों के लिए खुद ईंधन भरेगा और अपनी सुरक्षा खुद करेगा।” यह बयान अमेरिका की उस नीति को दर्शाता है,जिसमें वह वैश्विक सुरक्षा जिम्मेदारियों को साझा करने की दिशा में अन्य देशों पर दबाव बना रहा है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद खतरों को काफी हद तक खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई कट्टरपंथी तत्वों को समाप्त कर दिया है,जिससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहतर हुई है। उनके अनुसार, “जब हम यहाँ से जाएँगे,तो हालात काफी हद तक सुधर चुके होंगे।”

हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह जलमार्ग अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता और इसमें जोखिम बना हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद स्थिति पहले से बेहतर है और जहाजों की आवाजाही में भी सुधार देखने को मिल रहा है। ट्रंप ने कहा कि हाल ही में उन्हें जानकारी मिली है कि बड़ी संख्या में जहाज इस मार्ग से गुजर रहे हैं,जो स्थिति के सामान्य होने का संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिका की बदलती वैश्विक रणनीति को दर्शाता है,जिसमें वह धीरे-धीरे अपनी सैन्य जिम्मेदारियों को कम कर रहा है और अन्य देशों को अधिक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह नीति खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में लागू की जा रही है,जहाँ अमेरिका लंबे समय से सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता रहा है।

हालाँकि,इस कदम के संभावित परिणामों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। यदि अमेरिका वास्तव में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से पीछे हटता है,तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा,क्षेत्र में शक्ति संतुलन भी प्रभावित हो सकता है,जिससे नए भू-राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।

मध्य पूर्व में पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यदि अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति कम करता है,तो इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं,कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इससे क्षेत्रीय शक्तियों को अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

ट्रंप का यह बयान केवल एक नीति संकेत नहीं है,बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में संभावित बदलाव का संकेत भी देता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वास्तव में अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग से अपनी भूमिका कम करता है और यदि ऐसा होता है,तो दुनिया के अन्य देश किस तरह इस जिम्मेदारी को निभाते हैं। फिलहाल, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर यह नया घटनाक्रम अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।