भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

सेबी का बड़ा प्रस्ताव—ओपन मार्केट बायबैक फिर से शुरू करने की तैयारी,टैक्स बदलाव के बाद कंपनियों को मिलेगा नया विकल्प

नई दिल्ली,3 अप्रैल (युआईटीवी)- भारतीय पूँजी बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने एक्सचेंज के जरिए ओपन मार्केट बायबैक को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। गुरुवार को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में बाजार नियामक ने संकेत दिया कि कंपनियों को एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में खुले बाजार से अपने शेयर वापस खरीदने की अनुमति दोबारा दी जा सकती है। यह कदम हाल ही में आयकर नियमों में किए गए बदलावों के बाद उठाया गया है,जिससे बायबैक से जुड़े टैक्सेशन ढाँचे में स्पष्टता और संतुलन आया है।

सेबी के अनुसार,पहले ओपन मार्केट बायबैक पद्धति को टैक्स संबंधी असमानताओं के कारण बंद कर दिया गया था। उस समय बायबैक पर टैक्स का बोझ कंपनियों और निवेशकों के बीच समान रूप से वितरित नहीं होता था,जिससे बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा होती थी। हालाँकि,अब आयकर अधिनियम में संशोधन के बाद इस समस्या का समाधान हो गया है और बायबैक से प्राप्त आय को पूँजीगत लाभ यानी कैपिटल गेन के रूप में माना जाएगा। इसके तहत निवेशकों पर उसी प्रकार टैक्स लगाया जाएगा,जैसा कि वे सामान्य शेयर बाजार लेनदेन में देते हैं।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यह होगा कि बायबैक के दौरान कर निर्धारण अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत हो जाएगा। इससे न केवल निवेशकों के बीच समानता बढ़ेगी, बल्कि कंपनियों के लिए भी अपनी पूँजी प्रबंधन रणनीति को अधिक लचीले ढंग से लागू करना संभव होगा। सेबी ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि जब कंपनियाँ शेयरधारकों पर टैक्स का बोझ स्थानांतरित करती हैं,तो खुले बाजार में शेयर बेचना और स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बायबैक में भाग लेना लगभग समान हो जाता है।

ओपन मार्केट बायबैक की खासियत यह है कि इसमें कंपनियाँ धीरे-धीरे बाजार से अपने शेयर खरीद सकती हैं,जिससे शेयर की कीमतों पर अचानक दबाव नहीं पड़ता। यह प्रक्रिया बाजार में तरलता बनाए रखने और मूल्य निर्धारण को स्थिर रखने में मदद करती है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर यह पद्धति काफी लोकप्रिय है और बड़ी कंपनियाँ इसका व्यापक रूप से उपयोग करती हैं।

सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है,तो इसे सख्त नियमों और अनुपालन तंत्र के तहत संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि बायबैक प्रक्रिया पारदर्शी,निष्पक्ष और निवेशकों के हितों की रक्षा करने वाली हो। नियामक यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो और बाजार में किसी प्रकार की हेरफेर की संभावना न बने।

इस प्रस्ताव के पीछे उद्योग जगत की भी अहम भूमिका रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों ने सेबी के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। इन संगठनों का मानना है कि ओपन मार्केट बायबैक न केवल अधिक कुशल है,बल्कि यह कंपनियों को अपने शेयर मूल्यों को स्थिर रखने और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने में भी मदद करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है,तो भारतीय पूँजी बाजार में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे कंपनियों को अपने अतिरिक्त नकदी को शेयरधारकों को लौटाने का एक और प्रभावी माध्यम मिलेगा। साथ ही,यह निवेशकों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बन सकता है,क्योंकि उन्हें अपने निवेश पर अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ेगी।

इसके अलावा,ओपन मार्केट बायबैक से बाजार में ट्रेडिंग गतिविधियाँ भी बढ़ सकती हैं, जिससे समग्र बाजार दक्षता में सुधार होगा। यह कदम विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है,जो अपने शेयर की कीमतों को स्थिर रखना चाहती हैं या बाजार में अपनी हिस्सेदारी को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना चाहती हैं।

हालाँकि,कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस पद्धति के साथ जोखिम भी जुड़े हो सकते हैं,खासकर यदि निगरानी और अनुपालन तंत्र मजबूत न हो। इसलिए सेबी के लिए यह जरूरी होगा कि वह इस प्रक्रिया को लागू करते समय सख्त नियम बनाए और उनके पालन को सुनिश्चित करे।

सेबी का यह प्रस्ताव भारतीय पूँजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल कंपनियों को अधिक लचीलापन देगा,बल्कि निवेशकों के लिए भी एक अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत वातावरण तैयार करेगा। आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर उद्योग जगत और निवेशकों की प्रतिक्रियाएँ महत्वपूर्ण होंगी,जिनके आधार पर सेबी अंतिम निर्णय ले सकता है।