होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा वैश्विक तनाव (तस्वीर क्रेडिट@TheLallantop)

मध्य पूर्व में तनाव चरम पर: लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाया प्रतिबंध

तेहरान,9 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। लेबनान पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमलों के बाद ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के गुजरने पर रोक लगा दी है। इस फैसले ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,ईरान ने यह कदम लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के जवाब में उठाया है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता और अस्थिरता के बीच उसने यह निर्णय अपनी रणनीतिक सुरक्षा और दबाव बनाने के उद्देश्य से लिया है। फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक,पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद कुछ समय के लिए टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी गई थी,लेकिन जैसे ही लेबनान में इजरायली हमले तेज हुए, इस मार्ग को बंद कर दिया गया।

दूसरी ओर,लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह ने भी कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा युद्धविराम में लेबनान को शामिल नहीं किया गया,तो यह समझौता टूट सकता है। हिज्बुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि अगर इजरायल अपने हमले जारी रखता है,तो वह भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के हवाले से आई रिपोर्ट्स के अनुसार,ईरानी नौसेना ने सख्त चेतावनी जारी की है कि तेहरान की अनुमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। शिपिंग सूत्रों के मुताबिक,ईरान ने साफ कहा है कि समुद्री मार्ग से ट्रांजिट फिलहाल बंद रहेगा और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी में यह भी कहा गया है कि समुद्र में जाने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को टारगेट कर तबाह किया जा सकता है।

यह कदम वैश्विक स्तर पर बेहद गंभीर माना जा रहा है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल दुनिया के कई देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है,तो इसका सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों पर पड़ेगा और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

इस बीच,इजरायल की ओर से भी आक्रामक रुख जारी है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एक वीडियो बयान जारी कर बताया कि उनकी सेना ने लेबनान में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि इजरायली डिफेंस फोर्स ने हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर्स को निशाना बनाते हुए सैकड़ों लड़ाकों पर हमला किया है। काट्ज ने इसे एक “सरप्राइज अटैक” बताया और कहा कि यह ऑपरेशन हिज्बुल्लाह के लिए बड़ा झटका है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह कार्रवाई 2024 में हुए “ऑपरेशन बीपर्स” के बाद हिज्बुल्लाह के खिलाफ सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई है। ऑपरेशन बीपर्स वह हमला था जिसमें कथित तौर पर पेजर बम का इस्तेमाल कर हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस बार की कार्रवाई को भी उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।

मध्य पूर्व में इस बढ़ते तनाव ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहाँ अमेरिका और उसके सहयोगी देश क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई की धमकियाँ हालात को और जटिल बना रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का फैसला केवल सैन्य रणनीति नहीं,बल्कि आर्थिक दबाव बनाने का भी एक तरीका है। इससे न केवल इजरायल और उसके सहयोगियों पर असर पड़ेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित होगी,जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

लेबनान,इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते इस टकराव ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को शांत कर पाते हैं या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप ले लेता है। फिलहाल,स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।