ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव: ईरान की अमेरिका को चेतावनी,नेतन्याहू पर साधा निशाना

तेहरान,10 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हाल ही में लागू हुए दो सप्ताह के युद्धविराम ने जहाँ शांति की उम्मीद जगाई थी,वहीं अब बयानबाजी और कूटनीतिक तनातनी ने इस उम्मीद पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को बाधित करने की अनुमति न दे। उनके इस बयान ने पहले से ही संवेदनशील हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि 40 दिनों की लंबी लड़ाई के बाद यह सीजफायर एक अहम उपलब्धि है,जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका ‘क्रिमिनल ट्रायल’ दोबारा शुरू होने वाला है और ऐसे में क्षेत्र में शांति स्थापित होने से उन पर कानूनी दबाव और बढ़ सकता है। अराघची के इस बयान को इजरायल की आंतरिक राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है,जो कूटनीतिक भाषा में एक तीखा संकेत माना जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि अमेरिका नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की छूट देता है, तो यह उसका अपना निर्णय होगा, लेकिन यह एक “बेवकूफी भरा कदम” साबित हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तेहरान किसी भी संभावित तनाव के लिए खुद को तैयार रखे हुए है।

इसी बीच,ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि समय तेजी से निकल रहा है और लेबनान सहित पूरे “रेजिस्टेंस एक्सिस” को इस सीजफायर का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। कलीबाफ के इस बयान से यह साफ हो गया है कि ईरान इस संघर्ष को केवल अपने और इजरायल के बीच का मामला नहीं मानता,बल्कि इसे एक व्यापक क्षेत्रीय मुद्दे के रूप में देखता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने रूस,फ्रांस,स्पेन और जर्मनी के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग बातचीत कर सीजफायर की स्थिति पर चर्चा की है। सर्गेई लावरोव के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान ने जिम्मेदार रवैया अपनाया है और यदि अमेरिका अपने वादों को निभाता है,तो होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ बातचीत में अराघची ने इजरायल द्वारा सीजफायर उल्लंघन और लेबनान पर हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इजरायल के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। वहीं फ्रांस की ओर से भी सीजफायर का स्वागत करते हुए लेबनान में हिंसा रोकने पर जोर दिया गया।

स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान पर हुए हमलों को “गैर-कानूनी” बताया और सभी पक्षों से कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की। यूरोपीय देशों की यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

उधर,हाल ही में लागू हुआ अमेरिका-ईरान युद्धविराम क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था,लेकिन इस सीजफायर के दायरे को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इजरायल ने साफ किया है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है,जबकि ईरान और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं।

सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए बड़े हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई और 1,100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस घटना ने सीजफायर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दर्शाता है कि जमीन पर हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।

इस बीच,पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,इस वार्ता में ईरानी पक्ष का नेतृत्व मोहम्मद बाकर कलीबाफ कर सकते हैं। हालाँकि,मौजूदा तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना अहम होगा कि यह बातचीत कितनी प्रभावी साबित होती है।

मध्य पूर्व की स्थिति फिलहाल बेहद संवेदनशील और अनिश्चित बनी हुई है। एक ओर जहाँ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं,वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हो रही सैन्य कार्रवाइयाँ और तीखी बयानबाजी शांति प्रक्रिया को कमजोर कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अंतर्राष्ट्रीय प्रयास इस तनाव को कम करने में सफल होते हैं या फिर यह संघर्ष एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।