फ्लोरिडा,11 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयों को छू रही है। इसी कड़ी में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शनिवार को कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली आने वाले समय में व्यापार,रक्षा और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है,जब दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बैठकों का दौर जारी है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनती दिख रही है।
फ्लोरिडा में आयोजित बैठकों के दौरान भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देने का काम किया। इस दौरान प्रसिद्ध स्थान मार-ए-लागो में सर्जियो गोर और विक्रम मिस्री के बीच हुई मुलाकात खास तौर पर चर्चा में रही। इस बैठक के बाद सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि यह मुलाकात बेहद सकारात्मक रही और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि नई और उभरती हुई तकनीकों,ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर भी साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं। यह बदलाव दोनों देशों के बदलते वैश्विक दृष्टिकोण और साझा हितों को दर्शाता है।
ऊर्जा क्षेत्र इस बार की चर्चाओं का प्रमुख केंद्र रहा। विक्रम मिस्री ने अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के साथ विस्तृत बातचीत की। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने,द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया। भारत तेजी से बढ़ती अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों की तलाश कर रहा है और इस दिशा में अमेरिका एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभर रहा है।
भारतीय दूतावास के अनुसार,इस बैठक में खासतौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे दोनों देश मिलकर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बना सकते हैं और वैश्विक बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से निपट सकते हैं। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा निर्भरता को संतुलित करने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है।
सर्जियो गोर ने अपने बयान में ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में प्रस्तावित ‘शांति’ (एसएचएएनटीआई) बिल के पारित होने के बाद सिविल न्यूक्लियर सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। इसके साथ ही कोल गैसीफिकेशन और अमेरिकी एलपीजी निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को विस्तार देने की संभावना है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ऊर्जा सहयोग केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसमें परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा के अन्य विकल्प भी शामिल होंगे।
‘शांति’ बिल को भारत में ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है,और इस माँग को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में अमेरिका के साथ साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से लाभकारी साबित हो सकती है।
ऊर्जा के अलावा,उभरती तकनीकों और सप्लाई चेन की सुरक्षा पर भी दोनों देशों के बीच गंभीर चर्चा हुई। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी विलियम किम्मिट और विक्रम मिस्री के बीच हुई बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सुरक्षित और मजबूत सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।
आज के वैश्विक परिदृश्य में तकनीकी सहयोग का महत्व तेजी से बढ़ा है। खासकर एआई और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और अमेरिका दोनों ही अग्रणी भूमिका निभाना चाहते हैं। ऐसे में यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास को गति देगी,बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भी दोनों देशों की स्थिति को मजबूत करेगी।
विक्रम मिस्री ने अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी क्रिस्टोफर लैंडाउ के साथ भी मुलाकात की,जिसमें दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा की गई। इस बैठक में व्यापार, रक्षा,तकनीक और ऊर्जा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश अपने संबंधों को बहुआयामी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इसके अलावा,विक्रम मिस्री ने व्हाइट हाउस और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग,समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह दर्शाता है कि भारत और अमेरिका केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय सेनाएँ दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। उन्होंने रक्षा उपकरणों की बिक्री बढ़ाने और दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करने पर जोर दिया। यह पहल न केवल सैन्य सहयोग को बढ़ाएगी,बल्कि दोनों देशों की सामरिक क्षमता को भी मजबूत करेगी।
इस यात्रा के दौरान विक्रम मिस्री ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों और रणनीतिक साझेदारों से मुलाकात की। यह अनौपचारिक बातचीत भी दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के संबंधों में अभूतपूर्व मजबूती आई है। दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी स्थापित हो चुकी है,जिसमें रक्षा,व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने,मजबूत सप्लाई चेन सुनिश्चित करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका की यह बढ़ती साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था,सुरक्षा और तकनीकी विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश इस साझेदारी को किस तरह और आगे बढ़ाते हैं,लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि भारत-अमेरिका संबंध एक नए और मजबूत दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
