प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पश्चिम बंगाल चुनाव में पीएम मोदी का जोरदार प्रचार,तीन रैलियों से बढ़ाएँगे सियासी तापमान; कटवा,जंगीपुर व दक्षिण दिनाजपुर में रैलियों को करेंगे संबोधित

कोलकाता,11 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राज्य में लगातार तीन बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं। यह दौरा भारतीय जनता पार्टी के चुनावी अभियान को नई गति देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,खासकर तब जब राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होना है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कार्यक्रम एक सुव्यवस्थित चुनावी रणनीति का हिस्सा है,जिसके तहत वे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं। शनिवार को उनके दिन की शुरुआत कटवा में ‘विजय संकल्प सभा’ से होगी,जहाँ वे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता को संबोधित करेंगे। इसके बाद उनका अगला पड़ाव जंगीपुर होगा,जहाँ दोपहर 1:45 बजे वे दूसरी रैली को संबोधित करेंगे। दिन की तीसरी और अंतिम रैली दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट में निर्धारित है,जहाँ वे करीब 3:45 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे।

इन रैलियों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी का फोकस राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भाजपा के समर्थन को मजबूत करने पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है और प्रधानमंत्री की ये लगातार रैलियाँ उसी रणनीति का हिस्सा हैं। इन कार्यक्रमों के बाद उनके सिलीगुड़ी जाने की भी संभावना है,जहाँ वे रविवार को एक रोड शो कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कुछ रैलियों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह एक व्यापक चुनाव प्रचार योजना का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि वे इस चुनावी अवधि के दौरान पूरे राज्य में लगभग 14 रैलियों को संबोधित करेंगे। इससे पहले 9 अप्रैल को भी उन्होंने हल्दिया, आसनसोल और सिउरी में तीन बड़ी रैलियाँ की थीं,जिनमें उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था।

अपने पिछले भाषणों में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है,तो राज्य में अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने वाले तत्वों की पहचान के लिए विशेष जाँच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में घुसपैठियों को बसाने और उन्हें सुविधाएँ देने में कुछ लोगों की भूमिका रही है,जिसे उजागर किया जाएगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने राज्य में बम निर्माण की घटनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कच्चे बम बनाने की इकाइयाँ एक तरह से ‘कुटीर उद्योग’ बन गई हैं और राज्य सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उनके इस बयान ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

शिक्षा के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में कई सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। उनके अनुसार,सत्ताधारी दल नहीं चाहता कि राज्य के युवा शिक्षित हों,क्योंकि इससे उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है। यह आरोप राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस के रवैये को अहंकारपूर्ण बताते हुए हाल ही की एक घटना का भी जिक्र किया,जिसमें उनके अनुसार एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अपमान किया गया था। इस मुद्दे को लेकर भी उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया।

इन सभी मुद्दों के साथ प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में विकास,रोजगार और केंद्र सरकार की योजनाओं को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं। वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है,तो विकास की रफ्तार तेज होगी और केंद्र तथा राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

दूसरी ओर,तृणमूल कांग्रेस भी भाजपा के इन आरोपों का लगातार जवाब दे रही है और अपने विकास कार्यों को जनता के सामने रख रही है। ऐसे में पश्चिम बंगाल का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा होता जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की ये रैलियाँ चुनावी माहौल को और अधिक गर्माने वाली हैं। उनके दौरे से भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ने की उम्मीद है,वहीं विपक्ष भी अपनी रणनीति को और धार देने में जुट गया है। अब देखना यह होगा कि इन रैलियों का जनता पर कितना असर पड़ता है और आगामी मतदान में इसका क्या परिणाम निकलता है।