नई दिल्ली,16 अप्रैल (युआईटीवी)- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद देश की दिग्गज खनन कंपनी एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में कम से कम 14 कर्मचारियों की मौत हो गई,जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार,यह दुर्घटना सक्ती जिले के सिंघानातराई गाँव में स्थित प्लांट में उस समय हुई,जब एक उच्च दबाव वाले बॉयलर की नली अचानक फट गई। इसके बाद लगभग 600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली अत्यधिक गर्म भाप तेज गति से बाहर निकली, जिसने आसपास काम कर रहे कर्मचारियों को अपनी चपेट में ले लिया। धमाका इतना तेज था कि मौके पर ही कई लोगों की जान चली गई,जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को तुरंत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया,जहाँ उनका इलाज जारी है।
इस हादसे ने एक बार फिर वेदांता की औद्योगिक सुरक्षा नीतियों और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी,जिसका नेतृत्व उद्योगपति अनिल अग्रवाल कर रहे हैं,पहले भी इस तरह की घटनाओं के कारण चर्चा में रही है। खनन, धातु,तेल और गैस तथा बिजली उत्पादन जैसे जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने वाली इस कंपनी के विभिन्न परिचालन स्थलों पर वर्षों से कार्यस्थल दुर्घटनाओं और मौतों की खबरें सामने आती रही हैं।
वेदांता के सुरक्षा रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह चिंता और भी गहरी हो जाती है। वर्ष 2010 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के एक विश्लेषण में वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड को 67 मौतों के साथ सबसे अधिक मौतों वाली खनन कंपनी के रूप में चिह्नित किया गया था। इस रिपोर्ट का व्यापक असर हुआ था और ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल ने कंपनी और उसकी सहायक इकाई बाल्को को पहले दिए गए सुरक्षा पुरस्कार को वापस ले लिया था।
छत्तीसगढ़ के कोरबा में पहले भी एक बड़ा हादसा हो चुका है, जहाँ चिमनी गिरने से 40 श्रमिकों की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद पुलिस ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। हालाँकि,कंपनी ने उस समय खराब मौसम को दुर्घटना का कारण बताया था,लेकिन इस घटना ने भी सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
हालिया आँकड़ों से भी यह संकेत मिलता है कि कंपनी के भीतर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएँ पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। वेदांता के विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की संख्या वित्त वर्ष 2020 में सात थी,जो बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 13 हो गई। इसके बाद थोड़ी गिरावट आई,लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या फिर से सात हो गई,जिनमें छह श्रमिक और एक कर्मचारी शामिल थे। यह आँकड़ें दर्शाते हैं कि सुरक्षा उपायों में निरंतर सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
कंपनी की वित्त वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी आंतरिक शिकायतों में भारी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार,वित्त वर्ष 2025 में कर्मचारियों और श्रमिकों ने कुल 1,363 शिकायतें दर्ज कराईं,जो पिछले वर्ष 2024 में दर्ज 603 शिकायतों से दोगुनी से भी अधिक हैं। यह बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर असंतोष और चिंता बढ़ रही है।
इस बीच,इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी मृतक श्रमिकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की है।
राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिलासपुर मंडल के आयुक्त को इस पूरे मामले की जाँच सौंपी गई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भी अलग से मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दुर्घटना के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जाँच के दायरे में यह भी देखा जाएगा कि प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया जा रहा था और क्या कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही,यह भी जाँचा जाएगा कि बॉयलर की नियमित जाँच और रखरखाव में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई थी।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि तेजी से औद्योगिक विकास के बीच सुरक्षा मानकों को कितना महत्व दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च जोखिम वाले उद्योगों में काम करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। केवल नियमों का पालन ही नहीं,बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति एक मजबूत संस्कृति विकसित करना भी आवश्यक है।
सक्ती जिले में हुआ यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है,बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी भी है। वेदांता जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह समय आत्ममंथन का है कि वे अपनी सुरक्षा नीतियों को और अधिक सख्त बनाएँ और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करना पड़े। वहीं सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी भी है कि वे सख्ती से नियमों का पालन कराएँ और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें,ताकि इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।
