पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड और इन्वेस्टमेंट मंत्री टॉड मैक्ले (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा आर्थिक सहयोग का नया दौर,27 अप्रैल को होगा ऐतिहासिक समझौता

नई दिल्ली,25 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। पीयूष गोयल ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के ट्रेड और इन्वेस्टमेंट मंत्री टॉड मैक्ले का भारत में स्वागत किया। यह दौरा 27 अप्रैल को होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर हस्ताक्षर से पहले हो रहा है,जिसे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि टॉड मैक्ले का भारत में स्वागत करते हुए उन्हें अत्यंत खुशी हो रही है। उन्होंने इस दौरे को दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे,साझा मूल्यों और समान आर्थिक दृष्टिकोण का प्रतीक बताया। उनके अनुसार,यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा,बल्कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।

इस बीच न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पहले ही इस समझौते को लेकर उत्साह जताया है। उन्होंने घोषणा की कि सोमवार को भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। लक्सन ने अपने संदेश में कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित होगा और व्यापार को नई गति देगा।

एक वीडियो संदेश में लक्सन ने विस्तार से बताया कि इस एफटीए के जरिए न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुँच मिलेगी। खासकर उन कंपनियों को फायदा होगा,जो मरीन जेट सिस्टम जैसे विशेष उत्पादों का निर्माण करती हैं और जिन्हें दुनिया के 70 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसा विशाल और तेजी से बढ़ता बाजार न्यूजीलैंड के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

लक्सन ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कई न्यूजीलैंड निर्यातकों को भारत में अपने उत्पाद भेजते समय उच्च शुल्क यानी टैरिफ का सामना करना पड़ता है,लेकिन इस समझौते के लागू होने के बाद इन शुल्कों को धीरे-धीरे कम किया जाएगा,जिससे व्यापार अधिक सरल और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यह कदम दोनों देशों के व्यवसायों को एक समान अवसर प्रदान करेगा और निवेश को भी बढ़ावा देगा।

इस समझौते का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यह रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस एफटीए से उनके देश में नई नौकरियाँ पैदा होंगी,बेहतर वेतन के अवसर मिलेंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। यह बयान इस बात का संकेत है कि दोनों देश इस समझौते को केवल एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं,बल्कि आर्थिक विकास के एक व्यापक उपकरण के रूप में देख रहे हैं।

भारत के लिए भी यह समझौता कई मायनों में महत्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने से भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी आर्थिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा,कृषि,डेयरी,तकनीक और सेवा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का एक अहम हिस्सा बन सकता है।

दोनों देशों के बीच पहले से ही सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं,लेकिन यह समझौता उन्हें एक नई दिशा देने का काम करेगा। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है,यह पहल आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती है।

एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही,छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिलेंगे,जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को संतुलित विकास का लाभ मिलेगा।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा,बल्कि वैश्विक व्यापार के बदलते परिदृश्य में नई संभावनाओं को भी जन्म देगा। आने वाले समय में इस समझौते के परिणाम किस तरह सामने आते हैं,इस पर दोनों देशों के साथ-साथ वैश्विक बाजार की भी नजरें टिकी रहेंगी।