कोलकाता,29 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान राज्य के कई हिस्सों से हिंसा,झड़प और तनाव की खबरें सामने आई हैं। नादिया,हावड़ा,दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना जैसे संवेदनशील जिलों में मतदान के बीच राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच टकराव ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि,प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद कई जगहों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई,जिससे मतदाताओं में भय और असमंजस का माहौल बन गया।
दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती क्षेत्र में एक बड़ी घटना सामने आई,जहाँ भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विकास सरदार पर कथित तौर पर हमला किया गया। जानकारी के अनुसार,यह घटना उस समय हुई जब उम्मीदवार मतदान केंद्र का दौरा करने पहुँचे थे। बूथ नंबर 76 के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें घेर लिया और हमला कर दिया। इस दौरान उनकी गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ की गई,जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया। घटना के दौरान उनके सुरक्षाकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और यहाँ तक कि उनके हथियार छीनने की कोशिश भी की गई। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद मौके पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया,जिससे विपक्षी दलों ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हुगली-चुचुड़ा इलाके में भी चुनावी माहौल शांतिपूर्ण नहीं रहा। यहाँ सड़क किनारे लगे तृणमूल कांग्रेस के चुनावी बैनरों को हटाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया,जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। बूथ नंबर 27, 28 और 29 पर वोटर लिस्ट फाड़ने की घटना सामने आई,जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई,जिसके चलते माहौल तनावपूर्ण बना रहा। आरोप यह भी लगाया गया कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय बलों को वहां से हटाने की कोशिश की,जिससे हालात और बिगड़ गए।
इसी तरह उत्तर 24 परगना के पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र में भी स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। बूथ नंबर 145 पर भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच जोरदार झगड़ा हुआ। यह विवाद काफी देर तक चलता रहा और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। बाद में सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की,लेकिन इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
हावड़ा जिले के बाली विधानसभा क्षेत्र में तकनीकी गड़बड़ी के कारण मतदाताओं में आक्रोश देखने को मिला। यहाँ बूथ नंबर 152, 153 और 154 पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में खराबी आ गई,जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। लंबे इंतजार के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर मतदाता नाराज हो गए और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा,जिससे हालात पर काबू पाया गया। इस दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हावड़ा के पुलिस आयुक्त भी घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया।
उत्तर 24 परगना जिले के सासन इलाके में एक अलग तरह की घटना सामने आई,जहाँ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को स्थानीय लोगों और छात्र संगठन के समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता मतदाताओं को प्रभावित करने और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे थे। इस पर ग्रामीणों ने विरोध जताया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई,जिसने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।
नादिया जिले के करीमपुर विधानसभा क्षेत्र में एक और गंभीर मामला सामने आया, जिसने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ पश्चिम बंगाल पुलिस के एक अधिकारी को कथित तौर पर मतदाताओं से एक विशेष पार्टी के पक्ष में वोट डालने के लिए कहते हुए देखा गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है और विपक्ष ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की माँग की है।
इसके अलावा छपरा विधानसभा क्षेत्र के हत्रा पंचायत में भी हिंसा की खबर सामने आई। यहाँ बूथ नंबर 52 पर भारतीय जनता पार्टी के पोलिंग एजेंट मोशर्रफ मीर पर हमला किया गया। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई,जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरे चरण का मतदान कई जगहों पर तनाव और हिंसा की छाया में संपन्न हुआ। जहाँ एक ओर प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया,वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने व्यापक गड़बड़ी और हिंसा के आरोप लगाए हैं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह निष्पक्ष और भयमुक्त नहीं हो पाई है। आने वाले चरणों में प्रशासन और चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे मतदाताओं को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण प्रदान कर सकें,ताकि लोकतंत्र की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।
