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आरबीआई ने ‘मिशन सक्षम’ की शुरुआत की,सहकारी बैंकों की क्षमता बढ़ाने के लिए देशव्यापी प्रशिक्षण अभियान

नई दिल्ली,29 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत के बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए ‘मिशन सक्षम’ नामक एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल खास तौर पर शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की कार्यक्षमता,प्रबंधन क्षमता और संस्थागत मजबूती को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। देशभर में लागू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा,जिससे पूरे सेक्टर में गुणवत्ता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिल सके।

केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक आधिकारिक नोट के अनुसार,इस मिशन के तहत लगभग 1.40 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य,वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी,जोखिम प्रबंधन,अनुपालन और ऑडिट विभाग के प्रमुखों के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी शामिल होंगे। इस व्यापक दायरे से यह स्पष्ट होता है कि ‘मिशन सक्षम’ केवल एक सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है,बल्कि यह सहकारी बैंकिंग तंत्र को जमीनी स्तर से सशक्त बनाने का प्रयास है।

आरबीआई ने इस कार्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया है कि यह अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके। इसके लिए प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से किया जाएगा। ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को भी इस पहल से जोड़ा जा सकेगा,जबकि प्रत्यक्ष प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से गहन और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी। इस दोहरे मॉडल से प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पहुँच दोनों को संतुलित रखने की कोशिश की गई है।

इस मिशन की एक और खास बात यह है कि इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा। भारत जैसे विविध भाषाई देश में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इससे विभिन्न राज्यों में कार्यरत बैंक कर्मचारियों को अपनी भाषा में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल उनकी समझ बेहतर होगी,बल्कि प्रशिक्षण का प्रभाव भी अधिक गहरा होगा। आरबीआई ने इस पहल को अधिक समावेशी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं और संघों से भी सलाह ली है,ताकि कार्यक्रम की रूपरेखा व्यावहारिक और प्रभावी हो सके।

‘मिशन सक्षम’ नाम अपने आप में इस कार्यक्रम के उद्देश्य को दर्शाता है। इसका लक्ष्य केवल कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना नहीं है,बल्कि उन्हें इस तरह सक्षम बनाना है कि वे बदलते बैंकिंग परिवेश में बेहतर ढंग से काम कर सकें। आज के समय में बैंकिंग क्षेत्र तेजी से डिजिटल हो रहा है और इसके साथ ही जोखिम,साइबर सुरक्षा और अनुपालन जैसे मुद्दे भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में सहकारी बैंकों के कर्मचारियों को इन चुनौतियों के लिए तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।

आरबीआई का मानना है कि इस पहल से सहकारी बैंकों की प्रबंधन क्षमता में सुधार होगा और उनकी संचालन दक्षता भी बढ़ेगी। इसके साथ ही नियमों के पालन की संस्कृति को भी मजबूत किया जा सकेगा,जो किसी भी वित्तीय संस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बेहतर प्रशिक्षण के माध्यम से बैंक अपने ग्राहकों को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय सेवाएँ प्रदान कर पाएँगे,जिससे उनके प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।

यह पहल एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। आरबीआई का उद्देश्य केवल तत्काल सुधार करना नहीं है,बल्कि एक ऐसा तंत्र विकसित करना है,जिसमें निरंतर सीखने और सुधार की प्रक्रिया बनी रहे। इसके तहत कर्मचारियों को नियमित रूप से नए कौशल और ज्ञान से लैस किया जाएगा,ताकि वे बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,खासकर छोटे और मध्यम वर्ग के लोगों को वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने में। ऐसे में इस क्षेत्र को मजबूत करना जरूरी है,ताकि यह आर्थिक विकास में अपनी भूमिका को और प्रभावी ढंग से निभा सके। ‘मिशन सक्षम’ इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

आरबीआई की यह पहल सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। इससे न केवल बैंकों की आंतरिक संरचना मजबूत होगी,बल्कि ग्राहकों के लिए भी बेहतर और सुरक्षित बैंकिंग सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकेंगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मिशन सक्षम’ किस प्रकार सहकारी बैंकों के कामकाज में सकारात्मक बदलाव लाता है और उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।