अर्जुन कपूर (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

पर्सनालिटी राइट्स को लेकर बढ़ी कानूनी लड़ाई,अर्जुन कपूर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 8 अक्टूबर को सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली,29 अप्रैल (युआईटीवी)- डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग के बीच पर्सनालिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने संकेत दिया है कि वह 8 अक्टूबर को अंतरिम आदेश पारित करेगी। यह मामला न केवल एक अभिनेता के अधिकारों से जुड़ा है,बल्कि पूरे मनोरंजन उद्योग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री की वैधता से भी संबंधित है।

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक हस्तियों पर आधारित हर प्रकार की सामग्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वही सामग्री प्रतिबंध के दायरे में आएगी जो अपमानजनक,मानहानिकारक या अनुचित हो। अदालत के अनुसार,जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में होता है,तो उसके बारे में विभिन्न प्रकार की सामग्री बनना स्वाभाविक है और उसे पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है। हालाँकि,यदि कोई सामग्री व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुँचाती है या उसकी गरिमा का उल्लंघन करती है,तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

अर्जुन कपूर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स पर बिना अनुमति के उनके चेहरे और व्यक्तित्व का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से एआई तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो को लेकर चिंता जताई गई है,जिसमें अभिनेता के चेहरे और आवाज का उपयोग बिना उनकी सहमति के किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री न केवल उनके पेशेवर जीवन को प्रभावित कर सकती है,बल्कि उनकी व्यक्तिगत छवि और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचा सकती है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्मी हस्ती ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया हो। इससे पहले दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता अल्लू अर्जुन ने भी इसी तरह की याचिका दायर की थी,जिसमें अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिना अनुमति के उनकी तस्वीरों और वीडियो के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसी तरह अभिनेता कार्तिक आर्यन को भी बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली थी, जहाँ अदालत ने उनके नाम,आवाज,छवि और एआई द्वारा बनाए गए डीपफेक वीडियो के उपयोग पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

मनोरंजन जगत के कई अन्य बड़े नाम भी इस तरह की कानूनी सुरक्षा हासिल कर चुके हैं। महानायक अमिताभ बच्चन,अभिनेता सलमान खान,अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन,अभिनेता अभिषेक बच्चन,अभिनेता विवेक ओबेरॉय और फिल्म निर्माता करण जौहर जैसे कई नाम शामिल हैं,जिन्हें अदालत ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा प्रदान की है। इसके अलावा आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और दक्षिण भारतीय अभिनेता नागार्जुन को भी इसी तरह की राहत मिल चुकी है।

दिल्ली हाईकोर्ट की इस सुनवाई ने एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है कि आखिर पर्सनालिटी राइट्स की सीमा क्या होनी चाहिए और डिजिटल युग में इसे किस प्रकार लागू किया जाना चाहिए। एक ओर जहाँ सार्वजनिक हस्तियों की छवि और पहचान को सुरक्षित रखना जरूरी है,वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने इसी संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण डीपफेक जैसे खतरों में तेजी आई है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति,खासकर सार्वजनिक हस्तियों के लिए अपनी पहचान की सुरक्षा करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी के चेहरे और आवाज का उपयोग कर नकली वीडियो तैयार करना आसान हो गया है,जिससे गलत जानकारी फैलने और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचने का खतरा बढ़ गया है।

अर्जुन कपूर का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है। यदि अदालत इस मामले में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है,तो इससे अन्य कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों को भी अपने अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही,डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी यह एक संकेत होगा कि वे किसी भी व्यक्ति की पहचान का उपयोग करते समय कानूनी सीमाओं का ध्यान रखें।

अब सभी की नजरें 8 अक्टूबर पर टिकी हैं,जब दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में अपना अंतरिम आदेश सुनाएगा। यह फैसला न केवल अर्जुन कपूर के लिए,बल्कि पूरे मनोरंजन उद्योग और डिजिटल मीडिया के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।