भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम का तीन दिवसीय भारत दौरा,5 मई को पहुँचेंगे भारत,रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली,30 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार के आमंत्रण पर वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम 5 मई से 7 मई तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है,क्योंकि राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति टो लैम के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा। इस डेलिगेशन में वियतनाम सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री,अधिकारी और एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार,निवेश और आर्थिक सहयोग के नए आयाम भी स्थापित करेगा।

राष्ट्रपति टो लैम का 6 मई को राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में औपचारिक स्वागत किया जाएगा। यह स्वागत समारोह भारत की परंपरागत कूटनीतिक गरिमा को दर्शाता है और किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए विशेष महत्व रखता है। इसके बाद राष्ट्रपति टो लैम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच विस्तृत वार्ता होगी,जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इस बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ रक्षा,व्यापार, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

राष्ट्रपति टो लैम की मुलाकात भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी होगी। इसके अलावा,भारत के अन्य वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के साथ भी उनकी बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को और मजबूत करना और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।

इस दौरे की एक खास बात यह भी है कि राष्ट्रपति टो लैम केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि वे बोधगया और मुंबई का भी दौरा करेंगे। बोधगया का दौरा उनके लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि यह बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है और वियतनाम में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव है। वहीं मुंबई का दौरा आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से अहम होगा,जहाँ वे व्यापारिक समुदाय के साथ संवाद कर सकते हैं।

भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सहयोग की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में इन संबंधों ने रणनीतिक साझेदारी का रूप ले लिया है। खासकर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वियतनाम दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई थी,जिसने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी।

इस वर्ष इस रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं,जो इस दौरे को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,राष्ट्रपति टो लैम का यह दौरा इस साझेदारी को और गहरा करने और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं और इस यात्रा के दौरान इस विषय पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इससे पहले 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टो लैम को वियतनाम का राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि टो लैम के नेतृत्व में भारत और वियतनाम के बीच मजबूत और समय की कसौटी पर खरी उतरी दोस्ती और भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे दोनों देशों के लोगों की समृद्धि और खुशहाली के लिए रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का महत्व बढ़ता जा रहा है। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग न केवल द्विपक्षीय स्तर पर,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रक्षा सहयोग,समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देश पहले से ही कई पहल कर चुके हैं और इस दौरे से इन प्रयासों को और गति मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति टो लैम का यह भारत दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है,बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे होते संबंधों का प्रतीक है। यह यात्रा आने वाले समय में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग के नए आयाम खोल सकती है और दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी को और मजबूत बना सकती है।