वाशिंगटन,2 मई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में अस्थायी शांति के बीच एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन अब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हथियारों की बिक्री को लेकर चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिका ने कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए इजरायल,कतर,कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है,क्योंकि यह ऐसे समय में आया है,जब क्षेत्र में हाल ही में संघर्ष के बाद अस्थायी शांति बनी हुई है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक,प्रस्तावित सौदों में अत्याधुनिक सैन्य उपकरण शामिल हैं। इनमें एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम,हवाई और मिसाइल रक्षा पुनःपूर्ति सेवाएँ और एकीकृत युद्ध कमांड प्रणाली जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन हथियारों का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोगियों की सैन्य क्षमता को मजबूत करना और संभावित खतरों से निपटने की तैयारी को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। हालाँकि,इस फैसले ने अमेरिका के भीतर राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया है,क्योंकि कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का युद्ध अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने अमेरिकी सांसदों को भेजे एक पत्र में स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है और 28 फरवरी से शुरू हुई शत्रुता अब खत्म हो चुकी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका के भीतर इस बात पर बहस जारी है कि क्या राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी ली थी या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम को वॉर पावर रेजोल्यूशन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है,जो 1973 में लागू हुआ था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की जानकारी कांग्रेस को देने के बाद 60 दिनों के भीतर उसे समाप्त करना होता है,जब तक कि कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी न मिल जाए। ट्रंप के ताजा बयान को इस बहस को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें यह सवाल उठ रहा था कि क्या उन्होंने इस कानून का पालन किया है।
हालाँकि,ट्रंप ने युद्ध समाप्त होने का दावा किया है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है,लेकिन वह मौजूदा प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प अभी भी खुले हैं और आने वाले समय में परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर भी तीखा हमला करते हुए उसे बिखरा हुआ और असंगठित बताया। उनके अनुसार,ईरान के नेता किसी एक निर्णय पर पहुँचने में असमर्थ हैं और आंतरिक मतभेदों के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष समझौता करना चाहते हैं,लेकिन आपसी असहमति के चलते कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ पा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा क्षेत्रीय सहयोगियों को हथियारों की आपूर्ति और ईरान के साथ अनिश्चित कूटनीतिक स्थिति,दोनों मिलकर पश्चिम एशिया में अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं। जहाँ एक ओर हथियारों की यह बड़ी डील सहयोगी देशों की सुरक्षा को मजबूत कर सकती है,वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्र में हथियारों की होड़ को भी बढ़ावा दे सकती है।
इसके अलावा,यह भी माना जा रहा है कि ट्रंप का यह कदम उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत आता है,जिसमें वे अपने सहयोगियों को मजबूत करते हुए अमेरिका के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालाँकि,इस नीति के आलोचक इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला कदम भी मान रहे हैं।
पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति जटिल बनी हुई है। एक ओर युद्ध समाप्त होने के दावे किए जा रहे हैं,तो दूसरी ओर हथियारों की बिक्री और कूटनीतिक अनिश्चितता नए सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो पाती है या नहीं।
