सर्गेई लावरोव और सैयद अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@aprajitanefes)

रूस-ईरान वार्ता में शांति और नौवहन सुरक्षा पर जोर,होर्मुज जलडमरूमध्य बना चर्चा का केंद्र

मास्को,2 मई (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रूस और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। हाल ही में सर्गेई लावरोव और सैयद अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत में क्षेत्रीय शांति,सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बातचीत में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार,दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी शत्रुता को पूरी तरह समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक स्थिति को स्थिर करना बेहद जरूरी है,ताकि दीर्घकालिक शांति स्थापित की जा सके। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने और संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

इस चर्चा में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है,जहाँ से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। रूस ने अपने जहाजों और कार्गो के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और इस दिशा में सहयोग की अपेक्षा जताई।

रूस ने इस दौरान अपने मध्यस्थता प्रयासों को जारी रखने का भी संकेत दिया। उसने कहा कि वह क्षेत्र में शांति बहाली के लिए हर संभव कूटनीतिक कदम उठाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह भूमिका पश्चिम एशिया में संतुलन बनाने के प्रयास का हिस्सा है,जहाँ कई वैश्विक शक्तियां अपने-अपने हितों के साथ सक्रिय हैं।

इस टेलीफोन वार्ता से पहले 27 अप्रैल को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में ईरानी विदेश मंत्री अराघची से मुलाकात की थी। इस बैठक को भी काफी अहम माना गया,क्योंकि इसमें रूस-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर गहन चर्चा हुई थी। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे,जिन्होंने विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

रूसी पक्ष की ओर से इस बैठक में विदेश मंत्री लावरोव,राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव और रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के मुख्य खुफिया निदेशालय के प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव शामिल थे। वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल में उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी और रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली भी उपस्थित थे। इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधित्व से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश अपने संबंधों को लेकर कितने गंभीर हैं।

बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि मास्को न केवल द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा,बल्कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। पुतिन ने यह भी उम्मीद जताई कि ईरान मौजूदा चुनौतियों से उबरकर स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

पुतिन के अनुसार,रूस हर वह प्रयास करेगा जो ईरान और पूरे क्षेत्र के लोगों के हित में हो। उन्होंने कहा कि शांति बहाली के लिए संवाद और सहयोग ही सबसे प्रभावी रास्ता है। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब क्षेत्र में कई तरह के तनाव और संघर्ष जारी हैं,जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है।

इस दौरान पुतिन ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का संदेश प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस संदेश का जिक्र बातचीत की शुरुआत में ही किया,जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर लगातार संवाद बना हुआ है। हालाँकि,इस संदेश की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई,लेकिन इसे दोनों देशों के बीच मजबूत राजनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है।

रूस और ईरान के बीच हालिया बातचीत और बैठकें यह दर्शाती हैं कि दोनों देश पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा,परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे। ऐसे में रूस और ईरान की यह कूटनीतिक पहल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।