नई दिल्ली,4 मई (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने आधार कार्ड के स्वरूप में बड़े बदलाव को लेकर फैल रही खबरों और सोशल मीडिया पोस्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएँ तेज थीं कि सरकार जल्द ही आधार कार्ड का एक नया और सरल फॉर्मेट लागू करने जा रही है,जिसमें केवल फोटो और क्यूआर कोड ही शामिल होगा। इन दावों को स्पष्ट रूप से गलत बताते हुए सरकार ने कहा है कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि आधार कार्ड के फॉर्मेट में बदलाव से जुड़ी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और इनका कोई आधार नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की अपुष्ट जानकारी लोगों के बीच भ्रम और अनिश्चितता पैदा कर रही है,जिसे तुरंत रोकने की आवश्यकता है। सरकार ने दोहराया कि आधार प्रणाली में किसी बड़े बदलाव की फिलहाल कोई योजना नहीं बनाई गई है।
मंत्रालय के अनुसार,समय-समय पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आते हैं,जिनमें यह दावा किया जाता है कि आधार कार्ड का स्वरूप बदलकर उसे और अधिक सरल बनाया जाएगा। इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि वर्ष के अंत तक आधार कार्ड केवल एक फोटो और क्यूआर कोड तक सीमित रह जाएगा। हालाँकि,मंत्रालय ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि इस तरह की किसी भी योजना पर न तो विचार हो रहा है और न ही कोई निर्णय लिया गया है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें। विशेष रूप से,लोगों को सलाह दी गई है कि वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही सत्य मानें। इसके साथ ही मीडिया संस्थानों से भी आग्रह किया गया है कि वे बिना पुष्टि के इस तरह की खबरों को प्रसारित न करें,क्योंकि इससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है,जब डिजिटल पहचान और डेटा सुरक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। आधार कार्ड,जो भारत की सबसे महत्वपूर्ण पहचान प्रणालियों में से एक है,करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। ऐसे में इसके स्वरूप या कार्यप्रणाली में किसी भी संभावित बदलाव की खबरें लोगों के बीच चिंता पैदा कर सकती हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बन चुकी है। वर्तमान में देश में लगभग 134 करोड़ लोग आधार का उपयोग कर रहे हैं,जो इसकी व्यापक पहुँच और उपयोगिता को दर्शाता है। इसके माध्यम से अब तक 17,000 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं,जो विभिन्न सरकारी और निजी सेवाओं के लिए पहचान सत्यापन में सहायक रहे हैं।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा संचालित यह प्रणाली नागरिकों को विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने में मदद करती है। बैंकिंग,सब्सिडी,मोबाइल कनेक्शन और अन्य कई सेवाओं में आधार का उपयोग अनिवार्य या सहायक रूप में किया जाता है। ऐसे में इसकी विश्वसनीयता और स्थिरता बनाए रखना सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में जानकारी का तेजी से प्रसार होता है,लेकिन इसके साथ ही गलत या भ्रामक जानकारी भी उतनी ही तेजी से फैलती है। ऐसे में सरकार द्वारा समय-समय पर स्पष्टीकरण देना आवश्यक हो जाता है,ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और वे किसी भी अफवाह का शिकार न हों।
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड के फॉर्मेट में किसी भी प्रकार का बदलाव फिलहाल प्रस्तावित नहीं है। नागरिकों से अपेक्षा की गई है कि वे सतर्क रहें और केवल विश्वसनीय एवं आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। यह कदम न केवल अफवाहों पर रोक लगाने के लिए जरूरी है,बल्कि आधार प्रणाली में लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी अहम है।
