अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर अमेरिका का बड़ा दावा,दक्षिण कोरिया को भी शामिल होने का संकेत

वाशिंगटन,5 मई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जहाजों की आवाजाही से जुड़े हालात को बिगाड़ने का आरोप लगाया है और ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक मिशन का जिक्र करते हुए कई देशों को इस पहल में शामिल होने का संकेत दिया है। खासतौर पर दक्षिण कोरिया का नाम लेकर उन्होंने यह संकेत दिया कि अब इस देश को भी इस मिशन का हिस्सा बनना चाहिए।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान ने हाल ही में कुछ ऐसे देशों को निशाना बनाया है,जिनका इस क्षेत्रीय संघर्ष से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं में एक दक्षिण कोरियाई कार्गो जहाज भी शामिल है,जिसे निशाना बनाया गया। ट्रंप ने कहा कि यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी चिंता का विषय है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की घटनाओं को देखते हुए अब अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सैन्य सुरक्षा की जरूरत और बढ़ गई है।

ट्रंप के अनुसार,अमेरिकी सेना ने इस दौरान सात छोटी और तेज रफ्तार नौकाओं को नष्ट कर दिया है,जिन्हें उन्होंने “फास्ट बोट्स” बताया। उनका कहना था कि ये नौकाएँ संभावित रूप से जहाजों के लिए खतरा बन सकती थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दक्षिण कोरियाई जहाज को छोड़कर फिलहाल इस जलमार्ग से गुजरने वाले अन्य जहाज सुरक्षित हैं और किसी को नुकसान नहीं पहुँचा है। हालाँकि,इस पूरे घटनाक्रम ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल,सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक दक्षिण कोरियाई जहाज पर धमाके के बाद आग लगने की घटना सामने आई थी। इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जहाज को कितना नुकसान हुआ है और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक,इस घटना में किसी भी नागरिक के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है,जो राहत की बात मानी जा रही है।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि उनकी कांसुलर टीम इस मामले की गहराई से जाँच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार,अगर यह हमला साबित होता है, तो यह पहला ऐसा मामला होगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी दक्षिण कोरियाई जहाज को निशाना बनाया गया हो। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन सकती है,क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है।

इसी बीच,संयुक्त अरब अमीरात ने भी एक अलग घटना में ईरान की ओर से कथित तौर पर किए गए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। यूएई के अनुसार,ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया गया। हालाँकि,इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और जहाज उस समय खाली था,लेकिन यह घटना इस क्षेत्र में बढ़ते खतरे को उजागर करती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर सीधे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका द्वारा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ जैसे मिशन की शुरुआत को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है,जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस मिशन को लेकर जल्द ही एक विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। उन्होंने बताया कि रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी इस विषय पर प्रेस वार्ता करेंगे,जिसमें मिशन की रणनीति और आगे की योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस संकट का समाधान निकालना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दक्षिण कोरिया जैसे देश इस मिशन में शामिल होते हैं,तो इससे अमेरिका की पहल को और मजबूती मिल सकती है। साथ ही,यह भी स्पष्ट होता है कि यह केवल एक क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक मुद्दा बन चुका है,जिसमें कई देशों के हित जुड़े हुए हैं। हालाँकि,इस पूरे घटनाक्रम में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है,क्योंकि किसी भी सैन्य कार्रवाई से स्थिति और बिगड़ सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं ने वैश्विक समुदाय को सतर्क कर दिया है। अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ जहाँ एक ओर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश है,वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए केवल सैन्य नहीं बल्कि कूटनीतिक प्रयास भी जरूरी होंगे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की रणनीति अपनाई जाती है और क्या यह तनाव कम हो पाता है या नहीं।