एम.के. स्टालिन (तस्वीर क्रेडिट@Sachin3144)

चुनावी हार के बाद भावुक हुए एम.के. स्टालिन,बोले— जनता का भरोसा अब भी डीएमके के साथ,मजबूत विपक्ष के रूप में लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे

चेन्नई,5 मई (युआईटीवी)- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के प्रमुख और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चुनाव परिणाम आने के बाद जनता को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश दिया है। उन्होंने उन सभी मतदाताओं का दिल से आभार व्यक्त किया,जिन्होंने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन पर भरोसा जताया और पार्टी के पक्ष में मतदान किया।

एम.के. स्टालिन ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें मिला हर एक वोट उनके लिए जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अब तक की मतगणना के अनुसार,डीएमके गठबंधन को कुल 1 करोड़ 54 लाख 82 हजार 782 वोट प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा उनके लिए केवल एक संख्या नहीं,बल्कि जनता के भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन दलों को अधिक सीटें मिली हैं,उन्हें डीएमके गठबंधन से केवल लगभग 17 लाख 43 हजार वोट अधिक मिले हैं और दोनों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर महज 3.52 प्रतिशत का है। स्टालिन ने इन आँकड़ों को इस बात का संकेत बताया कि पार्टी के प्रति जनता का विश्वास अब भी कायम है।

हालाँकि,इस चुनाव में उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ा,फिर भी उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बनाए रखने की कोशिश की। उन्होंने पार्टी के सभी विजयी उम्मीदवारों से अपील की कि वे तुरंत अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता से मिलें और उनका धन्यवाद करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और राजनीतिक दलों का हर कदम जनता की सेवा के लिए ही होना चाहिए।

स्टालिन ने अपने संबोधन में पार्टी के लंबे इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम छह बार सत्ता में रह चुकी है और इस दौरान उसने जीत और हार दोनों का अनुभव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता हमेशा पार्टी की विचारधारा को बनाए रखना रही है,चाहे परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि वही कार्यकर्ता पार्टी की असली ताकत होते हैं,जो जीत और हार दोनों को समान रूप से स्वीकार करते हुए अपने सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हैं।

अपने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए स्टालिन ने कहा कि वे ही इस आंदोलन की ‘जान और जड़’ हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव परिणाम के बाद कई लोग उन्हें सांत्वना के संदेश भेज रहे हैं,लेकिन जब तक कार्यकर्ता उनके साथ हैं,उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता अपने नेता एम करुणानिधि के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान से जुड़े हुए हैं और यही भावना पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करती है।

स्टालिन ने कहा कि 1.54 करोड़ वोट कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण का परिणाम हैं। उन्होंने खुद को ‘मुख्य कार्यकर्ता’ बताते हुए कहा कि वे आगे भी जनता के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी सत्ता में होती है,तो वह जनता के लिए योजनाएँ बनाती है और जब विपक्ष में होती है तो जनता की आवाज उठाती है। इस बार विपक्ष में रहते हुए भी पार्टी जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएगी और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी।

उन्होंने अपने संदेश के अंत में द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पेरियार,सीएन अन्नादुरई और करुणानिधि द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलते हुए पार्टी आगे बढ़ेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि डीएमके भाषा,संस्कृति और राज्य की पहचान की रक्षा के लिए लगातार काम करती रहेगी और इस सफर में कोई भी पीछे नहीं छूटेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही डीएमके को इस चुनाव में सत्ता से बाहर होना पड़ा हो,लेकिन उसे मिले वोट प्रतिशत से यह साफ है कि पार्टी का जनाधार अभी भी मजबूत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एक मजबूत विपक्ष के रूप में डीएमके किस तरह राज्य की राजनीति में अपनी भूमिका निभाती है।

एम.के. स्टालिन का यह संदेश केवल धन्यवाद देने तक सीमित नहीं था,बल्कि इसमें भविष्य की रणनीति और पार्टी की दिशा का स्पष्ट संकेत भी दिखाई देता है। चुनावी हार के बावजूद उनका आत्मविश्वास और कार्यकर्ताओं के प्रति भरोसा यह दर्शाता है कि डीएमके आने वाले समय में फिर से मजबूत वापसी की तैयारी में जुटी है।