स्टॉकहोम,18 मई (युआईटीवी)- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन के प्रतिष्ठित ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ के ‘कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है और आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों,सरकार प्रमुखों तथा वैश्विक स्तर पर विशिष्ट योगदान देने वाले नेताओं को प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान उनकी स्वीडन यात्रा के दौरान प्रदान किया गया,जिसे भारत और स्वीडन के बीच मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है।
‘कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ इस प्रतिष्ठित सम्मान की सर्वोच्च श्रेणी मानी जाती है। यह उन नेताओं को दिया जाता है,जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग,वैश्विक कूटनीति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान मिलने के बाद अब तक विभिन्न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा दिए गए उनके कुल विदेशी सम्मानों की संख्या 31 तक पहुँच गई है। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपलब्धि विश्व मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वीडन पहुँचने पर गुटेनबर्ग हवाई अड्डे पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार,निवेश,रक्षा,हरित ऊर्जा,डिजिटल तकनीक,नवाचार और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने भविष्य में साझेदारी को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
स्वीडन लंबे समय से तकनीकी नवाचार,हरित ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी देशों में गिना जाता है,जबकि भारत विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग को वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के बीच हुई बातचीत में विशेष रूप से हरित परिवर्तन,स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि स्वीडन यात्रा का उद्देश्य व्यापार,निवेश,नवाचार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-स्वीडन संबंधों को और मजबूत बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि वे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ ‘यूरोपीय व्यापार गोलमेज सम्मेलन’ में हिस्सा लेंगे,जहाँ यूरोप के प्रमुख उद्योग और व्यापार जगत के नेताओं से बातचीत होगी। इस बैठक को भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है,बल्कि यह भारत की बदलती वैश्विक भूमिका का भी संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। चाहे जी-20 शिखर सम्मेलन हो,वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर चर्चा हो या फिर रणनीतिक साझेदारी का मुद्दा, भारत लगातार प्रमुख भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। ऐसे में विभिन्न देशों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिए जा रहे सम्मान भारत की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता को भी दर्शाते हैं।
भारत और स्वीडन के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक और तकनीकी साझेदारी रही है। स्वीडन की कई बड़ी कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं,जबकि भारतीय कंपनियाँ भी यूरोपीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता,साइबर सुरक्षा,हरित तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रों में भी साझेदारी की नई संभावनाएँ तलाश की जा रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत यूरोप के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्वीडन जैसे विकसित और तकनीकी रूप से अग्रणी देश के साथ गहरे होते संबंध भारत की वैश्विक रणनीति के लिए अहम माने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को मिले इस सम्मान को लेकर भारत में भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों ने इसे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का गौरवपूर्ण क्षण बताया है। वहीं कई विशेषज्ञों ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक रणनीति का परिणाम करार दिया है।
स्वीडन यात्रा के दौरान होने वाली विभिन्न बैठकों और समझौतों पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत और स्वीडन के बीच व्यापार,रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग में और तेजी देखने को मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी को मिला ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ सम्मान इस बढ़ती साझेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया है,जो दोनों देशों के बीच विश्वास,सहयोग और साझा विकास की भावना को और मजबूत करेगा।
