मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@Surendr0032083)

तमिलनाडु में 717 शराब दुकानें होंगी बंद,मुख्यमंत्री एस.जोसेफ विजय के फैसले से मचा राजनीतिक और सामाजिक हलचल

चेन्नई,12 मई (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार ने जनहित और सामाजिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य में संचालित 717 टीएएसएमएसी शराब दुकानों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ये सभी दुकानें धार्मिक स्थलों,शैक्षणिक संस्थानों और बस स्टैंडों के 500 मीटर के दायरे में स्थित थीं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले दो सप्ताह के भीतर इन दुकानों को चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले को राज्य में सामाजिक सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन यानी टीएएसएमएसी राज्य में शराब की बिक्री का संचालन करने वाली सरकारी संस्था है। वर्तमान समय में राज्यभर में टीएएसएमएसी के तहत कुल 4,765 शराब की खुदरा दुकानें संचालित हो रही हैं। लंबे समय से राज्य के विभिन्न हिस्सों में यह माँग उठती रही थी कि स्कूलों,कॉलेजों,मंदिरों,मस्जिदों,चर्चों और बस स्टैंडों के आसपास स्थित शराब दुकानों को हटाया जाए। स्थानीय नागरिकों,सामाजिक संगठनों और अभिभावकों की ओर से लगातार शिकायतें की जा रही थीं कि इन दुकानों के कारण सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है और छात्रों तथा महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को सर्वे कराने का निर्देश दिया था। सरकार की ओर से कराए गए विस्तृत सर्वे में सामने आया कि राज्यभर में कुल 717 शराब दुकानें ऐसी हैं,जो निर्धारित 500 मीटर की सीमा के भीतर संचालित हो रही हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए इन दुकानों को बंद करने का फैसला लिया।

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक बंद होने वाली दुकानों में 276 दुकानें धार्मिक स्थलों के पास स्थित हैं। वहीं 186 दुकानें स्कूलों और कॉलेजों जैसे शैक्षणिक संस्थानों के करीब चल रही थीं। इसके अलावा 255 दुकानें बस स्टैंडों और सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास मौजूद थीं। सरकार का मानना है कि इन स्थानों के आसपास शराब की दुकानें होने से आम लोगों को असुविधा होती है और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय ने अधिकारियों से कहा है कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ लागू किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सामाजिक जिम्मेदारी और जनभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है और सार्वजनिक स्थानों के आसपास शराब की उपलब्धता को कम करना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं,बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश है। वहीं विपक्षी दलों ने भी इस कदम का समर्थन किया है,हालाँकि,कुछ नेताओं ने सवाल उठाया है कि राज्य सरकार को शराब बिक्री पर पूरी तरह नियंत्रण के लिए और कठोर कदम उठाने चाहिए।

सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने मुख्यमंत्री के फैसले का खुले तौर पर स्वागत किया है। कई संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के पास शराब दुकानें होने से लंबे समय से लोगों को परेशानी हो रही थी। खासकर छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ जताई जाती रही हैं। अब सरकार के फैसले से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में शराब बिक्री पर नियंत्रण करना आसान नहीं है,क्योंकि टीएएसएमएसी राज्य सरकार के राजस्व का बड़ा स्रोत माना जाता है। इसके बावजूद सरकार द्वारा इतनी बड़ी संख्या में दुकानों को बंद करने का निर्णय यह दिखाता है कि प्रशासन जनभावनाओं को प्राथमिकता देना चाहता है। हालाँकि,इस फैसले का आर्थिक असर भी देखने को मिल सकता है,क्योंकि शराब बिक्री से राज्य सरकार को हर साल भारी राजस्व प्राप्त होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय इस फैसले के जरिए खुद को जनहित और सामाजिक सुधार की राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के समय में तमिलनाडु में शराबबंदी और शराब दुकानों के स्थान को लेकर बहस लगातार तेज हुई है। ऐसे में यह निर्णय मुख्यमंत्री की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है।

इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि चिन्हित दुकानों को तय समयसीमा के भीतर बंद किया जाए। साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन को भी सतर्क रहने को कहा गया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दुकानों को बंद करने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो।

तमिलनाडु सरकार का यह कदम आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। देश के कई हिस्सों में धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के पास शराब दुकानों को लेकर विवाद होते रहे हैं। ऐसे में तमिलनाडु का यह फैसला सामाजिक सुधार और सार्वजनिक हित के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल राज्यभर में इस फैसले की चर्चा हो रही है और लोग इसे सरकार की बड़ी सामाजिक पहल के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस नीति को किस तरह आगे बढ़ाती है और क्या भविष्य में शराब दुकानों को लेकर और भी सख्त फैसले लिए जाते हैं।