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आरबीआई ने रद्द किया यशवंत सहकारी बैंक का लाइसेंस,जमाकर्ताओं को डीआईसीजीसी से मिलेगी बीमा राशि

मुंबई,20 मई (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) ने एक और सहकारी बैंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए यशवंत सहकारी बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूँजी नहीं है और भविष्य में आय अर्जित करने की संभावनाएँ भी बेहद कमजोर हैं। इसी वजह से बैंक को आगे बैंकिंग कारोबार जारी रखने की अनुमति देना जनहित और जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ माना गया।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस रद्द होने के बाद यशवंत सहकारी बैंक को 19 मई 2026 को कारोबार बंद होने के बाद से किसी भी प्रकार की बैंकिंग गतिविधि संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि बैंक अब नए जमा स्वीकार नहीं कर सकेगा और न ही ग्राहकों को भुगतान या अन्य बैंकिंग सेवाएँ प्रदान कर पाएगा। केंद्रीय बैंक ने बैंक के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाए और इसके लिए एक परिसमापक नियुक्त किया जाए। परिसमापक बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का आकलन करेगा तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

केंद्रीय बैंक के अनुसार बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी थी। बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत आवश्यक पूँजी मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों का पालन करने में बैंक लगातार विफल रहा। आरबीआई का कहना है कि बैंक की आर्थिक हालत ऐसी नहीं रह गई थी कि वह अपने जमाकर्ताओं की पूरी जमा राशि सुरक्षित रख सके। ऐसे में यदि बैंक को कारोबार जारी रखने दिया जाता,तो इससे ग्राहकों के हितों को गंभीर नुकसान पहुँच सकता था।

हालाँकि,केंद्रीय बैंक ने जमाकर्ताओं को राहत देने वाली जानकारी भी साझा की है। आरबीआई के मुताबिक,बैंक के परिसमापन की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम यानी डीआईसीजीसी से अधिकतम पाँच लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकार होगा। यह व्यवस्था जमाकर्ताओं की बचत को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

आरबीआई ने बताया कि बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार लगभग 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है। यानी अधिकांश ग्राहकों की जमा राशि पाँच लाख रुपये की सीमा के भीतर है और उन्हें बीमा के तहत पूरा भुगतान मिल सकता है। केंद्रीय बैंक ने यह भी जानकारी दी कि 20 अप्रैल तक डीआईसीजीसी पहले ही 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि जमाकर्ताओं को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो चुकी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति को लेकर आरबीआई पिछले कुछ समय से काफी सख्त रुख अपना रहा है। जिन बैंकों में पूँजी की कमी,खराब प्रबंधन, बढ़ते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात या नियामकीय उल्लंघन जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं,उनके खिलाफ केंद्रीय बैंक लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

गौरतलब है कि यह हाल के दिनों में सहकारी बैंकों के खिलाफ आरबीआई की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 12 मई को भी केंद्रीय बैंक ने सर्वोदय सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। उस समय भी आरबीआई ने पर्याप्त पूँजी और आय की संभावनाओं की कमी को कार्रवाई का मुख्य कारण बताया था। लगातार दो सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द होने से इस क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार सहकारी बैंक आमतौर पर छोटे शहरों और स्थानीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हैं। इनमें मध्यम वर्ग,छोटे व्यापारी और स्थानीय कारोबारी बड़ी संख्या में खाते रखते हैं। ऐसे में किसी बैंक का लाइसेंस रद्द होना सीधे तौर पर हजारों ग्राहकों को प्रभावित करता है। हालाँकि,डीआईसीजीसी की बीमा योजना जमाकर्ताओं को एक हद तक सुरक्षा देती है,लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएँ लोगों के भरोसे को प्रभावित करती हैं।

आरबीआई ने अपने बयान में यह भी कहा कि बैंक को आगे संचालन की अनुमति देना सार्वजनिक हित के खिलाफ होता,क्योंकि मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं था। केंद्रीय बैंक का मानना है कि समय रहते कार्रवाई करना आवश्यक था,ताकि नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सके।

इस कार्रवाई के बाद अब सभी की नजरें परिसमापन प्रक्रिया और ग्राहकों को भुगतान की व्यवस्था पर टिकी हैं। जमाकर्ताओं को उम्मीद है कि बीमा दावों का निपटारा जल्द किया जाएगा और उन्हें उनकी राशि समय पर मिल सकेगी। वहीं बैंकिंग क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में आरबीआई सहकारी बैंकों की निगरानी को और कड़ा कर सकता है।

यशवंत सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द होना यह भी दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अब वित्तीय अनुशासन और नियामकीय पालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। आरबीआई की यह कार्रवाई बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।