नई दिल्ली,21 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। यह बैठक इस वर्ष मंत्रिपरिषद की पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है और ऐसे समय में हो रही है,जब केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हैं। सरकार और सत्तारूढ़ दल के भीतर चल रही गतिविधियों के बीच इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह बैठक शाम पाँच बजे दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में आयोजित होगी। इसमें सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री,स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने सभी मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं,जिससे यह संकेत मिल रहा है कि बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सकती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसमें बीते महीनों में लिए गए नीतिगत फैसलों, उनके क्रियान्वयन और अब तक हासिल किए गए परिणामों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी खुद विभिन्न मंत्रालयों की प्रगति रिपोर्ट और योजनाओं की स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार सरकार की प्रमुख योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों को लेकर भी गहन चर्चा होगी। खास तौर पर इस बात पर जोर दिया जाएगा कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक प्रभावी तरीके से कैसे पहुँच जाए। सरकार आने वाले महीनों में अपने विकास और जनकल्याण एजेंडे को और तेज करने की रणनीति पर भी विचार कर सकती है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है,जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय संकटों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव,ईंधन आपूर्ति से जुड़ी चिंताएँ और बढ़ती लागत सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिपरिषद की बैठक में इन विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी और विभिन्न मंत्रालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए केंद्र सरकार आर्थिक स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है। यही कारण है कि ऊर्जा,व्यापार,वित्त और बुनियादी ढाँचे से जुड़े मंत्रालयों की भूमिका इस समय बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस उच्चस्तरीय बैठक का राजनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा माना जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल,असम और पुडुचेरी में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भी पार्टी और सरकार के भीतर चर्चा चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावी नतीजों के बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर रणनीतिक समीक्षा की जा रही है।
इसी वजह से मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही है कि केंद्र सरकार कुछ मंत्रालयों में बदलाव कर सकती है और नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालाँकि,सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है,लेकिन सभी मंत्रियों को दिल्ली में मौजूद रहने के निर्देशों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर अपने मंत्रिमंडल के कामकाज की समीक्षा करते रहे हैं और प्रदर्शन के आधार पर बदलाव करने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसे में यह बैठक आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी की हालिया विदेश यात्रा के तुरंत बाद हो रही है। प्रधानमंत्री बुधवार को अपनी पाँच देशों की कूटनीतिक यात्रा पूरी करके भारत लौटे हैं। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात,नीदरलैंड,स्वीडन,नॉर्वे और इटली का दौरा किया। यह यात्रा भारत की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति के लिहाज से काफी अहम मानी गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात से की थी और 20 मई को इटली में अपने अंतिम कार्यक्रम के साथ इसे समाप्त किया। इस दौरान उन्होंने कई देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और व्यापार,ऊर्जा,तकनीक तथा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस विदेश यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना,नई तकनीकी साझेदारियाँ विकसित करना और यूरोप में भारत की आर्थिक मौजूदगी को और विस्तार देना था। यात्रा के दौरान कई बड़े निवेश,तकनीकी सहयोग और रणनीतिक समझौतों पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश दौरे के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी घरेलू मोर्चे पर सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट दिशा तय करना चाहते हैं। ऐसे में मंत्रिपरिषद की यह बैठक केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं होगी,बल्कि इसे आने वाले महीनों की राजनीतिक और आर्थिक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
सरकार की कोशिश होगी कि वैश्विक चुनौतियों के बीच देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखा जाए और विकास योजनाओं का असर सीधे आम जनता तक पहुँचे। इसके साथ ही राजनीतिक रूप से भी केंद्र सरकार आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटी हुई है।
फिलहाल राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद सरकार की आगामी प्राथमिकताओं,संभावित नीतिगत फैसलों और मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावनाओं को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है।
