अदाणी समूह

अदाणी पावर ने बढ़ाया ऊर्जा क्षेत्र में दायरा,जेपीवीएल हिस्सेदारी और चुर्क प्लांट खरीदने का किया समझौता

अहमदाबाद, 21 मई (युआईटीवी)- अदाणी पावर ने गुरुवार को ऊर्जा क्षेत्र में अपने विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के साथ महत्वपूर्ण समझौते का ऐलान किया। कंपनी ने बताया कि उसने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत समाधान योजना के तहत जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र स्थित 180 मेगावाट क्षमता वाले चुर्क थर्मल पावर प्लांट के अधिग्रहण के लिए करार किया है।

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में अदाणी समूह ने कहा कि उसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड में जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सौदे की कुल कीमत लगभग 2,993.6 करोड़ रुपए तय की गई है। माना जा रहा है कि यह अधिग्रहण अदाणी समूह की बिजली उत्पादन क्षमता और ऊर्जा क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

कंपनी ने एक अलग फाइलिंग में यह भी बताया कि उसने सोनभद्र जिले में स्थित 180 मेगावाट क्षमता वाले चुर्क थर्मल पावर स्टेशन को खरीदने के लिए व्यापार हस्तांतरण समझौता किया है। इस सौदे में संबंधित परिसंपत्तियाँ भी शामिल हैं। इसके साथ ही प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड में 11.49 प्रतिशत हिस्सेदारी भी इस अधिग्रहण का हिस्सा होगी। इस पूरे सौदे का मूल्य लगभग 1,200 करोड़ रुपए बताया गया है।

अदाणी पावर के अनुसार यह पूरा लेन-देन एनसीएलटी द्वारा मंजूर की गई जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की समाधान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अदानी इंटरप्राइजेज समाधान आवेदक की भूमिका में है,जबकि अदाणी पावर को कार्यान्वयन इकाइयों में से एक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसने पहले ही समाधान प्रक्रिया में भाग लेने की इच्छा जाहिर कर दी थी और अब नए समझौते उस स्वीकृत ढाँचे के तहत परिसंपत्तियों के औपचारिक अधिग्रहण का रास्ता तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा अदाणी समूह के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे कंपनी की उत्पादन क्षमता और ऊर्जा परिसंपत्तियों का विस्तार होगा।

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार दोनों सौदे नकद भुगतान के जरिए पूरे किए जाएँगे। कंपनी ने कहा कि नियामक स्वीकृतियाँ मिलने के बाद समाधान योजना में तय “प्रभावी तिथि” पर इन लेन-देन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआई ने अगस्त 2025 में इस लेन-देन को मंजूरी दी थी। इसके बाद मार्च 2026 में एनसीएलटी की इलाहाबाद बेंच ने समाधान योजना को स्वीकृति प्रदान की।

हालाँकि,इस प्रक्रिया को कानूनी चुनौती भी मिली थी,लेकिन राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण यानी एनसीएलएटी ने मई 2026 में एनसीएलटी के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद अब इस अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा कंपनियों में से एक मानी जाती है। कंपनी तापीय और जलविद्युत परियोजनाओं का संचालन करती है और इसकी कुल संयुक्त क्षमता 2,220 मेगावाट बताई जाती है। इसके अलावा कंपनी की कोयला खनन,रेत खनन और सीमेंट पिसाई जैसे क्षेत्रों में भी हिस्सेदारी है। ऐसे में अदाणी पावर का यह निवेश केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं माना जा रहा,बल्कि इसे विविध ऊर्जा और औद्योगिक परिसंपत्तियों में रणनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

विशेष रूप से चुर्क थर्मल पावर प्लांट उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित है,जो लंबे समय से राज्य के ऊर्जा ढाँचे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 180 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र के अधिग्रहण से अदाणी पावर की उत्तर भारत में मौजूदगी और मजबूत हो सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ऊर्जा माँग लगातार बढ़ रही है,ऐसे में यह अधिग्रहण भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में अदाणी समूह ने बिजली,बंदरगाह,हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया है। अब जयप्रकाश समूह की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के जरिए कंपनी पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि दिवालिया समाधान प्रक्रिया के तहत इस तरह के अधिग्रहण बड़े औद्योगिक समूहों को मजबूत परिसंपत्तियाँ हासिल करने का अवसर देते हैं,जबकि संकट में फँसी कंपनियों के लिए समाधान का रास्ता भी तैयार करते हैं। जयप्रकाश समूह लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रहा था और उसकी कई परिसंपत्तियाँ समाधान प्रक्रिया के तहत लाई गई थीं।

इस सौदे के बाद बाजार की नजरें अब इस बात पर रहेंगी कि अदाणी पावर इन परिसंपत्तियों का संचालन किस तरह करती है और इन्हें अपनी मौजूदा ऊर्जा रणनीति में कैसे शामिल करती है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यह अधिग्रहण भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में अदाणी समूह की स्थिति को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।