लॉस एंजिल्स,4 जून (युआईटीवी)- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह के वातावरण और उसके विकासक्रम का अध्ययन करने वाले अपने ऐतिहासिक मिशन ‘मार्स एटमॉस्फियर एंड वोलाटाइल इवोल्यूशन’ यानी ‘मेवेन’ को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब पिछले वर्ष दिसंबर में अंतरिक्ष यान से संपर्क पूरी तरह टूट गया और कई महीनों तक प्रयासों के बावजूद उसे दोबारा सक्रिय नहीं किया जा सका। नासा ने कहा है कि विस्तृत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अंतरिक्ष यान अब अपनी वैज्ञानिक जिम्मेदारियों को पूरा करने या पृथ्वी पर डेटा भेजने में सक्षम नहीं है।
‘मेवेन’ मिशन को मंगल ग्रह के वातावरण के इतिहास और वहाँ समय के साथ हुए परिवर्तनों को समझने के लिए विकसित किया गया था। यह मिशन न केवल नासा के लिए बल्कि पूरे वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि इसने मंगल ग्रह के अतीत और उसके वातावरण से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध कराईं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जानकारियों ने यह समझने में मदद की कि कभी जल और संभावित जीवन की परिस्थितियों वाला मंगल ग्रह आज एक ठंडा और शुष्क ग्रह कैसे बन गया।
नासा के अनुसार ‘मेवेन’ अंतरिक्ष यान को 18 नवंबर 2013 को प्रक्षेपित किया गया था। लगभग दस महीने की लंबी यात्रा के बाद यह 21 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुँच गया। प्रारंभिक योजना के अनुसार इस मिशन को केवल एक वर्ष तक काम करना था,लेकिन इसने अपेक्षाओं से कहीं अधिक प्रदर्शन किया और लगातार 11 वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहकर वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण आँकड़े उपलब्ध कराता रहा।
अपने लंबे संचालन काल के दौरान ‘मेवेन’ ने मंगल ग्रह के ऊपरी वातावरण,सौर हवाओं के प्रभाव,वायुमंडलीय गैसों के नुकसान और ग्रह की जलवायु में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन किया। इस मिशन ने यह समझने में अहम योगदान दिया कि मंगल का वातावरण समय के साथ कैसे पतला होता गया और इसका ग्रह की सतह तथा वहाँ मौजूद जल पर क्या प्रभाव पड़ा।
नासा ने बताया कि अंतरिक्ष यान से अंतिम बार 6 दिसंबर 2025 को संपर्क स्थापित हुआ था। उस समय ‘मेवेन’ मंगल ग्रह के पीछे से गुजरने की नियमित प्रक्रिया पूरी कर रहा था। हालाँकि,इस चरण के बाद अचानक उसका संकेत पृथ्वी तक पहुँचना बंद हो गया। शुरू में वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि तकनीकी समस्या अस्थायी हो सकती है और अंतरिक्ष यान से दोबारा संपर्क स्थापित किया जा सकेगा,लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति गंभीर होती गई।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए नासा ने फरवरी में एक विशेष जाँच बोर्ड का गठन किया। इस बोर्ड का उद्देश्य संपर्क टूटने के कारणों का पता लगाना और यह मूल्यांकन करना था कि क्या अंतरिक्ष यान को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। कई महीनों तक तकनीकी विश्लेषण और उपलब्ध आँकड़ों के अध्ययन के बाद बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि ‘मेवेन’ को पुनर्जीवित करना संभव नहीं है।
प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि मंगल ग्रह के पीछे से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यान में असामान्य रूप से तेज घुमाव शुरू हो गया था। इस घुमाव के कारण उसकी दिशा और कक्षीय नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हुई। परिणामस्वरूप वह अपनी ऊर्जा प्रणाली को संतुलित नहीं रख सका और धीरे-धीरे उसकी बैटरियाँ पूरी तरह समाप्त हो गईं। ऊर्जा खत्म होने के बाद उसका संचार तंत्र भी बंद हो गया,जिससे पृथ्वी के साथ संपर्क स्थापित करना असंभव हो गया।
नासा ने स्पष्ट किया है कि हालाँकि,प्रारंभिक कारणों का पता चल चुका है,लेकिन इस तकनीकी विफलता की वास्तविक और विस्तृत वजह की जाँच अभी जारी है। एजेंसी को उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक अंतिम जाँच रिपोर्ट तैयार हो जाएगी,जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आखिर किस परिस्थिति ने इतने सफल मिशन को अचानक समाप्ति की ओर पहुँचा दिया।
मिशन समाप्त होने के बावजूद वैज्ञानिक समुदाय ‘मेवेन’ की उपलब्धियों को असाधारण मान रहा है। इस मिशन ने मंगल ग्रह के वातावरण से जुड़ी ऐसी जानकारियाँ प्रदान कीं,जिनकी मदद से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजना बनाना अधिक आसान हो गया है। विशेष रूप से मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी के लिए यह डेटा अत्यंत मूल्यवान माना जा रहा है।
नासा मुख्यालय में प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर ने कहा कि ‘मेवेन’ द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक आँकड़े भविष्य में मंगल पर मानव मिशन भेजने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उनके अनुसार इस मिशन ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की है कि मंगल ग्रह पर मौजूद विकिरण का स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार की चुनौतियाँ पैदा कर सकता है और वहाँ सुरक्षित मिशन संचालित करने के लिए किन सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यान द्वारा भेजे गए आँकड़ें आने वाले वर्षों तक वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग किए जाते रहेंगे। मंगल ग्रह पर मानव उपस्थिति की संभावनाओं का आकलन करने,सुरक्षा तकनीकों को विकसित करने और भविष्य के रोबोटिक तथा मानव मिशनों की रणनीति तैयार करने में यह जानकारी महत्वपूर्ण साबित होगी।
नासा ने मिशन के औपचारिक समापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत ‘मेवेन’ द्वारा एकत्र किए गए सभी वैज्ञानिक आँकड़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जा रहा है,ताकि दुनिया भर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक भविष्य में उनका उपयोग कर सकें। एजेंसी का कहना है कि मिशन भले ही समाप्त हो गया हो,लेकिन उसकी वैज्ञानिक विरासत आने वाले दशकों तक अंतरिक्ष अनुसंधान को दिशा देती रहेगी।
‘मेवेन’ की सफलता इस बात का भी प्रमाण है कि अंतरिक्ष अभियानों की वास्तविक क्षमता कई बार उनकी निर्धारित समय सीमा से कहीं अधिक होती है। एक वर्ष के लिए डिजाइन किया गया यह मिशन 11 वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहा और इस दौरान उसने मंगल ग्रह के बारे में मानव ज्ञान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मंगल ग्रह के वातावरण और उसके विकास को समझने की दिशा में ‘मेवेन’ की भूमिका को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाएगा। यद्यपि अब यह मिशन समाप्त हो चुका है,लेकिन इसके द्वारा प्रदान की गई जानकारियाँ भविष्य की पीढ़ियों के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बनी रहेंगी।
