रोम,16 जुलाई (युआईटीवी)- इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति सामने आई है। इटली की राजधानी रोम में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के छठे दौर के बाद दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में एक पायलट परियोजना शुरू करने की दिशा में सहमति बनने के संकेत मिले हैं। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से दक्षिणी लेबनान के कुछ क्षेत्रों से पीछे हटेगी और उन इलाकों का नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपा जाएगा। इस पहल को क्षेत्र में स्थायी शांति और संघर्ष विराम व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इटली की समाचार एजेंसी एजेंजिया नोवा की रिपोर्ट के अनुसार,दोनों पक्ष दक्षिणी लेबनान के पहले दो पायलट क्षेत्रों से इजरायली सेना की वापसी के लिए एक व्यावहारिक प्रणाली विकसित करने पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही भविष्य में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वार्ता जारी रखने का भी निर्णय लिया गया है। यह प्रगति अमेरिका की मध्यस्थता में आयोजित छठे दौर की बातचीत के बाद सामने आई है,जिसने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को नई गति दी है।
रिपोर्ट में बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वार्ता का मुख्य उद्देश्य 26 जून को वॉशिंगटन में हुए फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने की दिशा में ठोस कदम तय करना था। इस दौरान दोनों पक्षों ने उन प्रक्रियाओं,शर्तों और चरणों पर विस्तार से चर्चा की, जिनके आधार पर इजरायली सेना की वापसी,लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती और दक्षिणी लेबनान में सरकार का प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
वार्ता में एक महत्वपूर्ण विषय हिज्बुल्लाह के हथियारों का मुद्दा भी रहा। इजरायल लंबे समय से यह माँग करता रहा है कि जिन इलाकों से उसकी सेना पीछे हटे, वहाँ दोबारा हिज्बुल्लाह का प्रभाव स्थापित न हो। इसी कारण उसने किसी भी वापसी से पहले विश्वसनीय और सत्यापित की जा सकने वाली सुरक्षा गारंटी की आवश्यकता पर जोर दिया। इजरायल का मानना है कि केवल तभी उसकी सेनाओं की पूर्ण वापसी संभव होगी, जब लेबनानी सेना उन क्षेत्रों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सके और वहाँ हिज्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने की दिशा में ठोस प्रगति दिखाई दे।
दूसरी ओर लेबनान का रुख भी स्पष्ट रहा। लेबनानी पक्ष का कहना है कि दक्षिणी क्षेत्रों में राष्ट्रीय संप्रभुता की पुनर्स्थापना उसका प्रमुख उद्देश्य है,लेकिन यह प्रक्रिया बेहद सावधानी से आगे बढ़ाई जानी चाहिए। लेबनान नहीं चाहता कि इस बदलाव के दौरान देश के भीतर किसी प्रकार की नई अस्थिरता या आंतरिक टकराव पैदा हो। इसलिए वह चरणबद्ध और संतुलित तरीके से इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
बातचीत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों ने यह स्वीकार किया है कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी और इसे पूरा होने में समय लगेगा। दक्षिणी लेबनान की सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सैन्य नियंत्रण जैसे कई जटिल पहलुओं पर समन्वय की आवश्यकता होगी। इसलिए दोनों पक्षों ने जल्दबाजी के बजाय व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
रोम में आयोजित यह छठे दौर की वार्ता अमेरिकी दूतावास में हुई। अमेरिका लगातार दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और संघर्ष विराम व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इससे पहले पाँचवें दौर की वार्ता पिछले महीने के अंत में वॉशिंगटन में आयोजित की गई थी। उस बैठक का उद्देश्य भी संघर्ष विराम संबंधी ढाँचे को आगे बढ़ाना और जमीन पर स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना था।
इस बार की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में एक और दौर की बातचीत आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की। हालाँकि,अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि पायलट परियोजना की प्रारंभिक प्रगति और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद अगले चरण की बातचीत आयोजित की जाएगी।
दक्षिणी लेबनान लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का केंद्र रहा है। यहाँ सुरक्षा,सीमाई नियंत्रण और विभिन्न सशस्त्र समूहों की मौजूदगी को लेकर समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है। ऐसे में यदि प्रस्तावित पायलट परियोजना सफल होती है,तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। साथ ही इससे भविष्य में व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा समझौते का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में इटली की भूमिका भी चर्चा का विषय रही। इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने इस बैठक के आयोजन को मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए इटली के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि रोम में दोनों देशों के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए एक मंच उपलब्ध कराना यह दर्शाता है कि इटली क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय योगदान देना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल और लेबनान के बीच किसी भी प्रकार की प्रगति केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यदि दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था सफलतापूर्वक लेबनानी सेना के हाथों में स्थानांतरित होती है और वहाँ स्थिरता बनी रहती है,तो इससे सीमा क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है और भविष्य में बड़े सैन्य टकराव की आशंकाएँ भी घट सकती हैं।
हालाँकि,अभी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि जिन क्षेत्रों से इजरायली सेना हटे, वहाँ सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी बनी रहे और किसी भी सशस्त्र संगठन को दोबारा सक्रिय होने का अवसर न मिले। इसके साथ ही लेबनानी सरकार और उसकी सेना के सामने भी उन क्षेत्रों में प्रशासनिक और सुरक्षा नियंत्रण स्थापित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल रोम में हुई छठे दौर की वार्ता को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है और पायलट परियोजना के माध्यम से जमीन पर विश्वास निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है। यदि यह पहल सफल रहती है,तो आने वाले समय में इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है।
