अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान की जाँच की माँग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज,पारदर्शिता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर होगी बहस

नई दिल्ली,11 जुलाई (युआईटीवी)- अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों पर सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट उन जनहित याचिकाओं पर विचार करेगा, जिनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान,चढ़ावे और अन्य वित्तीय संसाधनों के उपयोग में कथित अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की गई है। इस मामले को धार्मिक आस्था,सार्वजनिक विश्वास और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है,इसलिए इस पर होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कार्यसूची के अनुसार,भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत के समक्ष एक से अधिक याचिकाएं लंबित हैं,जिनमें अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

इन याचिकाओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा स्वयं दायर रिट याचिका,अजय कुमार राय और अन्य की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सहित अन्य पक्षों के खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका तथा राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका शामिल है। तीनों याचिकाओं में अलग-अलग पहलुओं को उठाया गया है, लेकिन सभी का मूल उद्देश्य मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कराना है।

इससे पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ के समक्ष उल्लेख के लिए लाया गया था। उस समय न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और मामले की तुरंत सुनवाई आवश्यक है। हालाँकि,अदालत ने पूछा था कि इस मामले में इतनी तात्कालिकता क्यों है और निर्देश दिया था कि न्यायालय की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत इस याचिका को सूचीबद्ध किया जाए।

याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने अपनी याचिका में माँग की है कि राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएँ। उनका कहना है कि मंदिर में प्राप्त होने वाला चढ़ावा केवल आर्थिक संसाधन नहीं है,बल्कि यह देवता की संपत्ति मानी जाती है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय कानून के अनुसार देवता एक विधिक व्यक्तित्व रखते हैं और उनके नाम पर प्राप्त संपत्ति का संरक्षण तथा पारदर्शी प्रबंधन ट्रस्टियों की कानूनी जिम्मेदारी है। इसलिए ट्रस्ट के सभी कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे से संबंधित सभी दस्तावेज,डिजिटल रिकॉर्ड,सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक लॉग तत्काल सुरक्षित रखने का आदेश दिया जाए,ताकि किसी भी संभावित जाँच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हो सकें। इसके साथ ही विशेष जाँच दल द्वारा की जा रही जाँच की सीलबंद स्थिति रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की माँग की गई है।

याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि ट्रस्ट के गठन के बाद से अब तक प्राप्त सभी दान,नकद राशि,बहुमूल्य वस्तुओं और अन्य आर्थिक योगदान का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि इस प्रकार की जाँच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया गया या नहीं।

याचिका में केवल वर्तमान मामले तक ही सीमित राहत नहीं माँगी गई है,बल्कि राष्ट्रीय महत्व के सभी प्रमुख मंदिरों में सार्वजनिक दान और चढ़ावे के प्रबंधन के लिए न्यूनतम संवैधानिक सुरक्षा उपाय निर्धारित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि देशभर के बड़े धार्मिक संस्थानों में बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है और उसके पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक समान व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए,ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

याचिका में हाल के घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि सार्वजनिक रिपोर्टों तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जाँच दल की जाँच के दौरान मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं, गबन और वित्तीय कुप्रबंधन से जुड़े आरोप सामने आए। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत से स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की गई है।

दूसरी ओर,सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी याचिका में मामले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने की माँग की है। उनका कहना है कि वर्तमान जाँच सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जानी चाहिए,ताकि निष्पक्षता को लेकर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि जाँच पूरी होने तक ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए एक अंतरिम पर्यवेक्षण समिति गठित की जाए।

प्रस्तावित समिति में सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल करने की माँग की गई है। याचिका के अनुसार यह समिति ट्रस्ट के गैर-धार्मिक वित्तीय मामलों की निगरानी करेगी,सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखेगी,जाँच पूरी होने तक बड़े वित्तीय निर्णयों पर नजर रखेगी,व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट सुनिश्चित करेगी तथा ट्रस्ट के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण और दान से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण,दान का लेखा-जोखा और संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए,ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को यह जानकारी उपलब्ध हो सके कि मंदिर में प्राप्त धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों तक सीमित नहीं है,बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता,जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास जैसे व्यापक संवैधानिक प्रश्नों से भी जुड़ा हुआ है। अदालत के समक्ष यह भी विचार का विषय होगा कि बड़े धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन के लिए किस प्रकार की संस्थागत व्यवस्था और निगरानी आवश्यक है तथा क्या इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

सोमवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले याचिकाओं की स्वीकार्यता, आरोपों की प्रकृति और माँगी गई राहतों पर विचार कर सकता है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि मामले में संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया जाए,किसी स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता है या नहीं,अथवा याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर आगे किस प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाए।

देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का रुख न केवल इस विशेष मामले की दिशा तय करेगा,बल्कि भविष्य में देश के प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़े मानकों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।